दूसरी और अंतिम राष्ट्रपति पारी बीच में छोड़ी, 25 अक्टूबर को होंगे मध्यावधि संसदीय चुनाव; वुसिक की पार्टी सरकार बनाती है तो उनके प्रधानमंत्री बनने का रास्ता खुल सकता है
बेलग्रेड: सर्बिया की राजनीति में रविवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला। लंबे समय से देश की राजनीति के केंद्र में रहे राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वुसिक ने 27 सितंबर को बेलग्रेड स्थित राष्ट्रपति भवन से समर्थकों को संबोधित करने के बाद इस्तीफे पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने कहा कि वह अब राष्ट्रपति पद पर नहीं हैं और अगले दिन अपनी जिम्मेदारियां संसद की अध्यक्ष आना ब्रनाबिक को सौंप देंगे। ब्रनाबिक अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगी।
वुसिक का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब सर्बिया में 25 अक्टूबर को मध्यावधि संसदीय चुनाव होने जा रहे हैं। वुसिक की सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी (SNS) इन चुनावों में उतर रही है। अगर उनकी पार्टी सरकार बनाने में सफल होती है, तो वुसिक के प्रधानमंत्री बनने का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, सर्बिया सरकार के आधिकारिक बयान में वुसिक ने चुनाव में एक सामान्य नागरिक के तौर पर हिस्सा लेने की बात कही है।
तीसरी बार राष्ट्रपति नहीं बन सकते वुसिक
56 वर्षीय वुसिक सर्बिया के राष्ट्रपति के तौर पर अपना दूसरा कार्यकाल पूरा कर रहे थे। उनका मौजूदा कार्यकाल मई 2027 में खत्म होना था, लेकिन उन्होंने करीब सात महीने पहले ही पद छोड़ दिया। सर्बिया का संविधान किसी व्यक्ति को तीसरी बार राष्ट्रपति बनने की अनुमति नहीं देता। ऐसे में राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद संसदीय राजनीति के रास्ते सत्ता में बने रहने की संभावना उनके लिए महत्वपूर्ण हो गई है।
वुसिक ने अपने संबोधन में अपने कार्यकाल का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने देश और जनता की सेवा ईमानदारी से की है। उन्होंने समर्थकों से कहा कि उनके लिए लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।
इस्तीफे के बाद क्या होगा?
वुसिक के पद छोड़ने के बाद संसद की अध्यक्ष आना ब्रनाबिक कार्यवाहक राष्ट्रपति की भूमिका निभाएंगी। Reuters के मुताबिक, नए राष्ट्रपति का चुनाव निर्धारित समयसीमा के भीतर कराया जाना होगा और वुसिक ने कहा है कि राष्ट्रपति चुनाव का पहला चरण दिसंबर के अंत तक हो जाना चाहिए।
इसका मतलब है कि सर्बिया आने वाले महीनों में सिर्फ संसदीय चुनाव ही नहीं, बल्कि राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया से भी गुजरेगा।
नवंबर 2024 की घटना से शुरू हुआ राजनीतिक संकट
वुसिक का इस्तीफा सिर्फ चुनावी रणनीति के संदर्भ में नहीं देखा जा रहा है। इसके पीछे पिछले करीब दो साल से चल रहा राजनीतिक संकट भी महत्वपूर्ण है।
1 नवंबर 2024 को सर्बिया के दूसरे सबसे बड़े शहर नोवी साद में रेलवे स्टेशन की छतरी/कैनोपी का एक हिस्सा ढह गया था। हादसे में 16 लोगों की मौत हुई। इसके बाद देशभर में छात्रों के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए। प्रदर्शनकारियों ने घटना की जवाबदेही तय करने, सरकारी खरीद में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। साथ ही वे समय से पहले संसदीय चुनाव कराने की मांग भी कर रहे थे।
सरकार ने भ्रष्टाचार और घटना के लिए सीधे तौर पर अपनी जिम्मेदारी के आरोपों को खारिज किया। हालांकि, इस हादसे के बाद कई अधिकारियों पर कार्रवाई हुई और कुछ मंत्रियों ने पद छोड़ा या उन्हें गिरफ्तार किया गया। विरोध आंदोलन धीरे-धीरे सरकार के खिलाफ व्यापक राजनीतिक आंदोलन में बदल गया।
छात्रों का आंदोलन भी चुनावी मैदान में
25 अक्टूबर का चुनाव वुसिक की SNS और उसके सहयोगियों के लिए महत्वपूर्ण परीक्षा माना जा रहा है। दूसरी ओर, छात्र आंदोलन से जुड़ा समूह “Students Win” चुनाव मैदान में है। इसके साथ विपक्षी दलों का भी समर्थन है। इसके अलावा यूरोप समर्थक विपक्षी गठबंधन “European Serbia” समेत कई अन्य राजनीतिक समूह भी चुनाव लड़ रहे हैं।
इस चुनाव में करीब दो साल से चल रहे छात्र आंदोलनों का राजनीतिक असर भी सामने आ सकता है। हालांकि विभिन्न सर्वेक्षणों के दावों और उनकी पद्धति को लेकर स्वतंत्र सत्यापन की सीमाएं भी बताई गई हैं।
एक दशक से सर्बियाई राजनीति में वुसिक का दबदबा
अलेक्जेंडर वुसिक पिछले एक दशक से अधिक समय से सर्बिया की राजनीति में प्रमुख चेहरा रहे हैं। वह राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री, दोनों पदों पर रह चुके हैं। उनके समर्थक उन्हें राजनीतिक स्थिरता, विकास परियोजनाओं और राष्ट्रीय हितों पर जोर देने वाले नेता के रूप में देखते हैं।
वहीं उनके विरोधियों ने सरकार पर सत्ता के केंद्रीकरण, संस्थाओं पर राजनीतिक प्रभाव और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप लगाए हैं। ये आरोप विपक्ष और प्रदर्शनकारियों की राजनीति का भी प्रमुख हिस्सा रहे हैं। वुसिक और उनके सहयोगी इन आरोपों को स्वीकार नहीं करते।
रूस और यूरोप के बीच संतुलन भी बड़ी चुनौती
सर्बिया की विदेश नीति भी वुसिक के राजनीतिक दौर का अहम हिस्सा रही है। देश यूरोपीय संघ में शामिल होने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसके रूस के साथ भी लंबे समय से करीबी संबंध हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद यह संतुलन और मुश्किल हुआ है। AP के अनुसार, रूस के खिलाफ यूरोपीय प्रतिबंधों में शामिल न होने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर उठी चिंताओं ने सर्बिया की EU सदस्यता प्रक्रिया को प्रभावित किया है।
अब 25 अक्टूबर का संसदीय चुनाव यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगा कि सर्बिया की अगली सरकार किस राजनीतिक समीकरण के साथ बनेगी। इसके बाद राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया भी पूरी होनी है। यानी वुसिक के इस्तीफे के साथ सर्बिया की राजनीति में एक अध्याय खत्म होने के बजाय सत्ता और चुनाव की एक नई प्रक्रिया शुरू हुई है।