नई दिल्ली/ग्रेटर नोएडा, 30 अक्टूबर। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की ग्रेटर नोएडा स्थित एक शाखा में ग्राहकों के बचत खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से कथित तौर पर बिना अनुमति पैसे निकाले जाने या दूसरे खातों में ट्रांसफर किए जाने का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। इस मामले में बैंक ने अब तक तीन ग्राहकों के कुल 43 लाख रुपये के दावों का निपटारा कर दिया है। साथ ही भरोसा दिया है कि जांच में सही पाए जाने वाले सभी दावों का भुगतान किया जाएगा।
बैंक का यह आश्वासन ऐसे समय आया है, जब प्रभावित खाताधारक अपनी जमा पूंजी वापस पाने के लिए लगातार शिकायत कर रहे हैं। कुछ ग्राहकों ने करीब 35 करोड़ रुपये की कथित गड़बड़ी का अनुमान लगाया है। वहीं, 21 खाताधारकों की शुरुआती शिकायत में 11.24 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का उल्लेख था। बाद में पुलिस के अनुसार शिकायतकर्ताओं की संख्या बढ़कर 25 हो गई।
बैंक ने कहा है कि शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है और मामले की प्राथमिकता के आधार पर जांच की जा रही है। बैंक के मुताबिक, वह संबंधित अधिकारियों के साथ सहयोग कर रहा है और शिकायतों की सत्यता तथा कथित वित्तीय अनियमितताओं की वास्तविक सीमा का पता लगाने के लिए जरूरी कदम उठा रहा है
तीन ग्राहकों को मिले 43 लाख रुपये, बाकी दावों की जांच जारी
PNB ने अपने आधिकारिक बयान में बताया कि ग्रेटर नोएडा शाखा से जुड़ी शिकायतों की जांच प्राथमिकता के आधार पर की जा रही है। बैंक ने कहा कि अब तक तीन दावों के तहत कुल 43 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है।

बैंक ने खाताधारकों को भरोसा दिया है कि जांच में सही पाए जाने वाले सभी वास्तविक दावों का सम्मान किया जाएगा। साथ ही उसने कहा कि वित्तीय धोखाधड़ी, अनियमितता और कर्मचारियों के गलत आचरण के प्रति उसकी नीति जीरो टॉलरेंस की है।
बैंक के अनुसार, जांच में जिस किसी की जिम्मेदारी सामने आएगी, उसके खिलाफ लागू नियमों और प्रक्रियाओं के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आंतरिक नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है।
हालांकि, अभी बैंक ने सभी शिकायतों की जांच पूरी होने या कथित रूप से गायब हुई कुल रकम की अंतिम पुष्टि नहीं की है। इसलिए 43 लाख रुपये का भुगतान पूरे मामले का निपटारा नहीं माना जा सकता।
21 खाताधारकों की शिकायत में 11.24 करोड़ से अधिक का नुकसान
मामले में शुरुआती शिकायत ग्राहक श्रीचंद और अन्य खाताधारकों की ओर से की गई थी। शिकायत के मुताबिक, 21 लोगों के खातों से 11.24 करोड़ रुपये से अधिक की रकम कथित तौर पर गायब हुई। इनमें दो खाताधारकों ने एक-एक करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का दावा किया था।

दूसरी ओर, स्थानीय खाताधारकों ने बचत खातों, फिक्स्ड डिपॉजिट और कुछ निवेशों में कथित गड़बड़ी को मिलाकर कुल रकम करीब 35 करोड़ रुपये बताई है। यह आंकड़ा ग्राहकों की ओर से लगाया गया अनुमान है। बैंक और जांच एजेंसियों की ओर से इसकी अंतिम पुष्टि होना अभी बाकी है।
मामले में गौतमबुद्ध नगर जिले के लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर राम विनोद कुमार ने भी खाताधारकों की शिकायतों पर कार्रवाई किए जाने की बात कही है। बैंक प्रबंधन ने प्रभावित ग्राहकों की समस्याओं का समाधान करने का आश्वासन दिया है।
किसी के खाते में 88 लाख की जगह बचे सिर्फ एक लाख
इस मामले में कई खाताधारकों ने अपनी जमा पूंजी में बड़ी कमी आने की शिकायत की है। सूरजपुर निवासी श्रीचंद ने आरोप लगाया कि उनकी फिक्स्ड डिपॉजिट से करीब 1.16 करोड़ रुपये की रकम कथित तौर पर निकाल ली गई।
एक अन्य खाताधारक बिजेंद्र सिंह ने बताया कि उनके बचत खाते में पहले करीब 87 से 88 लाख रुपये जमा थे, लेकिन बाद में खाते में सिर्फ एक लाख रुपये दिखाई दिए। उन्होंने बताया कि यह रकम जमीन के मुआवजे से मिली थी।

