Dinman Times
  • वीडियो
  • वेब स्टोरीज
Sign In
  • होम
  • देश
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्‍ली
    • झारखण्‍ड
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Reading: 19 अक्टूबर 1971: रामअवध द्विवेदी – हिंदी आलोचना के प्रख्यात साहित्यकार और लेखक
साझा करें
Notification
Font ResizerAa
Dinman Times
  • वेब स्टोरीज
  • होम
  • देश
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Search
  • होम
  • देश
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्‍ली
    • झारखण्‍ड
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Follow US
© 2026. All Rights Reserved.

Home - साहित्य - 19 अक्टूबर 1971: रामअवध द्विवेदी – हिंदी आलोचना के प्रख्यात साहित्यकार और लेखक

19 अक्टूबर 1971: रामअवध द्विवेदी – हिंदी आलोचना के प्रख्यात साहित्यकार और लेखक

प्रशांत कुमार
Last updated: अक्टूबर 19, 2026 2:01 पूर्वाह्न
By : प्रशांत कुमार
Published on : 1 सप्ताह पहले
रामअवध द्विवेदी
साझा करें

19 अक्टूबर 1971 को हिंदी साहित्य ने ऐसे विद्वान आलोचक और लेखक को खो दिया, जिन्होंने साहित्य-समीक्षा के गंभीर सिद्धांतों को हिंदी पाठकों तक पहुँचाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। रामअवध द्विवेदी का नाम हिंदी आलोचना, साहित्य के अध्ययन और हिंदी-अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में लेखन के लिए याद किया जाता है। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि साहित्यिक योगदान केवल कविता-कहानी रचने तक सीमित नहीं होता; विचार, विवेचन और आलोचनात्मक दृष्टि भी भाषा-साहित्य को समृद्ध बनाते हैं।

गोरखपुर में जन्म और शिक्षा

रामअवध द्विवेदी का जन्म 17 जुलाई 1907 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में हुआ था। वे साहित्यकार मन्नन द्विवेदी ‘गजपुरी’ के छोटे भाई थे। उनकी शुरुआती पढ़ाई देवरिया और गोरखपुर में हुई। आगे चलकर उन्होंने कानपुर के डीएवी कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और काशी हिंदू विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी साहित्य में एमए तथा एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। बाद में उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से डी.लिट. की उपाधि भी प्राप्त की।

अंग्रेज़ी साहित्य का गहन अध्ययन उनके आलोचनात्मक लेखन की पृष्ठभूमि बना। उन्होंने पश्चिमी साहित्य-समीक्षा की अवधारणाओं को समझा और उन्हें हिंदी में स्पष्ट, व्यवस्थित तथा सुलभ रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया।

अध्यापन और साहित्यिक जीवन

रामअवध द्विवेदी काशी हिंदू विश्वविद्यालय में अंग्रेज़ी के प्राध्यापक रहे। कुछ समय तक उन्होंने देवरिया के संत विनोबा डिग्री कॉलेज के प्रधानाचार्य के रूप में भी कार्य किया। अध्यापन उनके लिए केवल पेशा नहीं था; यह साहित्यिक विचारों और आलोचनात्मक समझ को आगे बढ़ाने का माध्यम भी था।

Dinman Times ads 728-90

हिंदी में उस समय पश्चिमी आलोचना-सिद्धांतों पर व्यवस्थित पुस्तकों की कमी को देखते हुए उन्होंने इस क्षेत्र में लेखन किया। उनका उद्देश्य साहित्य को केवल पसंद-नापसंद के आधार पर आँकना नहीं, बल्कि उसकी संरचना, विचार, रूप और कलात्मक विशेषताओं को समझने के लिए पाठकों को वैचारिक उपकरण देना था।

ये भी पढ़े

साहित्यकार शालिग्राम सिंह ‘अशांत’ का निधन, 24 कृतियों से छोड़ी अमिट छाप
26 अक्टूबर: पंडित गोदावरीश मिश्र की जन्मजयंती और सामाजिक चेतना की विरासत
26 अक्टूबर: नवगीत के प्रवर्तक ठाकुर प्रसाद सिंह की जन्मजयंती
25 अक्टूबर 1980: साहिर लुधियानवी का निधन और अमर काव्य-विरासत

प्रमुख रचनाएँ और आलोचना में योगदान

रामअवध द्विवेदी की चर्चित पुस्तकों में आविष्कारों की कहानियाँ (1953), हमारे भोजन की समस्या (1953), हिंदी साहित्य के विकास की रूपरेखा (1956), साहित्य रूप (1960) और साहित्य-सिद्धांत (1962) शामिल हैं। उनकी रचनाओं में साहित्य के स्वरूप, आलोचना की पद्धति और साहित्यिक विकास को समझने की कोशिश दिखाई देती है।

उनके आलोचनात्मक निबंधों में साहित्य के उपकरण, यूनानी नाट्यशास्त्र में त्रासदी का स्वरूप, काव्य में प्रतीक-विधान और स्वच्छंदतावाद के बाद के काव्य-चिंतन जैसे विषय शामिल थे। इन विषयों से स्पष्ट होता है कि उनकी रुचि साहित्य की विविध परंपराओं और सिद्धांतों को समझने में थी।

