बांकीपुर से जीत के बाद विधायक बने PK, शपथ लेते ही बढ़े अधिकार; वेतन-भत्ते के साथ सरकारी सुविधाएं और सदन में मिलेगी खास कानूनी सुरक्षा
पटना: चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर अब आधिकारिक तौर पर विधायक हैं। बांकीपुर विधानसभा सीट से जीत दर्ज करने के बाद उन्होंने 17 अगस्त को बिहार विधानसभा में विधायक पद की शपथ ली। इसके साथ ही उनकी भूमिका पूरी तरह बदल गई है। अब वे सिर्फ जन सुराज के नेता या चुनावी रणनीतिकार नहीं, बल्कि बिहार विधानसभा के सदस्य हैं।
प्रशांत किशोर की जीत इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि उन्होंने बांकीपुर सीट पर बीजेपी के करीब 30 साल पुराने दबदबे को खत्म किया। विधायक बनने के बाद अब उन्हें वही वेतन, भत्ते और सुविधाएं मिलेंगी जो बिहार के दूसरे विधायकों को मिलती हैं।
उनकी घोषित संपत्ति करीब 208 करोड़ रुपये है। यानी निजी संपत्ति के मामले में वे पहले ही करोड़ों के मालिक हैं, लेकिन विधायक बनने के बाद मिलने वाली सरकारी सुविधाओं की भी अपनी अलग अहमियत है।
विधायक बने तो क्या-क्या मिलेगा?
विधायक बनने के साथ ही प्रशांत किशोर को बिहार के विधायकों के लिए तय वेतन और अलग-अलग भत्ते मिलेंगे। इसमें वेतन के अलावा यात्रा, दैनिक भत्ता और विधानसभा से जुड़े दूसरे खर्चों के लिए तय सुविधाएं शामिल होती हैं।
सरकारी काम के सिलसिले में यात्रा करने पर भी नियमों के अनुसार सुविधाएं मिलती हैं। विधानसभा की बैठकों में शामिल होने से लेकर क्षेत्र में जनता से मिलने और सरकारी काम देखने तक विधायक को कई तरह की सुविधाएं दी जाती हैं।
यानी अब PK के लिए राजनीति सिर्फ भाषण और रणनीति तक सीमित नहीं रहेगी। उन्हें सदन में बैठकर सवाल पूछने, बहस में हिस्सा लेने और अपने क्षेत्र की समस्याएं उठाने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।
गाड़ी और सरकारी आवास की सुविधा
विधायकों को सरकारी काम के लिए वाहन और दूसरी जरूरी सुविधाएं नियमों के अनुसार उपलब्ध कराई जाती हैं। सरकारी आवास की सुविधा भी विधायक को मिल सकती है।
लेकिन यहां प्रशांत किशोर ने पहले ही एक अलग फैसला सुना दिया है। उन्होंने कहा है कि वह सरकारी बंगले में नहीं रहेंगे। उनका कहना है कि सरकारी आवास का इस्तेमाल बांकीपुर की जनता के लिए कार्यालय के रूप में किया जाएगा और वह खुद अपने ‘आश्रम’ में रहेंगे।
यानी सुविधा सामने है, लेकिन PK ने फिलहाल बंगले से दूरी बना ली है।
सरकार के खिलाफ बोलने की ताकत भी बढ़ी
विधायक बनने के बाद प्रशांत किशोर को विधानसभा के अंदर कई महत्वपूर्ण अधिकार मिल गए हैं। वे सदन में सरकार से सवाल पूछ सकते हैं, किसी मुद्दे पर चर्चा की मांग कर सकते हैं और जनता से जुड़े मामलों को विधानसभा के सामने रख सकते हैं।
विधायक सरकार के कामकाज पर सवाल उठा सकता है। बजट और सरकारी योजनाओं पर चर्चा में हिस्सा ले सकता है। जरूरत पड़ने पर किसी मुद्दे पर सरकार से जवाब भी मांग सकता है।
यही वजह है कि विधायक बनने के बाद PK की राजनीतिक ताकत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। अब उनकी बात सिर्फ सड़क या प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित नहीं रहेगी। वह सीधे विधानसभा के रिकॉर्ड का हिस्सा बन सकती है।
गिरफ्तारी से पूरी छूट नहीं, सदन के काम में खास सुरक्षा
विधायक बनने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा जिस बात की होती है, वह है गिरफ्तारी से मिली छूट। यहां बात को साफ समझना जरूरी है। विधायक को अपराध करने पर सामान्य कानून से कोई स्थायी छूट नहीं मिलती।
लेकिन संविधान के तहत विधानसभा के सदस्यों को सदन के अंदर कही गई बातों और सदन के काम से जुड़े कुछ मामलों में विशेष अधिकार और सुरक्षा मिलती है। इसका मकसद यह है कि विधायक बिना डर के सदन में अपनी बात रख सकें।
इसका मतलब यह नहीं कि विधायक को कभी गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। सामान्य आपराधिक मामले में कानून अपना काम कर सकता है। खास परिस्थितियों में विधानसभा अध्यक्ष को सूचना देने जैसी संसदीय प्रक्रियाएं भी लागू होती हैं।
200 करोड़ की संपत्ति और अब नई राजनीतिक जिम्मेदारी
प्रशांत किशोर ने चुनावी हलफनामे में 208 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति घोषित की थी। उनके खिलाफ आठ आपराधिक मामले भी दर्ज होने की जानकारी हलफनामे में दी गई है। ऐसे में विधायक बनने के बाद उनकी राजनीतिक और कानूनी स्थिति पर लोगों की नजर रहना तय है।
लेकिन अब असली परीक्षा विधानसभा में होगी। जनता यह देखेगी कि PK अपने वादों को कितना जमीन पर उतारते हैं। उन्होंने चुनाव के दौरान भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने और विधायक के काम में एक रुपया भी चोरी नहीं होने देने की बात कही थी।
विधायक बनने के बाद असली चुनौती क्या होगी?
कुल मिलाकर प्रशांत किशोर के लिए विधायक की कुर्सी सिर्फ सरकारी गाड़ी, आवास और भत्तों का मामला नहीं है। इसके साथ जिम्मेदारियां भी आई हैं।

अब बांकीपुर की जनता के सवाल विधानसभा में उठाने होंगे और सरकार से जवाब भी मांगना होगा। रणनीतिकार से विधायक बने PK के लिए यही नई पारी की असली चुनौती होगी।