नगरा प्रखंड में शिक्षकों के वेतन से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितता की पड़ताल; डीईओ कार्यालय के स्थापना संभाग में हुई कार्रवाई से शिक्षा विभाग में हलचल, भुगतान से पहले रिकॉर्ड के सत्यापन पर जोर
छपरा। बिहार में शिक्षकों के वेतन भुगतान से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच अब सारण जिले तक पहुंच गई है। बुधवार को निगरानी टीम ने छपरा स्थित जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) कार्यालय के स्थापना संभाग से नगरा प्रखंड संसाधन केंद्र (बीआरसी) के अकाउंटेंट राजीव कुमार को गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही कार्यालय में हलचल मच गई। हालांकि, गिरफ्तारी के बाद अब तक आरोपों और कार्रवाई के आधार को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
भागलपुर में जांच के दौरान नगरा का मामला आया सामने
विभागीय सूत्रों के अनुसार, राजीव कुमार की गिरफ्तारी शिक्षकों के वेतन भुगतान में कथित वित्तीय गड़बड़ी से जुड़े मामले में हुई है। बताया जा रहा है कि भागलपुर में शिक्षकों के गलत वेतन भुगतान की जांच के दौरान सारण जिले के नगरा प्रखंड में भी ऐसी ही अनियमितता का मामला सामने आया था। इसके बाद निगरानी टीम ने कार्रवाई की।
राजीव कुमार वर्ष 2007 से नगरा प्रखंड के बीआरसी में कार्यरत बताए जाते हैं। हालांकि, उनकी गिरफ्तारी में उनकी कथित भूमिका क्या थी, भुगतान में कितनी राशि की गड़बड़ी हुई और मामले में अन्य कौन-कौन लोग जांच के दायरे में हैं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मेकर, चेकर और एप्रूवर की भूमिका भी जांच के दायरे में
शिक्षकों के वेतन भुगतान की प्रक्रिया में कई स्तरों पर जांच और स्वीकृति की व्यवस्था होती है। इसमें मेकर भुगतान से संबंधित विवरण तैयार करता है, चेकर उसकी जांच करता है और एप्रूवर अंतिम स्वीकृति देता है। ऐसे में रिकॉर्ड तैयार करने से लेकर भुगतान को मंजूरी देने तक की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की आशंका होने पर संबंधित जिम्मेदारियों की पड़ताल जरूरी हो जाती है।

विभागीय स्तर पर मेकर, चेकर और एप्रूवर की भूमिका की जांच के निर्देश दिए जाने की जानकारी है। इसका उद्देश्य वेतन संबंधी विवरणों और कर्मचारियों के रिकॉर्ड का मिलान कर संभावित विसंगतियों का पता लगाना है। हालांकि, राजीव कुमार के मामले में इन तीनों स्तरों में से किसी विशेष स्तर की भूमिका की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
सत्यापन के चलते वेतन भुगतान पर भी असर
वेतन भुगतान से जुड़े मामलों की जांच और रिकॉर्ड के सत्यापन का असर शिक्षकों के वेतन पर भी पड़ने की जानकारी मिली है। भुगतान से पहले विवरणों की जांच सुनिश्चित करने के निर्देश के कारण प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। ऐसे में एक ओर अनियमितताओं की पहचान और रोकथाम जरूरी है, वहीं दूसरी ओर सत्यापन में देरी से शिक्षकों का वेतन अटकने की समस्या भी चिंता का विषय बन सकती है।
फिलहाल निगरानी की कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हैं। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि कथित गड़बड़ी किस स्तर पर हुई, इसमें किन लोगों की भूमिका रही और वित्तीय अनियमितता की वास्तविक स्थिति क्या है।
