पटना में वित्त रहित शिक्षकों का अनोखा प्रदर्शन, गांधी मैदान के पास प्रशासन ने रोकी ‘कफन यात्रा’; कांग्रेस सेवा दल के बैनर तले निकाला गया विरोध मार्च
पटना: शिक्षक दिवस के मौके पर पटना में शिक्षकों का विरोध प्रदर्शन चर्चा का विषय बन गया। वित्त रहित शिक्षकों के समर्थन में कांग्रेस सेवा दल के बैनर तले ‘कफन यात्रा’ निकाली गई। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने अपनी मांगों को अलग अंदाज में रखा। जिन हाथों में कभी बच्चों को पढ़ाने के लिए चॉक और किताब हुआ करती थी, उन्हीं हाथों में शिक्षक कटोरा लेकर सड़क पर नजर आए।
प्रस्तावित यात्रा गांधी मैदान स्थित गांधी मूर्ति से शहीद स्मारक तक जानी थी, लेकिन प्रशासन ने गांधी मैदान के पास ही इसे रोक दिया। इसके बाद मौके पर प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों ने अपनी मांगों और नाराजगी को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की।
कटोरा लेकर शिक्षकों ने जताया विरोध
प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों के हाथ में कटोरे दिखाई दिए। यह प्रदर्शन सरकार के सामने उनकी आर्थिक स्थिति और लंबे समय से चली आ रही मांगों को लेकर विरोध का प्रतीक था।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब शिक्षक वर्षों से वेतन, बकाया भुगतान और सेवा सुरक्षा जैसी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, तो उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान क्यों नहीं किया जा रहा है।
इसी सवाल को प्रदर्शनकारियों ने अपने अनोखे तरीके से सामने रखा। शिक्षकों का संदेश था कि अगर सरकार वेतन नहीं दे रही है, तो क्या उनके सामने अब भिक्षाटन के अलावा कोई रास्ता बचा है?
‘कफन यात्रा’ को प्रशासन ने रास्ते में रोका
कांग्रेस सेवा दल के बैनर तले निकाली जा रही ‘कफन यात्रा’ को गांधी मैदान के पास ही रोक दिया गया। यात्रा को शहीद स्मारक तक ले जाने की योजना थी।
प्रशासन की ओर से यात्रा को आगे नहीं बढ़ने देने के बाद प्रदर्शनकारियों ने वहीं अपनी मांगों को लेकर विरोध दर्ज कराया। इस दौरान वित्त रहित शिक्षकों की समस्याओं और उनकी मांगों को प्रमुखता से उठाया गया।
वर्षों से वेतनमान और सेवा सुरक्षा की मांग
वित्त रहित शिक्षक लंबे समय से नियमित वेतनमान, बकाया भुगतान और सेवा सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षण कार्य से जुड़े होने के बावजूद उन्हें आर्थिक असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है।
कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया है कि शिक्षकों की मांगों को लेकर लगातार आश्वासन दिए गए, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
प्रदर्शन के जरिए संगठन ने सरकार से शिक्षकों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और उनकी समस्याओं का समाधान करने की मांग की।
शिक्षक दिवस पर उठा बड़ा सवाल
शिक्षक दिवस आमतौर पर शिक्षकों के सम्मान और उनके योगदान को याद करने का दिन माना जाता है। लेकिन पटना में इसी दिन शिक्षकों का कटोरा लेकर प्रदर्शन करना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता नजर आया।
प्रदर्शनकारियों ने अपने तरीके से यह सवाल सामने रखा कि शिक्षक दिवस पर शिक्षकों के हाथ में सम्मान होना चाहिए या कटोरा?
अब देखना होगा कि वित्त रहित शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही मांगों पर सरकार की ओर से क्या कदम उठाया जाता है।