जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने सभी संबंधित विभागों को दिया अल्टीमेटम, सड़क क्षति की सूचना से लेकर मरम्मत तक बनेगा जवाबदेह सिस्टम; मेट्रो और गैस पाइपलाइन के काम से खराब सड़कों को भी तत्काल ठीक करने का निर्देश
पटना, 30 सितंबर 2026। पटना में बाढ़ और लगातार हुई अत्यधिक बारिश से जिले की सड़कों को हुए नुकसान के बाद अब जिला प्रशासन ने सड़क मरम्मत को मिशन मोड में लेने का फैसला किया है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक क्षतिग्रस्त सड़कों की पहचान कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त कराया जाएगा। जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने सड़क निर्माण और अनुरक्षण से जुड़े सभी विभागों को अगले एक सप्ताह तक सड़क मरम्मत एवं अनुरक्षण कार्य पर विशेष फोकस रखने का निर्देश दिया है। खास बात यह है कि प्रशासन अब सिर्फ क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि सड़क खराब होने की सूचना मिलने से लेकर निरीक्षण, मरम्मत और उसके बाद निगरानी तक की पूरी प्रक्रिया को जवाबदेह बनाने की तैयारी में है।
जिलाधिकारी ने ग्रामीण कार्य विभाग, पथ निर्माण विभाग, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम, नगर निकायों सहित सड़क निर्माण एवं अनुरक्षण से जुड़े विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर जिले में सड़कों की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि बारिश और जलजमाव के कारण जिन सड़कों की सतह खराब हुई है, गड्ढे बने हैं या सड़क का हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है, वहां बिना अनावश्यक देरी के मरम्मत का काम शुरू किया जाए।
सड़क खराब होने की सूचना से मरम्मत तक बनेगा नया मैकेनिज्म
पटना जैसे तेजी से बढ़ते शहर में सड़क की छोटी-सी क्षति भी यातायात व्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकती है। जलजमाव के बाद सड़क में बने गड्ढे, टूटे हिस्से और उखड़ी सड़क न केवल वाहनों की रफ्तार प्रभावित करते हैं, बल्कि दुर्घटना का जोखिम भी बढ़ाते हैं। इसी को देखते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को ऐसा प्रभावी मैकेनिज्म तैयार करने को कहा है, जिससे सड़क क्षतिग्रस्त होने की जानकारी तत्काल मिल सके।
प्रशासन का जोर इस बात पर है कि सड़क की खराब स्थिति की सूचना मिलने के बाद कार्रवाई केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रहे। सूचना मिलने के बाद संबंधित अधिकारी स्थल का निरीक्षण करें, क्षति का आकलन हो और आवश्यकतानुसार मरम्मत शुरू कराई जाए। इसके साथ ही मरम्मत की प्रगति की निगरानी भी की जाए। इस व्यवस्था से सड़क क्षति के मामलों में विभागीय स्तर पर जवाबदेही तय करने में भी मदद मिल सकती है।
अनुरक्षण अवधि में आने वाली सड़कों की जिम्मेदारी संवेदकों की
बैठक में जिलाधिकारी ने उन सड़कों पर भी विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया जो अभी अनुरक्षण अवधि में हैं। ऐसी सड़कों का नियमानुकूल रखरखाव और मरम्मत संबंधित संवेदकों के माध्यम से कराने को कहा गया है। कार्यपालक अभियंताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण करने और सड़क क्षति मिलने पर मरम्मत में देरी नहीं करने का निर्देश दिया गया।
इसका सीधा उद्देश्य यह है कि जिन सड़कों के रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी या संवेदक की है, वहां सरकारी तंत्र पर अतिरिक्त दबाव न पड़े और निर्धारित शर्तों के अनुसार संबंधित एजेंसी ही सड़क को दुरुस्त कराए।
रोड एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाने पर जोर
सड़कों की मरम्मत के साथ-साथ छोटी और तत्काल जरूरत वाली सड़क क्षतियों को दूर करने के लिए पर्याप्त संख्या में रोड एम्बुलेंस उपलब्ध रखने का निर्देश भी दिया गया है। रोड एम्बुलेंस के जरिए सड़क पर पैदा होने वाली छोटी-बड़ी समस्याओं पर तेजी से कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन का यह कदम विशेष रूप से व्यस्त सड़कों और प्रमुख मार्गों पर यातायात सुचारु रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मेट्रो और गैस पाइपलाइन से खुदाई के बाद सड़क ठीक करना जरूरी
पटना में सड़क क्षति का एक महत्वपूर्ण कारण विभिन्न आधारभूत संरचना परियोजनाओं के लिए होने वाली खुदाई भी है। मेट्रो रेल और गैस पाइपलाइन बिछाने के दौरान सड़कों की खुदाई की जाती है। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को इन एजेंसियों के साथ समन्वय कर काम करने का निर्देश दिया है।
