छपरा: सारण जिले के सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों के नामांकन से जुड़े आंकड़ों ने शिक्षा विभाग की चिंता बढ़ा दी है। यू-डायस प्लस पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों की समीक्षा में शैक्षणिक सत्र 2025-26 की तुलना में 2026-27 में 74,041 विद्यार्थियों के नामांकन का अंतर सामने आया है। इससे भी गंभीर स्थिति यह है कि जिले के 111 विद्यालयों में एक भी विद्यार्थी का नामांकन दर्ज नहीं है। शिक्षा विभाग ने इसे गंभीरता से लेते हुए सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को निर्धारित समयसीमा में त्रुटियां दूर करने का निर्देश दिया है।
तीन नवंबर तक सुधार का अल्टीमेटम
जिला शिक्षा पदाधिकारी निशांत किरण ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि तीन नवंबर तक नामांकन के आंकड़ों में सामने आए अंतर और शून्य नामांकन वाले विद्यालयों की स्थिति को हर हाल में दुरुस्त किया जाए। विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल पोर्टल पर आंकड़े ठीक करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि विद्यालय स्तर पर वास्तविक नामांकन और उपलब्ध रिकॉर्ड का मिलान भी जरूरी है। निर्धारित समयसीमा में काम पूरा नहीं करने या लापरवाही बरतने वालों पर विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
यू-डायस प्लस की रैंकिंग ने बढ़ाई चिंता
यू-डायस प्लस 2026-27 पोर्टल की साप्ताहिक समीक्षा में सारण जिला राज्य स्तर पर 38वें स्थान पर बताया गया है। विभागीय अधिकारियों ने इस स्थिति पर नाराजगी जताई है। पिछले सत्र में विद्यार्थियों की प्रविष्टियां पूरी होने के बाद प्रखंड स्तर से शपथ-पत्र भी दिए गए थे। इसके बावजूद नए सत्र में इतनी बड़ी संख्या में नामांकन अंतर सामने आना रिकॉर्ड की शुद्धता और विद्यालयवार डेटा अपडेट की प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है।
बीआरसी में विशेष शिविर लगाने की तैयारी
नामांकन संबंधी विसंगतियों को दूर करने के लिए प्रखंड संसाधन केंद्रों पर विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। विद्यालयों को रोस्टर के अनुसार बीआरसी में बुलाया जाएगा, जहां पोर्टल पर दर्ज जानकारी और विद्यालय के रिकॉर्ड का मिलान कराया जाएगा। विभाग ने कंप्यूटर शिक्षक, कंप्यूटर प्रशिक्षक अथवा कंप्यूटर का व्यावहारिक ज्ञान रखने वाले शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति करने का निर्देश दिया है। शिविरों में पर्याप्त कंप्यूटर, बिजली, पानी और इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।

सीआरसी समन्वयकों को निगरानी की जिम्मेदारी
पूरे अभियान की निगरानी के लिए संकुल संसाधन केंद्र समन्वयकों को नोडल जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें अपने क्षेत्र के विद्यालयों में नामांकन से जुड़े आंकड़ों की जांच और सुधार प्रक्रिया पर नजर रखनी होगी। विद्यालयवार नामांकन अंतर और शून्य नामांकन वाले स्कूलों की सूची संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराई गई है, ताकि काम को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जा सके।
छपरा सदर में सबसे अधिक शून्य नामांकन वाले स्कूल
उपलब्ध प्रखंडवार आंकड़ों के अनुसार छपरा सदर में 18 विद्यालय ऐसे हैं जहां शून्य नामांकन दर्ज है। इसके बाद गड़खा में 13, सोनपुर में 12, अमनौर में 9 और मढ़ौरा में 8 विद्यालय इस सूची में हैं। नगरा और पानापुर में छह-छह, बनियापुर, दरियापुर और एकमा में पांच-पांच विद्यालय शामिल हैं। जलालपुर में चार, जबकि इसुआपुर, लहलादपुर, मांझी, मशरक और रिविलगंज में तीन-तीन विद्यालय हैं। परसा और तरैया में दो-दो तथा दिघवारा में एक विद्यालय शून्य नामांकन की सूची में है।
आंकड़ों की शुद्धता पर विभाग का जोर
शिक्षा विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि पोर्टल पर दर्ज संख्या विद्यालयों में वास्तविक स्थिति से मेल खाए। नामांकन अंतर और शून्य नामांकन की समस्या को दूर करने के लिए स्कूल स्तर से लेकर प्रखंड स्तर तक रिकॉर्ड की दोबारा जांच की जा रही है। इस प्रक्रिया में विद्यालयों की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि यू-डायस प्लस के आंकड़े शिक्षा व्यवस्था की योजना और निगरानी में उपयोग किए जाते हैं।
विभागीय निर्देश के बाद अब तीन नवंबर की समयसीमा पर नजर रहेगी। इस अवधि में कितने विद्यालय अपने रिकॉर्ड दुरुस्त करते हैं और नामांकन अंतर कितना कम होता है, यह अभियान की प्रभावशीलता तय करेगा। फिलहाल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि आंकड़ों में सुधार और शून्य नामांकन वाले विद्यालयों की स्थिति दूर करने में लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

