अशोक धाम में सावन की तीसरी सोमवारी पर उमड़ी भारी भीड़, बिजली का पोल गिरने के बाद करंट की अफवाह से मची भगदड़; सात महिला श्रद्धालुओं की मौत, कई लोग घायल
लखीसराय: सावन की तीसरी सोमवारी पर भगवान शिव का जलाभिषेक करने लखीसराय के अशोक धाम पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए सोमवार की सुबह कभी न भूलने वाला दर्द बन गई। मंदिर में दर्शन और पूजा के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे थे। माहौल भक्तिमय था। लोग कतार में अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। तभी अचानक भीड़ में अफरातफरी फैल गई और कुछ ही मिनटों में खुशियों का माहौल चीख-पुकार में बदल गया।
भगदड़ में सात महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए।
मां को थपथपाकर बेटी कहती रही, ‘मां उठ जाओ…’
हादसे के बाद का एक दृश्य हर किसी को झकझोर देने वाला था। एक बेटी अपनी मां के शव के पास बैठी रही। वह बार-बार अपनी मां को थपथपाकर उठाने की कोशिश करती और कहती रही, ‘मां उठ जाओ…’
उसे शायद यकीन नहीं हो रहा था कि जिस मां के साथ वह मंदिर में पूजा करने आई थी, वह अब उसके सामने हमेशा के लिए शांत पड़ी है।
चश्मदीदों के मुताबिक, भगदड़ के दौरान कई लोग जमीन पर गिर गए थे। भीड़ इतनी तेजी से आगे बढ़ रही थी कि नीचे गिरे लोगों को उठने का मौका तक नहीं मिला।

हादसे के बाद जब भीड़ कुछ कम हुई तो परिजन अपनों को तलाशने लगे। इसी दौरान बेटी अपनी मां के पास पहुंची और उन्हें जगाने की कोशिश करती रही। यह मंजर देखकर आसपास मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
पूजा के लिए निकले थे, हादसे ने सब बदल दिया
अशोक धाम में सावन की सोमवारी पर हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार भी सुबह से ही मंदिर के आसपास भक्तों की लंबी कतार लगी थी। श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।

बताया गया कि मंदिर के पास अचानक भीड़ का दबाव बढ़ गया। इसी दौरान सड़क किनारे लगा बिजली का पोल गिर गया। पोल गिरने के बाद लोगों के बीच यह बात फैल गई कि बिजली का करंट फैल गया है।
डर के कारण श्रद्धालु इधर-उधर भागने लगे और देखते ही देखते भगदड़ मच गई।
बैरिकेडिंग टूटी, लोग एक-दूसरे पर गिरते गए
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, भीड़ का दबाव इतना ज्यादा था कि बैरिकेडिंग टूट गई। इसके बाद कई लोग जमीन पर गिर गए। पीछे से आ रही भीड़ को संभलने का मौका नहीं मिला और लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरते चले गए।
कुछ श्रद्धालु मदद के लिए चिल्ला रहे थे। लेकिन भीड़ का दबाव इतना ज्यादा था कि किसी के पास रुकने और दूसरों को उठाने का मौका नहीं था।
जो लोग नीचे गिर गए, उनके ऊपर से भीड़ गुजरती चली गई। कुछ ही देर में कई लोग बेहोश होकर जमीन पर पड़े थे।
दो ट्रेनों के रुकने से अचानक बढ़ी भीड़
प्रशासन के अनुसार, हादसे के समय दो ट्रेनें भी रुकी थीं। इससे अचानक बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर की ओर बढ़े। पहले से मौजूद भीड़ के बीच लोगों की संख्या बढ़ने से रास्ते पर दबाव और ज्यादा हो गया।
अशोक धाम में सावन की सोमवारी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में भीड़ को अलग-अलग रास्तों से निकालना और हर तरफ निगरानी रखना बेहद जरूरी था।
लेकिन पोल गिरने के बाद फैली अफवाह ने कुछ ही पलों में स्थिति बिगाड़ दी।
सात परिवारों में छाया मातम
इस हादसे में सात महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई। कई परिवार अपने लोगों को लेकर अस्पताल पहुंचे। किसी को मां की चिंता थी तो कोई अपनी पत्नी, बहन या रिश्तेदार को खोज रहा था।
मृतकों की पहचान के बाद परिवारों में मातम पसर गया।
सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है। घायलों का इलाज कराया जा रहा है।
एक अफवाह और बदल गया सब कुछ
लखीसराय की यह घटना बताती है कि बड़ी भीड़ में एक छोटी सी अफवाह भी कितनी खतरनाक हो सकती है।
बिजली का पोल गिरने के बाद करंट की बात फैली और लोगों ने बचने के लिए भागना शुरू कर दिया। इसके बाद भगदड़ ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं।

अब जांच में यह साफ होना जरूरी है कि पोल कैसे गिरा, भीड़ को संभालने की व्यवस्था कैसी थी और आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालने के लिए क्या इंतजाम किए गए थे।
‘मां उठ जाओ…’ की आवाज छोड़ गई गहरा दर्द
अशोक धाम में उस सुबह श्रद्धालु भगवान शिव का आशीर्वाद लेने आए थे। किसी ने नहीं सोचा था कि पूजा के बाद घर लौटने के बजाय कई परिवारों को अपने अपनों की मौत की खबर मिलेगी।
सबसे दर्दनाक तस्वीर उस बेटी की रही, जो अपनी मां को बार-बार थपथपाकर बस यही कहती रही, ‘मां उठ जाओ…’
लेकिन मां फिर कभी नहीं उठी।