निर्देश के अनुसार, जहां भी मेट्रो या गैस पाइपलाइन बिछाने के लिए सड़क की खुदाई की जाती है, वहां काम पूरा होने के बाद संबंधित एजेंसी को सड़क की तत्काल और गुणवत्तापूर्ण मरम्मत सुनिश्चित करनी होगी। प्रशासन का फोकस इस बात पर है कि विकास परियोजना के नाम पर सड़क को लंबे समय तक खराब स्थिति में न छोड़ा जाए।
राजेंद्र नगर टर्मिनस के पास सड़क जल्द ठीक करने का निर्देश
पटना मेट्रो को विशेष रूप से उन सड़कों की लगातार निगरानी करने को कहा गया है जिनके रखरखाव की जिम्मेदारी उसके कार्यक्षेत्र में आती है। जिलाधिकारी ने राजेंद्र नगर टर्मिनस के पास क्षतिग्रस्त सड़क को शीघ्र ठीक कराने का निर्देश भी दिया। यह क्षेत्र यातायात की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, इसलिए यहां सड़क की स्थिति का सीधा असर आम यात्रियों और स्थानीय यातायात पर पड़ता है।
फुट ओवरब्रिज और खराब एस्केलेटर भी होंगे फोकस में
सड़क मरम्मत के साथ जिला प्रशासन ने पैदल यात्रियों की सुरक्षा को भी बैठक के एजेंडे में शामिल किया। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को ऐसे स्थानों की सूची तैयार करने का निर्देश दिया है जहां सुरक्षित पैदल आवागमन के लिए फुट ओवरब्रिज की जरूरत है।
इसके अलावा सड़कों पर बने पुलों और फुट ओवरब्रिज से जुड़े खराब एस्केलेटरों को भी तत्काल दुरुस्त कराने का निर्देश दिया गया है। इससे स्पष्ट है कि प्रशासन का फोकस केवल सड़क की ऊपरी सतह ठीक करने तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़क से जुड़े पैदल यात्री सुविधाओं और सुरक्षा ढांचे को भी दुरुस्त करने पर है।
अनधिकृत क्रॉसिंग और अतिक्रमण पर भी कार्रवाई
बैठक में एसपी ट्रैफिक सागर कुमार ने अनधिकृत क्रॉसिंग को चिन्हित कर उन्हें बंद करने की कार्रवाई का निर्देश दिया। प्रशासन का मानना है कि सड़क के निर्धारित हिस्से के अलावा अन्य स्थानों से पैदल या वाहनों का आवागमन यातायात व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है और दुर्घटना का कारण बन सकता है।
सड़क किनारे बने पैदल पथ को अतिक्रमणमुक्त कराने पर भी जोर दिया गया। फुटपाथ पर अतिक्रमण होने से पैदल यात्रियों को सड़क पर चलना पड़ता है, जिससे उनकी सुरक्षा प्रभावित होती है। ऐसे में फुटपाथ को खाली कराकर पैदल यात्रियों के लिए सुगम रास्ता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
वाहन खराब या पेड़ गिरने पर तत्काल हटेगा अवरोध
प्रशासन ने सड़क पर वाहन खराब होने, पेड़ गिरने या किसी अन्य वजह से यातायात बाधित होने की स्थिति में भी त्वरित कार्रवाई का निर्देश दिया है। संबंधित अधिकारियों को आपसी समन्वय से ऐसे अवरोधों को जल्द हटाने और यातायात बहाल करने को कहा गया है।
यह व्यवस्था खास तौर पर बारिश के मौसम में महत्वपूर्ण है, क्योंकि सड़क पर जलजमाव, पेड़ गिरने या वाहनों के खराब होने जैसी घटनाओं से थोड़े समय में लंबा जाम लग सकता है। ऐसे मामलों में तत्काल रिस्पांस से यातायात बाधित होने की अवधि कम की जा सकती है।
अनुमंडल स्तर पर होगी लगातार निगरानी
जिलाधिकारी ने सभी अनुमंडल पदाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में सड़क मरम्मत कार्य की नियमित निगरानी करने का निर्देश दिया है। सड़क मरम्मत की प्रगति की समीक्षा करने और जरूरत पड़ने पर संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर समस्याओं का समाधान कराने को कहा गया है।
प्रशासन का यह एक सप्ताह का विशेष अभियान ऐसे समय में शुरू किया जा रहा है जब बाढ़ और अत्यधिक बारिश के बाद कई इलाकों में सड़क की स्थिति प्रभावित हुई है। ऐसे में अगले सात दिनों में क्षतिग्रस्त सड़कों की पहचान, प्राथमिकता तय करने और मरम्मत की गति बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा।
सड़क मरम्मत के साथ जवाबदेही पर भी जोर
पूरे अभियान का सबसे अहम पहलू यह है कि प्रशासन सड़क की मरम्मत के साथ उसकी निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था को भी मजबूत करना चाहता है। सड़क क्षति की जानकारी समय पर मिले, संबंधित अधिकारी उसका निरीक्षण करें, मरम्मत शुरू हो और काम की गुणवत्ता की निगरानी हो—इन सभी चरणों को सक्रिय रखने का निर्देश दिया गया है।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि त्वरित कार्रवाई, गुणवत्तापूर्ण मरम्मत और सुरक्षित आवागमन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यानी प्रशासन का लक्ष्य सिर्फ गड्ढे भरना नहीं, बल्कि बारिश और बाढ़ के बाद पटना की सड़क व्यवस्था को जल्द से जल्द सामान्य करना और आगे सड़क क्षति पर त्वरित प्रतिक्रिया की व्यवस्था विकसित करना है।
बैठक में उप विकास आयुक्त शुभम कुमार, सभी संबंधित विभागों के कार्यपालक अभियंता, नगर निकायों के कार्यपालक पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।