सुशील कुमार आय से अधिक संपत्ति मामले में बिहार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने तीन जिलों में एक साथ तलाशी अभियान चलाया। मुजफ्फरपुर जिले के माधोपुर सुस्ता नगर पंचायत में कार्यपालक पदाधिकारी के पद पर तैनात सुशील कुमार के पटना, मुजफ्फरपुर और सहरसा स्थित ठिकानों को खंगाला गया। सहरसा के सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के तरियामा गांव स्थित उनके पैतृक आवास पर भी गुरुवार देर रात तक तलाशी चली। निगरानी ब्यूरो की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, अधिकारी पर अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से करीब 110 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है।
एक करोड़ 58 लाख रुपये से अधिक की अनुपातहीन संपत्ति का मामला
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना की पांच नवंबर 2026 की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस मामले में निगरानी थाना कांड संख्या 131/26 दर्ज किया गया है। प्राथमिकी चार नवंबर 2026 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(2) के साथ धारा 13(1)(बी) के तहत दर्ज की गई। सुशील कुमार पर एक करोड़ 58 लाख 733 रुपये की अनुपातहीन संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया गया है।
यह मामला ज्ञात आय के स्रोतों और कथित तौर पर अर्जित संपत्ति के बीच अंतर को लेकर दर्ज किया गया है। जांच एजेंसी ने प्रारंभिक स्तर पर संपत्तियों और बैंक खातों से जुड़े विवरण जुटाए हैं। हालांकि, प्राथमिकी में लगाए गए आरोप अभी जांच के अधीन हैं। संपत्ति के स्रोत, खरीद के समय और संबंधित वित्तीय लेन-देन का सत्यापन आगे की जांच में किया जाएगा।
पत्नी और परिजनों के नाम पर छह अचल संपत्तियों का पता
प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि प्रारंभिक जांच के दौरान सुशील कुमार, उनकी पत्नी चांदनी गुप्ता और परिजनों के नाम पर कुल छह अचल संपत्तियों की जानकारी मिली। इन संपत्तियों का अनुमानित मूल्य एक करोड़ 37 लाख 71 हजार 400 रुपये आंका गया है। इसके अतिरिक्त विभिन्न बैंकों में जमा चल संपत्ति के रूप में 28 लाख 54 हजार रुपये की जानकारी सामने आई है।

इस तरह प्रारंभिक जांच में कुल एक करोड़ 66 लाख 25 हजार 400 रुपये की संपत्ति का पता चलने की बात कही गई है। यह आंकड़ा जांच एजेंसी की ओर से जारी प्रारंभिक विवरण पर आधारित है। तलाशी और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद संपत्तियों के मूल्य तथा उनके स्वामित्व से संबंधित तथ्य स्पष्ट हो सकेंगे।
तीन जिलों में तीन तलाशी दलों ने की कार्रवाई
निगरानी ब्यूरो को विशेष न्यायालय, निगरानी, पटना से सर्च वारंट प्राप्त हुआ था। इसके बाद तीन अलग-अलग तलाशी दल गठित किए गए। इन दलों ने पांच नवंबर को पटना, मुजफ्फरपुर और सहरसा जिले में स्थित आवासीय तथा कार्यालय परिसरों में तलाशी शुरू की। इसी क्रम में सिमरी बख्तियारपुर के तरियामा गांव स्थित पैतृक घर में भी जांच की गई।
तरियामा में हुई कार्रवाई के संबंध में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, देर रात तक तलाशी जारी रही। वहां से कोई आपत्तिजनक सामग्री या संपत्ति से जुड़ा महत्वपूर्ण दस्तावेज मिलने की पुष्टि नहीं की गई। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि अन्य स्थानों पर भी तलाशी का परिणाम समान रहा। तीनों जिलों में तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों और अन्य सामग्री का समेकित सत्यापन किया जाना है।
दस्तावेजों के सत्यापन के बाद आगे की कार्रवाई
निगरानी ब्यूरो ने कहा है कि मामले का अनुसंधान और तलाशी अभियान जारी है। जांच एजेंसी संपत्ति से जुड़े कागजात, बैंक खातों के रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय विवरणों का मिलान करेगी। यह भी देखा जाएगा कि संबंधित संपत्तियां किस आय स्रोत से खरीदी गईं और क्या उनके स्वामित्व या भुगतान में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका रही है।

आय से अधिक संपत्ति के मामलों में अंतिम निष्कर्ष दस्तावेजी साक्ष्य, आय के वैध स्रोत और संपत्ति के वास्तविक मूल्य के परीक्षण के बाद ही निकलता है। फिलहाल सुशील कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने और तीन जिलों में तलाशी की कार्रवाई की पुष्टि हुई है। आरोपों की अंतिम स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होगी।