उन्होंने अंग्रेज़ी में भी लेखन किया। उनकी अंग्रेज़ी कृतियों में Dynamics of Plotmaking, Anthology of English Prose, Hindi Literature और A Critical Survey of Hindi Literature जैसी पुस्तकें उल्लेखनीय हैं। हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में काम करने से उन्हें अलग-अलग साहित्यिक परंपराओं के बीच संवाद स्थापित करने का अवसर मिला।

Dinman Times ads 728-90

‘हिंदी रिव्यू’ का संपादन

रामअवध द्विवेदी ने काशी नागरी प्रचारिणी सभा की ओर से प्रकाशित अंग्रेज़ी मासिक पत्रिका Hindi Review के संपादन में भी महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। अंग्रेज़ी माध्यम से हिंदी साहित्य का परिचय व्यापक पाठक-वर्ग तक पहुँचाने का यह एक उपयोगी प्रयास था। उनका संपादकीय कार्य हिंदी साहित्य के अध्ययन और प्रसार को बढ़ावा देने की उनकी प्रतिबद्धता का हिस्सा था।

व्यक्तिगत कठिनाइयों के बीच लेखन

जीवन के उत्तरार्ध में उनकी दृष्टि धीरे-धीरे कमजोर हुई। उपलब्ध जीवन-परिचयों के अनुसार, 1948 तक उनकी दूसरी आँख की रोशनी भी चली गई थी। इस कठिनाई ने उनके लेखन की गति को प्रभावित किया, लेकिन उनका पहले का साहित्यिक और बौद्धिक कार्य हिंदी आलोचना के इतिहास में महत्त्व रखता है।

19 अक्टूबर 1971: एक विद्वान का निधन

रामअवध द्विवेदी का निधन 19 अक्टूबर 1971 को वाराणसी में हृदयाघात के कारण हुआ। वे अपने पीछे हिंदी आलोचना, साहित्य के इतिहास और अंग्रेज़ी में हिंदी साहित्य के परिचय से जुड़ा उपयोगी लेखन छोड़ गए। उनकी रचनाएँ याद दिलाती हैं कि साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए रचनात्मक लेखन के साथ-साथ गंभीर अध्ययन, सिद्धांत-निर्माण और विवेकपूर्ण आलोचना भी आवश्यक हैं।

रामअवध द्विवेदी की साहित्यिक विरासत

रामअवध द्विवेदी को याद करना हिंदी आलोचना के उस पक्ष को पहचानना है जो साहित्य को तर्क, संदर्भ और विचार के साथ पढ़ने की प्रेरणा देता है। पश्चिमी आलोचना-सिद्धांतों को हिंदी में समझाने, साहित्यिक विषयों पर शोधपूर्ण लेखन करने और हिंदी साहित्य को अंग्रेज़ी पाठकों के सामने प्रस्तुत करने के उनके प्रयास उनकी विरासत का हिस्सा हैं। 19 अक्टूबर उनकी पुण्यतिथि है—एक ऐसे साहित्यकार को स्मरण करने का अवसर, जिनका काम भाषा और साहित्य के गंभीर अध्ययन को समर्पित था।

Dinman Times ads 728-90
TAGGED:Education NewsHindi LiteratureIndia News
ख़बर साझा करें
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
पिछली ख़बर कुमारी नाज़ 19 अक्टूबर 1995: कुमारी नाज़—‘बूट पॉलिश’ की यादगार बाल अभिनेत्री
अगली ख़बर मिग-21 19 अक्टूबर 1970: HAL निर्मित स्वदेशी मिग-21 भारतीय वायुसेना में शामिल
Google prefered

गूगल पर फेवरेट बनाएँ

ये भी पढ़ें

जय राजगुरु

29 अक्टूबर 1739: शहीद जय राजगुरु का जन्म और ओडिशा के प्रतिरोध की विरासत

छठ पूजा पर रोक नहीं

छठ पूजा पर रोक नहीं, लेकिन सुरक्षा नियमों का पालन जरूरी: शुभेंदु अधिकारी

कमलादेवी

29 अक्टूबर 1988: कमलादेवी चट्टोपाध्याय का निधन और भारतीय हस्तशिल्प की विरासत

तमिल गीतकार और कवि वाली का जन्म

29 अक्टूबर 1931: तमिल गीतकार और कवि वाली का जन्म

ओडिशा

29 अक्टूबर 1999: ओडिशा का महाचक्रवात और विनाशकारी तबाही की कहानी

Dinman Ads

Get Connected with us on social networks

Facebook-f X-twitter Instagram Youtube Linkedin-in

Poppular Categories

  • बिहार
  • देश
  • अपराध
  • राजनीति
  • मनोरंजन
  • धर्म
  • विदेश
  • खेल
  • टेक्नोलॉजी
  • बिज़नेस

Download APP

Google-play Apple
  • About us
  • Privacy Policy
  • Terms and Condition
  • Cookies Policy
  • Contact us
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?