वहीं, हनीफ खान ने अपने खाते से करीब 39 लाख रुपये गायब होने का आरोप लगाया। एक अन्य खाताधारक जाकिर के मुताबिक, उनके खाते से करीब 9.5 लाख रुपये की रकम गायब थी। उनका दावा है कि इस संबंध में उन्हें कोई ट्रांजैक्शन अलर्ट या एसएमएस भी नहीं मिला।
इन शिकायतों ने खाताधारकों के बीच चिंता बढ़ा दी है। कई लोगों का कहना है कि उन्हें अपने खातों से रकम ट्रांसफर किए जाने की जानकारी तब मिली, जब वे बैंक पहुंचे या अपनी जमा पूंजी निकालने की कोशिश की।
2023 से चल रही थी कथित गड़बड़ी, पुलिस जांच में जुटी
पुलिस के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा की अचेर (Accher/Aichhar) शाखा से जुड़ी कथित वित्तीय गड़बड़ी का सिलसिला वर्ष 2023 से चल रहा था। जांच में कई बैंक खातों के बीच कथित तौर पर हुए लेन-देन की पड़ताल की जा रही है।
मामले में अज्ञात बैंक कर्मचारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। यह धारा आपराधिक विश्वासघात से संबंधित है। पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ताओं की संख्या बढ़कर 25 हो गई है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, शाखा के सभी कर्मचारियों को निलंबित किया गया है। बैंक की ओर से आंतरिक जांच भी की जा रही है और राज्य की भ्रष्टाचार निरोधक टीम मामले की पड़ताल में शामिल है।
गौतमबुद्ध नगर के सहायक पुलिस आयुक्त सांचित शर्मा के मुताबिक, जांच में बैंक की आंतरिक टीम और अन्य जांच एजेंसियों की मदद ली जा रही है। पुलिस का उद्देश्य कथित लेन-देन में शामिल लोगों की पहचान करना और प्रभावित ग्राहकों की रकम वापस दिलाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है।
जिले के लीड बैंक मैनेजर ने भी बताया कि संबंधित रकम को बैंक के दिल्ली स्थित मुख्यालय ने होल्ड पर रखा है और उसे वापस करने की प्रक्रिया की बात कही गई है। हालांकि, सभी ग्राहकों को उनकी पूरी रकम कब तक मिलेगी, इसकी अंतिम समयसीमा स्पष्ट नहीं हुई है।
जमीन अधिग्रहण का मुआवजा भी खातों में जमा था
इस मामले में प्रभावित खाताधारकों में कई किसान भी शामिल हैं। इनमें से कुछ के खातों में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई जमीन का मुआवजा जमा था।

किसानों के लिए यह रकम केवल बैंक बैलेंस नहीं, बल्कि जमीन के बदले मिली आर्थिक सुरक्षा का आधार भी थी। ऐसे में खातों में जमा रकम कम या गायब दिखाई देने से उनकी चिंता और बढ़ गई है।
कुछ ग्राहकों ने आरोप लगाया कि उनकी जानकारी और अनुमति के बिना फिक्स्ड डिपॉजिट समय से पहले बंद कर दी गईं और रकम दूसरे खातों में भेज दी गई। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
खाते से पैसे गायब हों तो ग्राहक क्या करें?
ग्रेटर नोएडा की यह घटना बैंक खाताधारकों के लिए भी एक जरूरी सबक है। यदि किसी ग्राहक को अपने बचत खाते या एफडी में जमा रकम और बैंक स्टेटमेंट में अंतर दिखाई देता है, तो उसे तुरंत शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
1. बैंक को तुरंत सूचना दें: किसी भी अनधिकृत ट्रांजैक्शन या जमा रकम में गड़बड़ी का पता चलने पर बैंक की आधिकारिक हेल्पलाइन, मोबाइल ऐप या नजदीकी शाखा के माध्यम से तत्काल शिकायत करें।

2. लिखित शिकायत और शिकायत नंबर लें: केवल फोन पर सूचना देना पर्याप्त नहीं है। बैंक में औपचारिक शिकायत दर्ज कराएं और उसका रेफरेंस नंबर सुरक्षित रखें। संबंधित बैंक स्टेटमेंट, एफडी की रसीद, ट्रांजैक्शन विवरण और बैंक से हुई बातचीत के रिकॉर्ड भी संभालकर रखें।
3. ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होने पर 1930 पर कॉल करें: यदि मामला डिजिटल या साइबर वित्तीय धोखाधड़ी का है, तो राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत सूचना दें। इसके अलावा सरकारी पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।
4. समाधान नहीं मिलने पर RBI के पास शिकायत करें: यदि बैंक शिकायत का समाधान नहीं करता, शिकायत खारिज कर देता है या ग्राहक उसके जवाब से संतुष्ट नहीं है, तो निर्धारित शर्तों के तहत भारतीय रिजर्व बैंक की शिकायत निवारण व्यवस्था में मामला उठाया जा सकता है। सामान्य तौर पर बैंक को शिकायत देने के 30 दिन बाद, जवाब नहीं मिलने या असंतोषजनक जवाब मिलने की स्थिति में RBI के इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन सिस्टम के तहत शिकायत की जा सकती है।
अब जांच और रकम वापसी पर टिकी निगाहें
PNB ने तीन दावों के तहत 43 लाख रुपये का भुगतान कर खाताधारकों को राहत देने की शुरुआत की है। लेकिन इस मामले में असली चुनौती सभी शिकायतों की जांच पूरी करना, कथित अनधिकृत लेन-देन की कड़ियां जोड़ना और प्रभावित ग्राहकों की पूरी वैध जमा रकम वापस करना है।

करीब 35 करोड़ रुपये की कथित गड़बड़ी का अनुमान, शुरुआती शिकायत में 11.24 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान और अब तक 43 लाख रुपये के तीन दावों का निपटारा—ये आंकड़े मामले की गंभीरता बताते हैं। हालांकि, अंतिम नुकसान और जिम्मेदार लोगों की पहचान जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल खाताधारकों को बैंक के आश्वासन के साथ-साथ जांच की प्रगति और अपनी जमा पूंजी की वापसी का इंतजार है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन लोगों ने वर्षों की बचत और जमीन का मुआवजा बैंक में सुरक्षित समझकर जमा किया था, उन्हें उनका पूरा पैसा कब तक वापस मिलेगा।
