बिना कंप्यूटर के भी सीख सकेंगे AI के गुर, फर्जी खबरों की पहचान से लेकर डेटा की सुरक्षा तक पर रहेगा जोर
कोलकाता। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के बीच अब स्कूली विद्यार्थियों को भी इस आधुनिक तकनीक की बुनियादी समझ देने की तैयारी है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020 के अनुरूप कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए संगणनात्मक चिंतन (Computational Thinking) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित पाठ्यक्रम तैयार करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को यह समझाना है कि AI कैसे काम करता है, इसका इस्तेमाल कहां और किस तरह किया जा सकता है तथा इसके उपयोग में किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
इस पहल की खास बात यह है कि AI सीखने के लिए विद्यार्थियों को पहले से कंप्यूटर चलाने या तकनीकी विषयों का ज्ञान होना अनिवार्य नहीं होगा। आसान उदाहरणों, कक्षा में होने वाली चर्चाओं और व्यावहारिक गतिविधियों के जरिए उन्हें तकनीक की बुनियादी अवधारणाओं से परिचित कराने की योजना है। हालांकि, पाठ्यक्रम को लागू करने की समय-सीमा और कक्षा के अनुसार विस्तृत विषय-वस्तु की आधिकारिक जानकारी की पुष्टि जरूरी है।
समस्या को समझने और समाधान खोजने की कला भी सीखेंगे विद्यार्थी
प्रस्तावित पाठ्यक्रम में संगणनात्मक चिंतन पर विशेष जोर होगा। यह ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें किसी बड़ी समस्या को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर उसका क्रमबद्ध समाधान खोजा जाता है। इस तरीके से विद्यार्थियों को किसी समस्या के कारणों को समझने, जरूरी जानकारी पहचानने और उपलब्ध विकल्पों के आधार पर समाधान तक पहुंचने की आदत विकसित करने में मदद मिल सकती है।

मसलन, किसी विद्यार्थी को यह समझना है कि स्कूल आने में रोज देर क्यों होती है। वह यात्रा के समय, रास्ते में लगने वाले समय और अपनी तैयारी की आदतों को अलग-अलग देखकर समस्या का कारण तलाश सकता है। यही क्रमबद्ध सोच तकनीकी समाधान विकसित करने और AI की कार्यप्रणाली समझने में भी उपयोगी होती है।
पाठ्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों की तार्किक क्षमता, रचनात्मकता और समस्या सुलझाने की योग्यता को मजबूत करना है। इसके साथ वे यह भी समझ सकेंगे कि AI किन कामों में मदद कर सकता है और किन परिस्थितियों में उसके परिणामों पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए।
कंप्यूटर नहीं है तो भी नहीं रुकेगी पढ़ाई
डिजिटल संसाधनों की कमी किसी विद्यार्थी की सीखने की राह में बाधा न बने, इसके लिए पाठ्यक्रम को बिना कंप्यूटर के भी पढ़ाए जाने योग्य बनाने पर जोर दिया जा रहा है। सामान्य कक्षा में शिक्षक चर्चा, समूह गतिविधियों और रोजमर्रा के उदाहरणों के माध्यम से AI से जुड़ी अवधारणाएं समझा सकेंगे।
यह व्यवस्था खासतौर पर उन स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी हो सकती है, जहां कंप्यूटर लैब, इंटरनेट या अन्य डिजिटल उपकरण पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं हैं। इससे तकनीकी शिक्षा को केवल बड़े शहरों या बेहतर सुविधाओं वाले स्कूलों तक सीमित रहने से रोकने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, AI की अवधारणाओं को बिना डिजिटल उपकरणों के समझना और वास्तविक AI टूल का इस्तेमाल करना अलग-अलग बातें हैं। इसलिए विद्यार्थियों को तकनीक का व्यावहारिक अनुभव देने के लिए स्कूलों में उपलब्ध संसाधनों और शिक्षकों की तैयारी की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।
फर्जी खबरों और AI से बनी सामग्री की पहचान पर जोर
आज इंटरनेट और सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं, बदली हुई तस्वीरों, नकली वीडियो और AI से तैयार सामग्री का प्रसार एक बड़ी चुनौती बन चुका है। ऐसे में विद्यार्थियों को केवल AI का इस्तेमाल करना सिखाना पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें यह पहचानना भी आना चाहिए कि तकनीक से मिली जानकारी सही है या नहीं।
प्रस्तावित पाठ्यक्रम में व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता, डिजिटल सुरक्षा, भ्रामक सूचनाओं की पहचान और AI से तैयार सामग्री की सत्यता जांचने जैसे विषयों पर ध्यान दिए जाने की बात है। विद्यार्थियों को यह समझना होगा कि AI से मिला हर उत्तर सही नहीं होता और कई बार वह गलत जानकारी को भी विश्वास के साथ प्रस्तुत कर सकता है।
इसलिए किसी तथ्य, तस्वीर या दावे को सही मानने से पहले विश्वसनीय स्रोतों से उसकी पुष्टि करना जरूरी है। यह कौशल पढ़ाई के साथ-साथ सोशल मीडिया के जिम्मेदार इस्तेमाल और भविष्य में डिजिटल नागरिक के रूप में उनकी भूमिका के लिए भी महत्वपूर्ण होगा।

AI का इस्तेमाल सीखने के साथ नैतिक जिम्मेदारी भी समझेंगे
कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग और संचार सहित कई क्षेत्रों में बढ़ रहा है। आने वाले समय में विद्यार्थियों को पढ़ाई और रोजगार के दौरान भी इस तकनीक से जुड़ना पड़ सकता है। ऐसे में AI की बुनियादी समझ उन्हें बदलती दुनिया के लिए तैयार करने में मदद कर सकती है।
लेकिन तकनीक का इस्तेमाल करते समय मौलिक सोच, गोपनीयता और जिम्मेदारी बनाए रखना भी जरूरी है। विद्यार्थियों को यह समझना होगा कि AI किसी काम में सहायता कर सकता है, लेकिन विचार करने, तथ्यों की जांच करने और अंतिम निर्णय लेने की जिम्मेदारी इंसान की ही रहती है।
स्कूली स्तर पर इस तरह की शिक्षा से विद्यार्थियों में तकनीक को लेकर जिज्ञासा बढ़ाने के साथ उसके फायदे और सीमाएं समझने की क्षमता विकसित की जा सकती है।
नई शिक्षा नीति के अनुरूप बदलाव की तैयारी
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, कौशल-आधारित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने पर जोर दिया गया है। संगणनात्मक चिंतन और AI से जुड़ा पाठ्यक्रम इसी व्यापक दिशा से जुड़ा है। इसका लक्ष्य विद्यार्थियों को केवल तकनीकी उपकरणों का उपयोग करना सिखाना नहीं, बल्कि उन्हें तार्किक, रचनात्मक और जिम्मेदार सोच के लिए तैयार करना है।

हालांकि, इस पाठ्यक्रम के अंतिम स्वरूप, कक्षा-वार विषयों, शिक्षकों के प्रशिक्षण और लागू होने की तारीख से संबंधित आधिकारिक विवरण सामने आने के बाद ही इसकी पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी। फिलहाल, इस पहल का महत्व इस बात में है कि AI की बुनियादी समझ को स्कूली शिक्षा का हिस्सा बनाने की दिशा में कदम उठाया जा रहा है।
