हर साल 18 अक्टूबर को कनाडा में पर्सन्स डे (Persons Day) मनाया जाता है। यह दिन महिलाओं के अधिकारों के इतिहास में आए एक अहम बदलाव की याद दिलाता है। 18 अक्टूबर 1929 को ब्रिटेन की Judicial Committee of the Privy Council ने फैसला दिया कि कनाडा के तत्कालीन संविधान में इस्तेमाल किया गया शब्द “persons” महिलाओं को भी शामिल करता है। इस निर्णय ने महिलाओं के कनाडाई सीनेट में नियुक्त किए जाने का कानूनी रास्ता खोला और सार्वजनिक जीवन में उनकी भागीदारी के लिए एक महत्वपूर्ण बाधा हटाई।
क्या था ‘पर्सन्स केस’?
इस ऐतिहासिक मुकदमे को Persons Case या Edwards v. Canada (Attorney General) के नाम से जाना जाता है। विवाद ब्रिटिश नॉर्थ अमेरिका एक्ट, 1867 की धारा 24 की व्याख्या से जुड़ा था। इस प्रावधान के तहत कनाडा की सीनेट में “qualified persons” को नियुक्त किया जा सकता था। उस समय सरकार और कानूनी व्यवस्था में यह तर्क दिया जाता था कि इस शब्द में महिलाएं शामिल नहीं हैं, इसलिए उन्हें सीनेटर नियुक्त नहीं किया जा सकता।
कनाडा में महिलाओं को संघीय चुनाव लड़ने का अधिकार 1921 से मिल चुका था, लेकिन सीनेट में नियुक्ति को लेकर कानूनी अड़चन बनी हुई थी। इस असमानता को चुनौती देने के लिए अल्बर्टा की पांच महिलाओं ने न्यायिक रास्ता अपनाया। उनकी कोशिश ने यह सवाल उठाया कि क्या कानून में “व्यक्ति” की परिभाषा केवल पुरुषों तक सीमित रखी जा सकती है।
‘फेमस फाइव’ की निर्णायक भूमिका
इस कानूनी संघर्ष का नेतृत्व करने वाली पांच महिलाओं को इतिहास में “Famous Five” के नाम से जाना जाता है। उनके नाम थे एमिली मर्फी (Emily Murphy), नेली मैक्लंग (Nellie McClung), लुईस मैककिनी (Louise McKinney), आइरीन पार्लबी (Irene Parlby) और हेनरिएटा मुइर एडवर्ड्स (Henrietta Muir Edwards)। ये महिलाएं सामाजिक सुधार, राजनीति, पत्रकारिता और महिला अधिकारों के आंदोलनों से जुड़ी थीं।

1927 में उन्होंने इस प्रश्न पर कानूनी राय मांगी कि क्या ब्रिटिश नॉर्थ अमेरिका एक्ट के तहत महिलाएं सीनेट की सदस्य बन सकती हैं। कनाडा के सुप्रीम कोर्ट ने 1928 में उनके पक्ष में फैसला नहीं दिया। लेकिन Famous Five ने हार नहीं मानी और उस समय कनाडा की सर्वोच्च अपीलीय अदालत मानी जाने वाली ब्रिटेन की Judicial Committee of the Privy Council में अपील की।
18 अक्टूबर 1929 का ऐतिहासिक फैसला
18 अक्टूबर 1929 को लॉर्ड चांसलर लॉर्ड सैंकी ने Privy Council का फैसला सुनाया। परिषद ने स्पष्ट किया कि कानून में “persons” शब्द में महिलाएं भी शामिल हैं और वे सीनेट में नियुक्त होने की पात्र हो सकती हैं। इस निर्णय ने पहले के फैसले को पलट दिया और कनाडा में महिलाओं की सार्वजनिक तथा राजनीतिक भागीदारी के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह फैसला अपने समय में संवैधानिक व्याख्या की दिशा में भी उल्लेखनीय था। इसने दिखाया कि संविधान को केवल पुराने सामाजिक विचारों तक सीमित करके नहीं पढ़ा जाना चाहिए; उसकी भाषा और सिद्धांतों की व्याख्या बदलते सामाजिक संदर्भ में भी की जा सकती है।
क्या इससे सभी महिलाओं को समान अधिकार मिल गए?
इस निर्णय का महत्व बड़ा था, लेकिन इसे महिलाओं की समानता की लड़ाई का अंत नहीं समझना चाहिए। फैसले ने विशेष रूप से सीनेट में नियुक्ति की पात्रता से जुड़ी बाधा हटाई। इससे सभी महिलाओं को हर क्षेत्र में समान अधिकार तुरंत नहीं मिल गए। कनाडा की आदिवासी महिलाओं और एशियाई मूल या वंश की महिलाओं सहित कई समूहों को मतदान, नागरिकता और सार्वजनिक भागीदारी के मामलों में लंबे समय तक भेदभाव का सामना करना पड़ा।

इसलिए Persons Case को एक महत्वपूर्ण कानूनी उपलब्धि के रूप में याद करते हुए उसके ऐतिहासिक संदर्भ और सीमाओं को भी समझना जरूरी है। अधिकारों का विस्तार अक्सर कई आंदोलनों, कानूनी बदलावों और सामाजिक संघर्षों के बाद होता है।
पर्सन्स डे क्यों मनाया जाता है?
18 अक्टूबर का पर्सन्स डे Famous Five के साहस, दृढ़ता और कानूनी समानता के लिए किए गए प्रयासों को याद करने का अवसर है। यह दिन इस बात पर भी विचार करने को प्रेरित करता है कि लोकतंत्र में प्रतिनिधित्व और कानून के सामने समान मान्यता क्यों जरूरी हैं। 1929 के फैसले के बाद 1930 में कैरीन विल्सन (Cairine Wilson) कनाडा की पहली महिला सीनेटर बनीं। यह बदलाव महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी के इतिहास में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव था।
आज पर्सन्स डे केवल अतीत की उपलब्धि का स्मरण नहीं है। यह याद दिलाता है कि कानूनी भाषा, संस्थागत नियम और सामाजिक धारणाएं लोगों की भागीदारी पर गहरा प्रभाव डाल सकती हैं। समानता की दिशा में प्रगति के लिए अन्यायपूर्ण बाधाओं को पहचानना और उन्हें बदलने के लिए लगातार प्रयास करना आवश्यक है।
इतिहास से मिलने वाला संदेश
कनाडा का Persons Case इस बात का उदाहरण है कि संगठित प्रयास और कानूनी चुनौती लंबे समय से चली आ रही असमानता को बदल सकते हैं। Famous Five ने एक ऐसे सवाल को अदालत तक पहुंचाया जिसे उस समय कई लोग परंपरा का हिस्सा मानते थे। 18 अक्टूबर 1929 का फैसला महिलाओं के अधिकारों की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मोड़ बना—हालांकि समानता की राह आगे भी जारी रही।

