PM मोदी के बयान के बाद चिदंबरम का पलटवार
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर शुरू हुई राजनीतिक बहस अब और तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने पीएम मोदी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने पर गर्व है।
चिदंबरम ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक संक्षिप्त पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री के बयान का जवाब दिया। उन्होंने लिखा, “I am proud to be a dimagi naxal!” उनका यह बयान सामने आते ही कांग्रेस और बीजेपी के बीच चल रही राजनीतिक बयानबाजी ने एक नया मोड़ ले लिया।
लाल किले से PM मोदी ने क्या कहा था?
इस विवाद की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 अगस्त के संबोधन से हुई। लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हथियारबंद नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में देश को बड़ी सफलता मिली है।
हालांकि, उन्होंने इसी के साथ वैचारिक स्तर पर मौजूद नक्सली सोच को लेकर भी चेतावनी दी। प्रधानमंत्री ने ऐसे लोगों के लिए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया और उनकी पहचान कर उन्हें अलग-थलग करने की जरूरत बताई।
प्रधानमंत्री का कहना था कि हथियार उठाने वाले नक्सलवाद की ताकत कमजोर हुई है, लेकिन उससे जुड़ी विचारधारा को लेकर सतर्क रहने की जरूरत बनी हुई है।
P Chidambaram ने एक लाइन में दिया जवाब
पीएम मोदी के इस बयान के अगले ही दिन पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द को ही अपने जवाब का आधार बनाया।
चिदंबरम ने लिखा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ होने पर गर्व है। कांग्रेस नेता की यह टिप्पणी राजनीतिक तौर पर प्रधानमंत्री के बयान को चुनौती देने के रूप में देखी जा रही है।
उनकी पोस्ट के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई। बीजेपी समर्थकों ने चिदंबरम के बयान पर सवाल उठाए, जबकि कांग्रेस और विपक्षी खेमे के नेताओं की ओर से पीएम मोदी के बयान को लेकर पहले से ही आपत्तियां सामने आ रही थीं।
कांग्रेस पहले ही कर चुकी थी PM के बयान की आलोचना
चिदंबरम के बयान से पहले कांग्रेस की ओर से भी प्रधानमंत्री के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर प्रतिक्रिया आ चुकी थी।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पीएम मोदी की टिप्पणी को लेकर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि पहले राजनीतिक विरोधियों को ‘अर्बन नक्सल’ कहा जाता था और अब ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है। रमेश ने इसे प्रधानमंत्री की हताशा का संकेत बताया।
यानी चिदंबरम की ताजा टिप्पणी को कांग्रेस की व्यापक राजनीतिक प्रतिक्रिया की अगली कड़ी के तौर पर भी देखा जा रहा है।
‘दिमागी नक्सल’ शब्द पर क्यों हो रही है बहस?
दरअसल, ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल ऐसे लोगों के संदर्भ में किया जा रहा है, जिन्हें सरकार या उसके समर्थक नक्सली विचारधारा के वैचारिक समर्थक के रूप में देखते हैं। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में हथियारबंद नक्सलवाद और वैचारिक नक्सलवाद के बीच अंतर की बात करते हुए इस मुद्दे को उठाया।
विपक्ष की ओर से हालांकि इस तरह के शब्दों के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई जा रही है। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि सरकार से असहमति रखने वाले लोगों या आलोचकों को इस तरह के लेबल से जोड़ना लोकतांत्रिक बहस के लिए उचित नहीं है।
यही वजह है कि प्रधानमंत्री के भाषण के बाद यह मुद्दा सिर्फ नक्सलवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक असहमति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बहस से भी जुड़ गया है।
जयराम रमेश ने PM पर और तीखा हमला बोला
जयराम रमेश ने अपनी प्रतिक्रिया में प्रधानमंत्री पर एक और राजनीतिक तंज कसा। उन्होंने ‘अर्बन नक्सल’ से लेकर ‘दिमागी नक्सल’ तक के शब्दों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी की राजनीतिक भाषा पर सवाल उठाए।

उन्होंने यह भी दावा किया कि जिन मुद्दों को लेकर सरकार के आलोचकों को पहले ऐसे नामों से निशाना बनाया गया, उनमें से कुछ मांगों या विचारों को बाद में सरकार ने स्वीकार किया।
इससे साफ है कि कांग्रेस इस मुद्दे को केवल चिदंबरम की व्यक्तिगत प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा बना रही है।