डेस्क: रांची से एक अहम प्रशासनिक और मानवीय फैसले में झारखंड सरकार ने 26 आजीवन कारावास की सजा काट रहे बंदियों की रिहाई को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में शनिवार को कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में झारखंड राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की बैठक हुई, जिसमें विभिन्न जेलों में बंद आजीवन कारावासियों के मामलों की विस्तार से समीक्षा की गई।
बैठक में कुल 79 मामलों पर विचार किया गया। इनमें 37 नए मामले शामिल थे, जबकि 42 ऐसे मामले भी थे जिन्हें पिछली बैठकों में मंजूरी नहीं मिल सकी थी। प्रत्येक मामले की पात्रता, जेल में आचरण, सजा की अवधि, कानूनी प्रावधान, न्यायालय की टिप्पणियां, संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षक, जेल अधीक्षक और प्रोबेशन अधिकारियों की रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए गहन समीक्षा की गई। सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद 26 कैदियों की रिहाई पर सहमति बनी।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने स्पष्ट कहा कि सरकार केवल सजा तक सीमित सोच नहीं रखती, बल्कि सुधार और समाज में सम्मानजनक पुनर्वास को भी उतना ही महत्वपूर्ण मानती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जेल से रिहा होने वाले लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने, रोजगार और सामाजिक पुनर्स्थापन के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे नई शुरुआत कर सकें।
बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी प्रमंडलों में ओपन जेल स्थापित करने की दिशा में भी पहल तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से जल्द भूमि चिन्हित कर प्रस्ताव तैयार करने को कहा। माना जा रहा है कि ओपन जेल की व्यवस्था से अच्छे आचरण वाले बंदियों को सुधारात्मक वातावरण मिलेगा और उनके पुनर्वास की प्रक्रिया और मजबूत होगी।
इसके अलावा मुख्यमंत्री ने मानसिक रूप से बीमार उन बंदियों का भी डाटा बेस तैयार करने का निर्देश दिया जो अभी जेल में हैं या रिहा हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिलाया जाए ताकि वे सामान्य जीवन जी सकें।
सरकार का कहना है कि यह फैसला न्याय व्यवस्था, मानवीय संवेदनाओं और सुधारात्मक सोच के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में उठाया गया कदम है। बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, डीजीपी तदाशा मिश्रा, विधि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, कारा एवं सुधारात्मक सेवाओं के अधिकारी तथा न्यायिक आयुक्त सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।