नई दिल्ली/चेन्नई: चुनाव आयोग और Special Intensive Revision (SIR) को लेकर देश की सियासत में जारी घमासान के बीच अब विपक्षी खेमे के भीतर भी तल्खी सतह पर आने लगी है। दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे राहुल गांधी पर तमिलनाडु की सत्तारूढ़ राजनीति से जुड़े DMK ने तीखा हमला बोला है।
पार्टी ने सवाल उठाया है कि तमिलनाडु में SIR के तहत मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर राहुल गांधी का वास्तविक रुख क्या है।
DMK नेता सरवनन अन्नादुरई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर राहुल गांधी को सीधे निशाने पर लेते हुए पूछा कि जब कांग्रेस नेतृत्व देशभर में SIR का विरोध कर रहा है, तब तमिलनाडु में इसी प्रक्रिया के दौरान हुए नामों के विलोपन पर राहुल गांधी की स्थिति क्या है। उनके सवाल ने कांग्रेस और DMK के बीच पहले से मौजूद राजनीतिक दूरी को एक बार फिर सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
What’s the stand of @RahulGandhi with regard to the deletions through SIR in TN.
Why is he not endorsing Kharge jis statement that all State Governments elected after SIR should be dissolved?
Is he afraid of @actorvijay to speak about SIR in Tamilnadu.
What a duplicitous man?
Once a skunk, always a skunk.
— Saravanan Annadurai (@saravofcl) October 6, 2026
खरगे के बयान पर भी DMK ने उठाया सवाल
DMK नेता ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के उस बयान का भी हवाला दिया, जिसमें SIR के बाद निर्वाचित राज्य सरकारों को लेकर सवाल उठाया गया था। अन्नादुरई ने पूछा कि राहुल गांधी खरगे के इस रुख का समर्थन क्यों नहीं कर रहे हैं।

उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या राहुल गांधी तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय को लेकर राजनीतिक दबाव में हैं और इसी वजह से राज्य में SIR के मुद्दे पर मुखर नहीं हो रहे।
अपने बयान में उन्होंने राहुल गांधी पर ‘दोहरा चरित्र’ रखने का आरोप लगाया। हालांकि, ये टिप्पणियां DMK नेता की राजनीतिक प्रतिक्रिया और आरोप हैं; राहुल गांधी या कांग्रेस की ओर से इस पर तत्काल कोई जवाब सामने नहीं आया है।
दिल्ली में SIR के खिलाफ राहुल गांधी का प्रदर्शन
यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब राहुल गांधी दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
मंगलवार को राहुल गांधी विपक्षी नेताओं के साथ संसद से निर्वाचन आयोग कार्यालय की ओर मार्च करने पहुंचे थे। पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने धरना दिया।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस दौरान चुनावी अधिकारों को लेकर सरकार और निर्वाचन आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्ष लगातार राजनीतिक और संवैधानिक सवाल उठा रहा है।
DMK और कांग्रेस के रिश्तों में क्यों आई दरार?
तमिलनाडु की राजनीति में इस बयान को महज एक सामान्य राजनीतिक टिप्पणी के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। कांग्रेस और DMK के रिश्तों में पिछले कुछ समय में बड़ा बदलाव आया है।
अप्रैल में हुए विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस ने DMK के साथ अपना पुराना गठबंधन समाप्त कर दिया था। इसके बाद DMK ने INDIA गठबंधन से भी दूरी बना ली। बाद के राजनीतिक घटनाक्रम में कांग्रेस तमिलनाडु के सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा बनी।
इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में SIR का मुद्दा दोनों दलों के बीच एक नए टकराव का आधार बनता दिखाई दे रहा है। DMK ने पिछले सप्ताह INDIA गठबंधन की उस बैठक में भी हिस्सा नहीं लिया था, जिसमें ज्ञानेश कुमार और SIR के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की रणनीति पर चर्चा हुई थी। हालांकि, पार्टी ने इस मुद्दे पर विपक्षी अभियान को समर्थन देने की बात कही थी। Jagran

तमिलनाडु में SIR का मुद्दा क्यों अहम है?
तमिलनाडु में SIR की प्रक्रिया पहले ही राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन चुकी है। राज्य में अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने और नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाने को लेकर भी राजनीतिक दलों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी थीं।
हालिया घटनाक्रम में चुनाव आयोग ने ऐसे पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने की प्रक्रिया भी शुरू की है, जो SIR के दौरान छूट गए थे।
ऐसे में DMK का राहुल गांधी से सीधे सवाल करना विपक्षी राजनीति में बढ़ती अंतर्विरोधी रेखाओं को सामने लाता है। एक तरफ कांग्रेस SIR को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन को धार दे रही है, वहीं दूसरी तरफ तमिलनाडु में उसका राजनीतिक समीकरण पूरी तरह अलग दिशा में खड़ा नजर आ रहा है।
फिलहाल राहुल गांधी या कांग्रेस की ओर से DMK नेता सरवनन अन्नादुरई के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस इस सवाल का राजनीतिक जवाब देती है या तमिलनाडु के मुद्दे को राज्य की राजनीति तक सीमित रखती है।

