ग्रेटर नोएडा/जेवर: दिल्ली-NCR में हुई तेज बारिश का असर जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी देखने को मिला। मंगलवार को भारी बारिश के बाद एयरपोर्ट के टर्मिनल और पार्किंग क्षेत्र को जोड़ने वाले हिस्से में कुछ समय के लिए पानी जमा हो गया। जलभराव के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद एयरपोर्ट की ड्रेनेज व्यवस्था और बारिश के पानी की निकासी को लेकर सवाल उठने लगे।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एयरपोर्ट परिसर के आसपास पानी जमा दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ यूजर्स ने मजाकिया अंदाज में इसे ‘एयरपोर्ट-कम-सीपोर्ट’ तक कह दिया। हालांकि, वायरल वीडियो के आधार पर पूरे एयरपोर्ट की व्यवस्था पर निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।
तेज बारिश के बाद कहां जमा हुआ पानी?
रिपोर्टों के मुताबिक, जलभराव मुख्य रूप से टर्मिनल और पार्किंग क्षेत्र के बीच बने फोरकोर्ट/पैदल मार्ग वाले हिस्से में देखा गया। यह वह क्षेत्र है जहां यात्रियों की आवाजाही होती है। भारी बारिश के बाद यहां पानी जमा होने से सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरें तेजी से शेयर होने लगीं।

यह घटना इसलिए भी चर्चा में आ गई क्योंकि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट हाल ही में शुरू हुआ है और इसे दिल्ली-NCR के बड़े एविएशन प्रोजेक्ट्स में गिना जा रहा है।
यात्रियों के लिए उड़ान सेवा प्रभावित हुई या नहीं?
जलभराव की तस्वीरों और वीडियो के बीच सबसे अहम बात यह रही कि एयरपोर्ट की फ्लाइट ऑपरेशन पर इसका बड़ा असर नहीं पड़ा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, जलभराव अस्थायी था और एयरपोर्ट टीम ने प्रभावित हिस्से से पानी हटाने की कार्रवाई की। उड़ानों का संचालन जारी रहा।
यानी सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो को देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि पूरा एयरपोर्ट बारिश में बंद हो गया था।
करोड़ों के प्रोजेक्ट पर उठने लगे सवाल
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का पहला चरण करीब ₹11,200 करोड़ की लागत वाला बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है। ऐसे में भारी बारिश के बाद सामने आए जलभराव के वीडियो ने एयरपोर्ट की ड्रेनेज क्षमता, जल निकासी और बारिश के दौरान इंफ्रास्ट्रक्चर की तैयारियों पर चर्चा तेज कर दी है।

यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर कम समय में हुई तेज बारिश के दौरान पानी जमा हो सकता है, तो आने वाले मानसून में इससे निपटने के लिए क्या अतिरिक्त इंतजाम किए जाएंगे।
हालांकि, सिर्फ इस घटना के आधार पर निर्माण गुणवत्ता खराब होने या भ्रष्टाचार का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। इसके लिए तकनीकी जांच और आधिकारिक रिपोर्ट की जरूरत होगी।
राजनीतिक बयानबाजी भी हुई तेज
जलभराव का वीडियो वायरल होने के बाद विपक्षी नेताओं और राजनीतिक दलों की ओर से भी सरकार और एयरपोर्ट प्रबंधन पर सवाल उठाए गए। आम आदमी पार्टी की ओर से एयरपोर्ट के निर्माण और जल निकासी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए गए।
ऐसे में अब मामला सिर्फ सोशल मीडिया की चर्चा तक सीमित नहीं रह गया है। सवाल यह है कि क्या एयरपोर्ट की ड्रेनेज व्यवस्था भारी बारिश के लिहाज से पर्याप्त है और क्या भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा नहीं आएगी?
क्या यह पहली बार हुआ?
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के सामने आया यह जलभराव इसलिए ज्यादा चर्चा में है क्योंकि यह एक नया और हाई-प्रोफाइल एयरपोर्ट प्रोजेक्ट है। शुरुआती दौर में ही बारिश के बाद पानी जमा होने की तस्वीरें सामने आने से इसकी मॉनसून तैयारी और ड्रेनेज सिस्टम पर सवाल स्वाभाविक रूप से उठे हैं।
हालांकि, बारिश की तीव्रता, जलभराव की अवधि, पानी कितनी तेजी से निकाला गया और ड्रेनेज सिस्टम की वास्तविक क्षमता जैसे तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखे बिना इसे सीधे निर्माण की खामी बताना जल्दबाजी होगी।
अब सबसे बड़ा सवाल क्या?
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि भविष्य में अगर इससे भी ज्यादा बारिश होती है तो एयरपोर्ट प्रशासन की तैयारी कितनी मजबूत है?
एयरपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सिर्फ खूबसूरत टर्मिनल और आधुनिक सुविधाएं ही पर्याप्त नहीं होतीं। बारिश के पानी की निकासी, ड्रेनेज नेटवर्क, जलभराव से बचाव और खराब मौसम में यात्रियों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
फिलहाल वायरल वीडियो ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की बारिश में तैयारियों को लेकर बहस जरूर छेड़ दी है। आने वाले दिनों में एयरपोर्ट प्रबंधन की ओर से इस जलभराव को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आती है या नहीं, इस पर भी नजर रहेगी।