स्वास्थ्य मंत्री निशांत की अपील- मरीजों के अस्पताल पहुंचने का इंतजार नहीं, घर-घर पहुंचकर होगी टीबी की पहचान; 38 जिलों में जिला टीबी केंद्र, 499 केंद्रों पर मुफ्त एक्सरे की सुविधा
बिहार को टीबी मुक्त बनाने की मुहिम अब केवल अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों तक सीमित नहीं रहेगी। राज्य सरकार ने टीबी की पहचान और उपचार को घर-घर तक पहुंचाने पर जोर दिया है। स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने कहा है कि मरीजों के अस्पताल आने का इंतजार करने के बजाय स्वास्थ्य विभाग खुद लोगों तक पहुंचकर टीबी की स्क्रीनिंग कर रहा है। इसी अभियान के तहत बिहार में अब तक 3 करोड़ 50 लाख 61 हजार लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिसमें 3 लाख 97 हजार 409 टीबी मरीजों की पहचान हुई है। इन मरीजों का उपचार जारी है।इसी अभियान के तहत बिहार में अब तक 3 करोड़ 50 लाख 61 हजार लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिसमें 3 लाख 97 हजार 409 टीबी मरीजों की पहचान हुई है। इन मरीजों का उपचार जारी है।
बुधवार को पटना स्थित लोक भवन में ‘टीबी मुक्त बिहार’ विषय पर आयोजित उच्चस्तरीय संगोष्ठी में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री निशांत भी मौजूद रहे। संगोष्ठी में टीबी की समय पर पहचान, जांच, उपचार, मरीजों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, नई उपचार तकनीकों और जनभागीदारी जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
अस्पताल आने का इंतजार नहीं, लोगों तक पहुंचकर होगी स्क्रीनिंग
बिहार में टीबी उन्मूलन अभियान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सक्रिय स्क्रीनिंग को बनाया जा रहा है। इसका मतलब है कि बीमारी के लक्षण वाले लोगों की पहचान के लिए केवल अस्पताल आने वाले मरीजों पर निर्भर रहने के बजाय स्वास्थ्य विभाग संभावित मरीजों तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने कहा कि टीबी को खत्म करने के लिए समय पर बीमारी की पहचान और उपचार बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि विभाग मरीजों के अस्पताल आने की प्रतीक्षा करने के बजाय उन तक पहुंचकर स्क्रीनिंग कर रहा है।
अब तक सामने आए स्क्रीनिंग आंकड़े इस अभियान के बड़े पैमाने को दिखाते हैं। 3.50 करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग के दौरान करीब 3.97 लाख मरीजों की पहचान की गई है। पहचान किए गए मरीजों का इलाज कराया जा रहा है और उनके परिवारों को भी संक्रमण से बचाव के बारे में जानकारी दी जा रही है।
टीबी उन्मूलन की कोशिशों पर राज्यपाल ने स्वास्थ्य मंत्री और सचिव को दी बधाई
टीबी मुक्त बिहार’ पर आयोजित उच्चस्तरीय संगोष्ठी में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने पिछले तीन-चार महीनों में टीबी उन्मूलन के लिए किए गए प्रयासों को लेकर स्वास्थ्य मंत्री निशांत और स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि को बधाई दी। उन्होंने कहा कि टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बिहार का टीबी मुक्त होना जरूरी है। राज्यपाल ने बताया कि प्रधानमंत्री ने उन्हें और उनकी पत्नी को भी ‘टीबी मुक्त बिहार’ अभियान से जुड़कर काम करने की सलाह दी थी। उन्होंने बिहार में अभियान के सभी जिलों तक विस्तार और मोबाइल एक्सरे मशीनों के जरिए स्क्रीनिंग की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि टीबी से लड़ाई में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के साथ समाज में बीमारी को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करना भी जरूरी है। लोगों तक यह संदेश पहुंचना चाहिए कि टीबी का इलाज संभव है और इसके लिए दवाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने लगातार खांसी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने और बिना चिकित्सकीय सलाह के पुरानी दवाओं से खुद इलाज करने से बचने की अपील की।राज्यपाल ने कहा कि समय पर जांच, पूरा उपचार और व्यापक जनजागरूकता टीबी उन्मूलन अभियान की सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने समाज के हर वर्ग तक टीबी से बचाव और उपचार से जुड़ी सही जानकारी पहुंचाने पर जोर दिया।
38 जिलों में टीबी केंद्र, 499 जगहों पर मुफ्त एक्सरे
राज्य में टीबी की जांच और उपचार की सुविधाओं को मजबूत करने के लिए जिला स्तर पर भी ढांचा तैयार किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बिहार के सभी 38 जिलों में जिला टीबी केंद्र संचालित हैं। इसके अलावा मरीजों की निःशुल्क एक्सरे जांच के लिए 499 केंद्र काम कर रहे हैं।
दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने के लिए पटना और दरभंगा में राज्यस्तरीय टीबी दवा भंडार बनाए गए हैं, जबकि प्रत्येक जिले में जिलास्तरीय दवा भंडार की व्यवस्था की गई है। इससे टीबी मरीजों के उपचार के दौरान दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने अभियान को जिला और प्रखंड स्तर तक पहुंचाने के लिए समितियों का गठन भी किया है। इससे स्थानीय स्तर पर स्क्रीनिंग, उपचार और मरीजों की निगरानी से जुड़े कार्यों को बेहतर तरीके से संचालित करने का लक्ष्य है।
