मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया जयंती समारोह का उद्घाटन, पं. राजकुमार शुक्ल की जीवनी पाठ्य पुस्तकों में शामिल करने की घोषणा
कल्पना पटवारी समेत चार हस्तियों को मिला पं. राजकुमार शुक्ल शिखर सम्मान, भारत रत्न देने की भी उठी मांग
पटना। चंपारण सत्याग्रह के महानायक पंडित राजकुमार शुक्ल की 151वीं जयंती के अवसर पर बिहार विधान परिषद एनेक्सी हाल में विशेष समारोह का आयोजन किया गया। पंडित राजकुमार शुक्ल स्मृति संस्थान और कला एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि पंडित राजकुमार शुक्ल की जयंती को आगामी वर्ष से बिहार सरकार राजकीय समारोह के रूप में मनाएगी। वहीं शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने उनकी जीवनी को राज्य की पाठ्य पुस्तकों में शामिल करने की घोषणा की।
इसके अलावा कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने पंडित राजकुमार शुक्ल संग्रहालय स्थापित कर चंपारण सत्याग्रह से जुड़े स्मृति अवशेषों को संरक्षित करने की बात कही।
अगले साल राजकीय समारोह के रूप में मनाई जाएगी जयंती
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि देश की आजादी के इतिहास में चंपारण सत्याग्रह प्रथम आंदोलन था और इसके महानायक पंडित राजकुमार शुक्ल थे। उन्होंने पंडित राजकुमार शुक्ल को उनकी 151वीं जयंती पर नमन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित राजकुमार शुक्ल और महात्मा गांधी ने जनता की समस्याओं को समाप्त करने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया। पंडित राजकुमार शुक्ल किसी जाति या धर्म तक सीमित नहीं थे, बल्कि उन्होंने देश की सेवा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।
उन्होंने कहा कि आगामी वर्ष पंडित राजकुमार शुक्ल की जयंती राज्य सरकार द्वारा राजकीय समारोह के रूप में आयोजित की जाएगी। सरकार ऐसे सभी महान विभूतियों को सम्मान देने के लिए प्रतिबद्ध है।
पाठ्य पुस्तकों में शामिल होगी पंडित राजकुमार शुक्ल की जीवनी
बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी पंडित राजकुमार शुक्ल को वह राजकीय सम्मान नहीं मिल सका, जिसके वे हकदार थे।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की पाठ्य पुस्तकों में पंडित राजकुमार शुक्ल की जीवनी को शामिल किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान और संघर्ष के बारे में जान सकें।
मिथिलेश तिवारी ने चंपारण की ऐतिहासिक भूमि को नमन करते हुए कहा कि इसी धरती पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी आए और यहां से उनके आंदोलन को नई दिशा मिली।
उन्होंने यह भी कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में चंपारण सत्याग्रह का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है और पंडित राजकुमार शुक्ल की भूमिका को इतिहास में उचित स्थान मिलना चाहिए।
पंडित राजकुमार शुक्ल के नाम पर बनेगा संग्रहालय
कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि कला एवं संस्कृति विभाग की ओर से पंडित राजकुमार शुक्ल के नाम पर संग्रहालय स्थापित किया जाएगा।
इस संग्रहालय में चंपारण सत्याग्रह से जुड़े स्मृति अवशेषों को संरक्षित किया जाएगा, ताकि आज की पीढ़ी पंडित राजकुमार शुक्ल के संघर्ष और योगदान को समझ सके।
उन्होंने कहा कि जो समाज अपने इतिहास को भूल जाता है, उसका भविष्य कमजोर हो जाता है। इसलिए समाज को अपने महापुरुषों के योगदान पर गर्व करना चाहिए और उनकी विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना चाहिए।
कल्पना पटवारी समेत चार हस्तियों को मिला शिखर सम्मान
कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली हस्तियों को पंडित राजकुमार शुक्ल शिखर सम्मान से सम्मानित किया गया।
- कला के क्षेत्र में — लोक गायिका कल्पना पटवारी
- साहित्य के क्षेत्र में — डॉ. दिवाकर राय
- पत्रकारिता के क्षेत्र में — पुष्यमित्र
- समाज सेवा के क्षेत्र में — गोपाल कृष्ण मोदी
सम्मान प्राप्त करने के बाद प्रसिद्ध लोक गायिका कल्पना पटवारी ने पंडित राजकुमार शुक्ल को महान व्यक्तित्व बताया। उन्होंने कहा कि चंपारण सत्याग्रह और पंडित राजकुमार शुक्ल से उनका गहरा जुड़ाव रहा है।
उन्होंने बताया कि 2017 में शताब्दी वर्ष के अवसर पर वह पंडित राजकुमार शुक्ल के गांव गई थीं और चंपारण की व्यथा-कथा पर काम करने के लिए प्रेरित हुईं। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में चंपारण सत्याग्रह पर एक नई योजना के तहत काम करेंगी।
पंडित राजकुमार शुक्ल को भारत रत्न देने की मांग
कार्यक्रम में पंडित राजकुमार शुक्ल को भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग भी उठाई गई।
पंडित राजकुमार शुक्ल स्मृति संस्थान के अध्यक्ष और लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. राजेश भट्ट ने कहा कि पंडित राजकुमार शुक्ल को वह सम्मान अब तक नहीं मिल सका, जिसके वे वास्तविक हकदार थे।

उन्होंने कहा कि चंपारण सत्याग्रह भारतीय भूमि पर महात्मा गांधी के नेतृत्व में हुआ पहला बड़ा आंदोलन था। पंडित राजकुमार शुक्ल के निरंतर प्रयासों के कारण ही महात्मा गांधी पहली बार चंपारण पहुंचे थे।
1916 में गांधी और शुक्ल की मुलाकात बनी इतिहास की अहम कड़ी
डॉ. राजेश भट्ट ने कहा कि 1916 के लखनऊ अधिवेशन में पंडित राजकुमार शुक्ल और महात्मा गांधी की मुलाकात एक ऐतिहासिक संयोग था।
उनके अनुसार यदि पंडित राजकुमार शुक्ल महात्मा गांधी को चंपारण आने के लिए लगातार आग्रह नहीं करते तो शायद चंपारण सत्याग्रह का इतिहास अलग होता।
उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के चंपारण आने से पहले पंडित राजकुमार शुक्ल ने सत्याग्रह की मजबूत नींव तैयार की और किसानों की समस्याओं को जन आंदोलन का रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राजकीय सम्मान और प्रतिमा स्थापित करने की भी मांग
डॉ. राजेश भट्ट ने कहा कि पंडित राजकुमार शुक्ल की जयंती को राजकीय समारोह के रूप में मनाने के साथ-साथ राजधानी में किसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल पर उनकी प्रतिमा स्थापित की जानी चाहिए, ताकि लोग उनकी जयंती और पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दे सकें।
उन्होंने कहा कि पंडित राजकुमार शुक्ल को भुला देना ऐतिहासिक भूल थी, जिसे अब नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का भी आभार जताया और कहा कि चंपारण सत्याग्रह के शताब्दी वर्ष के अवसर पर पंडित राजकुमार शुक्ल के लिए भारत रत्न की अनुशंसा की गई थी। उन्होंने केंद्र सरकार से इस पर जल्द विचार करने की मांग की।
छात्रों के बीच स्कूल बैग का वितरण
कार्यक्रम के दौरान पंडित राजकुमार शुक्ल स्मृति संस्थान की ओर से छात्रों के बीच स्कूल बैग का भी वितरण किया गया।
आयोजकों ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों का उद्देश्य नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम और चंपारण सत्याग्रह के नायकों के योगदान से परिचित कराना है।
कार्यक्रम में बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह, शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी, कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार, लोक गायिका कल्पना पटवारी, संस्थान के अध्यक्ष डॉ. राजेश भट्ट समेत साहित्य, कला, पत्रकारिता और समाज सेवा से जुड़े कई लोग मौजूद रहे।