पटना: पटना मेट्रो के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने के लिए बिहार सरकार ने बड़ी राशि मंजूर की है। राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में पटना मेट्रो रेल परियोजना के निर्माण और संचालन के लिए 628.32 करोड़ रुपये की सब्सिडी राशि स्वीकृत की है। सरकार को उम्मीद है कि इस राशि से परियोजना के काम को गति देने में मदद मिलेगी।
यह रकम केंद्र की विशेष सहायता योजना के तहत पूंजीगत निवेश के लिए उपलब्ध कराई गई है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने 23 जुलाई 2026 को बिहार के लिए इस योजना के तहत कुल 2925 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी थी। इसकी पहली किस्त के तौर पर 2628.32 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इसी राशि में से 628.32 करोड़ रुपये पटना मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को दिए जा रहे हैं।
केंद्र और राज्य दोनों की हिस्सेदारी
पटना मेट्रो रेल परियोजना का काम पटना मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड के जरिए किया जा रहा है। परियोजना की फंडिंग में केंद्र और बिहार सरकार की 20-20 फीसदी हिस्सेदारी है। बाकी 60 फीसदी राशि बाहरी एजेंसियों से कर्ज के तौर पर जुटाई जानी है।
सरकार की ओर से जारी राशि ऐसे समय में आई है जब पटना मेट्रो के अलग-अलग हिस्सों में निर्माण और परिचालन से जुड़ा काम आगे बढ़ रहा है। इससे परियोजना के लिए जरूरी वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
प्राथमिकता वाले कॉरिडोर पर भी काम जारी
पटना मेट्रो के प्राथमिकता वाले कॉरिडोर के रखरखाव की जिम्मेदारी दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) को दी गई है। इसके लिए दो साल आठ महीने की अवधि के रखरखाव पर करीब 2179.37 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
पटना में मेट्रो निर्माण का असर सड़क यातायात पर भी पड़ रहा है। खासकर नेहरू पथ और चिड़ियाघर गेट नंबर-1 के आसपास निर्माण कार्य के चलते वाहनों का दबाव बढ़ा है। इसे देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने ऑटो और ई-रिक्शा के लिए कुछ वैकल्पिक रूट भी शुरू किए हैं।
ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए बदले गए रूट
नई व्यवस्था के तहत सगुना मोड़ से पटना जंक्शन जाने वाले ऑटो और ई-रिक्शा अब डुमरा चौकी, एयरपोर्ट रोड, पीर अली पथ और हार्डिंग रोड के रास्ते जाएंगे। वहीं गांधी मैदान की ओर जाने वाले वाहनों के लिए एलएनजेपी अस्पताल रोड, न्यू पुनाईचक और नेहरू पथ वाला वैकल्पिक रास्ता तय किया गया है।
मेट्रो का निर्माण पूरा होने के बाद पटना में सार्वजनिक परिवहन की तस्वीर बदलने की उम्मीद है। फिलहाल निर्माण के दौरान होने वाली यातायात संबंधी परेशानियों को कम करने के लिए प्रशासन की ओर से रूट डायवर्जन और अन्य व्यवस्थाएं की जा रही हैं।