ड्रग रेजिस्टेंट टीबी के इलाज पर भी फोकस
टीबी उन्मूलन की रणनीति में उन मरीजों के उपचार को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है जिनमें दवाओं के प्रति प्रतिरोध विकसित हो जाता है। ऐसे मामलों के लिए बिहार के प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में ड्रग रेजिस्टेंट टीबी के नोडल केंद्र स्थापित किए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पीएमसीएच, आईजीआईएमएस, एसकेएमसीएच, डीएमसीएच, जेएलएनएमसीएच और एएनएमएमसीएच में ऐसे नोडल केंद्र स्थापित हैं। राज्य के अन्य सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में भी इस तरह के केंद्र स्थापित करने की योजना है।
इसके अलावा अगमकुआं, पटना स्थित यक्ष्मा प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण केंद्र के साथ दरभंगा, भागलपुर और आईजीआईएमएस, पटना में जांच सुविधाएं उपलब्ध हैं। पावापुरी में नया केंद्र निर्माणाधीन है।
सिर्फ दवा नहीं, मरीजों के पोषण पर भी जोर
टीबी से लड़ाई में मरीजों के पोषण को भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि निक्षय पोषण योजना के तहत चिह्नित टीबी मरीजों को हर महीने 1,000 रुपये की सहायता दी जा रही है।
इसके अलावा निक्षय मित्रों के सहयोग से अब तक करीब 66 हजार फूड बास्केट वितरित किए जा चुके हैं। इसका उद्देश्य उपचार के दौरान मरीजों को पोषण संबंधी सहयोग उपलब्ध कराना है।
स्वास्थ्य मंत्री ने युवाओं और आम नागरिकों से निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों की सहायता करने की अपील की। इससे सरकारी प्रयासों के साथ सामाजिक भागीदारी को जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
टीबी मुक्त बिहार के लिए जनभागीदारी पर जोर
संगोष्ठी में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि टीबी जैसी बीमारी के उन्मूलन के लिए केवल स्वास्थ्य विभाग की कोशिश पर्याप्त नहीं है। मरीजों को उपचार बीच में नहीं छोड़ने के लिए प्रेरित करना, परिवार के सदस्यों को संक्रमण से बचाव की जानकारी देना और समाज में टीबी को लेकर जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है।
कार्यक्रम में टीबी से स्वस्थ हो चुके लोगों और फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मियों ने अपने अनुभव साझा किए। टीबी उन्मूलन अभियान में उल्लेखनीय कार्य करने वाले फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मियों और टीबी चैंपियनों को सम्मानित भी किया गया।
कार्यक्रम के दौरान ‘निक्षय शपथ’ के माध्यम से टीबी मुक्त बिहार का संकल्प दोहराया गया। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और युवा स्वयंसेवकों की मौजूदगी भी इस अभियान में जनजागरूकता और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के प्रयास को दर्शाती है।
राज्यपाल के सुझावों का भी स्वास्थ्य विभाग को मिला लाभ
स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने कार्यक्रम में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन के मार्गदर्शन और सहयोग के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि 10 जून 2026 को अधिवेशन भवन में आयोजित ‘टीबी मुक्त बिहार’ कार्यक्रम में राज्यपाल की ओर से दिए गए सुझावों से स्वास्थ्य विभाग को लाभ मिला है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बिहार को टीबी मुक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। इसके लिए जांच और उपचार की सुविधाओं का विस्तार करने के साथ आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।
आगे की चुनौती: पहचान के बाद उपचार पूरा कराना
बिहार में करोड़ों लोगों की स्क्रीनिंग और लाखों मरीजों की पहचान अभियान की पहुंच को दिखाती है, लेकिन टीबी उन्मूलन के लिए बीमारी की पहचान के बाद उपचार को पूरा कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसी वजह से संगोष्ठी में मरीजों को उपचार बीच में नहीं छोड़ने के लिए प्रेरित करने और उनकी जरूरत के मुताबिक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया।
सरकार की रणनीति में अब स्क्रीनिंग, समय पर जांच, उपचार, पोषण सहायता, परिवार की जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी को एक साथ जोड़ने की कोशिश दिखाई दे रही है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि टीबी उन्मूलन के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे और स्वास्थ्य विभाग पूरी तत्परता के साथ काम करता रहेगा।
उन्होंने आम लोगों से अपील की कि इस अभियान को केवल सरकारी कार्यक्रम न मानकर सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में लिया जाए। स्वास्थ्य मंत्री का संदेश था—“आइए, हम सब मिलकर स्वस्थ और टीबी मुक्त बिहार बनाएं।”
कार्यक्रम में राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह, स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि, स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, माई भारत के युवा स्वयंसेवक तथा सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।