पटना जू में पर्यटकों को एक बार फिर टॉय ट्रेन की सवारी का आनंद मिलने जा रहा है। इस बार चिड़ियाघर की टॉय ट्रेन पुराने स्वरूप से अलग आधुनिक सुविधाओं और नए ट्रैक के साथ लौटेगी। करीब 9.88 करोड़ रुपये की लागत से 3.77 किलोमीटर लंबा नया ट्रैक तैयार किया जा रहा है। चार कोच वाली बैटरी चालित ट्रेन में एक बार में लगभग 80 पर्यटक सफर कर सकेंगे। परियोजना को जनवरी 2027 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
करीब 40 मिनट की प्रस्तावित सैर के दौरान पर्यटकों को पटना जू की हरियाली, जंगल ट्रेल और तालाब के आसपास के नजारे देखने का अवसर मिलेगा। नई व्यवस्था का उद्देश्य जू भ्रमण को अधिक सुविधाजनक और मनोरंजक बनाना है। हालांकि नियमित परिचालन शुरू होने से पहले तकनीकी जांच और सुरक्षा परीक्षण किए जाएंगे।
पुराने ट्रैक को हटाकर बिछाई जा रही नई पटरी
जू निदेशक हेमंत पाटिल के अनुसार दानापुर रेल मंडल और चिड़ियाघर प्रशासन के बीच हुए समझौता ज्ञापन यानी एमओयू के तहत परियोजना पर काम किया जा रहा है। तकनीकी समस्याओं को दूर करने के बाद ट्रैक से जुड़े कार्यों में तेजी लाई गई है। पुराने ट्रैक को हटाकर नए सिरे से पटरी बिछाने का काम चल रहा है। इसके साथ ही इंजन और कोच से जुड़े कार्य भी अलग-अलग स्तर पर किए जा रहे हैं।
परियोजना पूरी होने के बाद ट्रेन के नियमित परिचालन से पहले तकनीकी जांच और सुरक्षा परीक्षण की प्रक्रिया होगी। इन परीक्षणों के बाद ही नियमित परिचालन शुरू करने को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इस वजह से अभी ट्रेन के संचालन की अंतिम तारीख और पूरी समय-सारणी घोषित नहीं हुई है।

वंदे भारत की तर्ज पर आधुनिक स्वरूप देने की तैयारी
नई टॉय ट्रेन को आधुनिक कलेवर देने की योजना है। इसमें एक इंजन के साथ चार कोच होंगे और प्रत्येक कोच में करीब 20 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था रहेगी। इस हिसाब से एक फेरे में लगभग 80 पर्यटक यात्रा कर सकेंगे। ट्रेन बैटरी से संचालित होगी, जिससे इसे पर्यावरण के अनुकूल बनाने की कोशिश की गई है।
यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक कोच वातानुकूलित यानी एसी रखने की व्यवस्था प्रस्तावित है। बैटरी की क्षमता और तकनीकी जरूरतों को देखते हुए सभी कोचों को एसी नहीं बनाया जाएगा। ट्रेन के स्वरूप और सुविधाओं को वंदे भारत की तर्ज पर आधुनिक बनाने की तैयारी की जा रही है।
तालाब और जंगल ट्रेल के बीच 40 मिनट की सैर
टॉय ट्रेन का नया मार्ग पर्यटकों के लिए पहले से अधिक आकर्षक बनाने की कोशिश की जा रही है। पुराने रूट में बदलाव करते हुए जंगल ट्रेल वाले हिस्से को कुछ छोटा किया जा रहा है, ताकि सफर के दौरान तालाब का नजारा भी शामिल हो सके। प्रस्तावित रूट में जू के प्रमुख आकर्षणों के आसपास से ट्रेन गुजरने की योजना है।
इससे बच्चों और परिवारों को ट्रेन में बैठकर उद्यान के अलग-अलग हिस्सों को देखने का अवसर मिलेगा। लगभग 40 मिनट की सैर के दौरान प्राकृतिक वातावरण और जू की हरियाली को करीब से देखने की योजना है। हालांकि अंतिम रूट और स्टॉपेज की जानकारी ट्रेन का परिचालन शुरू होने के समय ही स्पष्ट होगी।

बुजुर्गों और बच्चों के लिए भी उपयोगी होगी ट्रेन
नई टॉय ट्रेन उन पर्यटकों के लिए भी सुविधाजनक मानी जा रही है, जिन्हें पूरे चिड़ियाघर में पैदल घूमने में परेशानी होती है। बुजुर्ग, छोटे बच्चे और परिवार ट्रेन में बैठकर जू के विभिन्न हिस्सों का नजारा देख सकेंगे। इससे पूरे उद्यान का भ्रमण कम पैदल चलकर करने का विकल्प उपलब्ध होगा।
योजना के मुताबिक चिड़ियाघर खुलने के बाद सुबह करीब नौ बजे से ट्रेन का परिचालन शुरू किया जा सकता है। लेकिन टिकट की कीमत, नियमित समय-सारणी और स्टेशनों की संख्या अभी अंतिम रूप से घोषित नहीं की गई है। इसलिए पर्यटकों को परिचालन शुरू होने के बाद ही इन सुविधाओं से जुड़ी अंतिम जानकारी मिलेगी।
2015 में बंद हुआ था पुरानी टॉय ट्रेन का परिचालन
पटना जू में पुरानी टॉय ट्रेन का परिचालन 17 अगस्त 2015 को बंद कर दिया गया था। उस समय ट्रैक और कोच से संबंधित सुरक्षा को लेकर चिंताएं सामने आई थीं। अब नए ट्रैक, बैटरी चालित ट्रेन और आधुनिक व्यवस्था के साथ टॉय ट्रेन को दोबारा शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
नई परियोजना पूरी होने के बाद तकनीकी और सुरक्षा परीक्षण इसके परिचालन की दिशा में अहम चरण होंगे। फिलहाल निर्माण कार्य जारी है और जनवरी 2027 के अंत तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

