कंकड़बाग से साइकिल चलाकर खगौल आते थे एक्टर, पुराने थिएटर को देखकर लौट आईं यादें; ‘मिर्जापुर: द मूवी’ के प्रमोशन के लिए पहुंचे थे पटना
पटना। आज जिस अभिनेता को बड़े पर्दे पर देखने के लिए लोग उत्साहित रहते हैं, कभी वही पंकज त्रिपाठी एक आम थिएटर कलाकार के रूप में कंकड़बाग से साइकिल चलाकर खगौल आया करते थे। करीब 30 साल बाद जब वह उसी जगह पहुंचे तो पुरानी यादें फिर ताजा हो गईं।
मौका था उनकी फिल्म ‘मिर्जापुर: द मूवी’ के प्रमोशन का, लेकिन पंकज के लिए पटना का यह दौरा सिर्फ फिल्म प्रचार तक सीमित नहीं रहा। इस दौरान उन्होंने अपने शुरुआती संघर्ष और थिएटर के दिनों की कई बातें साझा कीं।
पंकज त्रिपाठी ने बताया कि उनके अभिनय के सफर की शुरुआत खगौल के एनसी घोष इंस्टीट्यूट से हुई थी। साल 1996 में उन्होंने यहां अपना पहला नाटक किया था। उस समय वह कंकड़बाग से साइकिल चलाकर खगौल पहुंचते थे। करीब डेढ़ महीने तक साइकिल से आने-जाने और थिएटर में काम करने का सिलसिला चला। आज जब वह उसी जगह वापस पहुंचे तो उन्हें अपने करियर के शुरुआती दिन याद आ गए।
दानापुर स्टेशन पर उतरते ही लौट आया पुराना दौर
पंकज ने बताया कि करीब तीन दशक बाद दानापुर स्टेशन पहुंचने का अनुभव उनके लिए खास था। पुराने इलाके और थिएटर से जुड़ी जगहों को देखकर उन्हें वह दौर याद आया, जब उनके पास न बड़ी फिल्में थीं और न ही स्टार वाली पहचान। बस अभिनय करने का जुनून था।
जिस रास्ते पर कभी वह साइकिल से जाया करते थे, आज उसी सफर को याद करते हुए पंकज ने अपने पुराने दिनों की बातें लोगों से साझा कीं। उनके लिए यह बदलाव किसी फिल्म की कहानी जैसा ही है। एक तरफ संघर्ष के दिन थे, दूसरी तरफ आज देशभर में पहचाना जाने वाला चेहरा।
अब भोजपुरी फिल्म बनाने का सपना
पटना में बातचीत के दौरान पंकज त्रिपाठी ने भोजपुरी सिनेमा को लेकर भी अपनी इच्छा बताई। उन्होंने कहा कि वह भोजपुरी फिल्म बनाना चाहते हैं। इसके लिए उन्हें एक अच्छी कहानी की तलाश है।
पंकज का बिहार और भोजपुरी भाषा से गहरा जुड़ाव रहा है। ऐसे में उनका भोजपुरी फिल्म बनाने का विचार स्थानीय दर्शकों के लिए भी खास है। हालांकि, उन्होंने अभी फिल्म की कहानी, कलाकारों या शूटिंग को लेकर कोई पक्की घोषणा नहीं की है। फिलहाल वह सही कहानी की तलाश में हैं।
अगर यह सपना पूरा होता है तो पंकज त्रिपाठी के करियर में यह एक अलग तरह की शुरुआत होगी। हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान बनाने के बाद अपनी क्षेत्रीय भाषा में फिल्म बनाना उनके लिए भी खास अनुभव हो सकता है।
‘मिर्जापुर’ की टीम के साथ पहुंचे पटना
पंकज त्रिपाठी पटना अपनी चर्चित फिल्म ‘मिर्जापुर: द मूवी’ के प्रमोशन के लिए पहुंचे थे। उनके साथ अली फजल और दिव्येंदु शर्मा भी मौजूद थे। फिल्म में पंकज एक बार फिर कालीन भैया के किरदार में नजर आने वाले हैं।
‘मिर्जापुर’ की कहानी और इसके किरदारों ने पिछले कुछ सालों में दर्शकों के बीच अपनी अलग जगह बनाई है। अब इसी कहानी को बड़े पर्दे पर देखने के लिए दर्शकों में उत्सुकता है। फिल्म का निर्देशन गुरमीत सिंह ने किया है, जबकि इसकी कहानी और पटकथा पुनीत कृष्णा से जुड़ी है।
साइकिल से शुरू हुआ सफर, आज बड़े पर्दे तक पहुंचा
पंकज त्रिपाठी का करियर उन लोगों के लिए भी प्रेरणा है, जो छोटे शहरों से निकलकर अभिनय की दुनिया में अपनी जगह बनाने का सपना देखते हैं। थिएटर से शुरुआत करने वाले पंकज ने धीरे-धीरे फिल्मों और वेब सीरीज में अपनी मजबूत पहचान बनाई।
उनकी पटना यात्रा का सबसे भावुक हिस्सा यही रहा कि वह उस जगह वापस पहुंचे, जहां कभी उनके सपनों ने आकार लेना शुरू किया था। उस समय कंकड़बाग से खगौल तक साइकिल चलाकर पहुंचने वाला कलाकार शायद नहीं जानता था कि एक दिन वह उसी शहर में अपनी फिल्म के प्रमोशन के लिए बड़े स्टार के तौर पर लौटेगा।
पंकज की कहानी में संघर्ष भी है और सफलता भी। शायद यही वजह है कि अपने पुराने थिएटर को देखकर उनकी यादें फिर लौट आईं। और अब इन यादों के साथ उनके मन में एक नया सपना भी है, भोजपुरी फिल्म बनाने का।