हादसे में युवक की मौत के बाद आठ घंटे सड़क जाम करने का आरोप, तेलमर थाने में 41 लोग नामजद
बिहारशरीफ: नालंदा जिले के तेलमर थाना क्षेत्र के बौरीगंज गांव के समीप 30 अगस्त की देर शाम सड़क हादसे में युवक की मौत के बाद सड़क जाम और आगजनी के मामले में 41 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने से ग्रामीणों में आक्रोश है।
शनिवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण बिहारशरीफ स्थित कलेक्ट्रेट पहुंचे और एसपी हृदयकांत को आवेदन देकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा निर्दोष लोगों के नाम प्राथमिकी से हटाने की मांग की।
ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने मामले की पूरी जांच किए बिना कई ऐसे लोगों को भी नामजद कर दिया है, जो घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं थे। प्राथमिकी में नाम आने के बाद ग्रामीणों के बीच गिरफ्तारी का भय बना हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार, कई लोग गिरफ्तारी की आशंका के कारण गांव से बाहर चले गए हैं।
ग्रामीण राजू कुमार ने बताया कि 30 अगस्त की देर शाम बौरीगंज गांव के समीप ट्रक की चपेट में आने से रौशन कुमार की मौत हो गई थी। हादसे की सूचना मिलते ही मृतक के परिजन और बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंच गए।
ग्रामीणों के मुताबिक मृतक के दो छोटे बच्चे हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति भी कमजोर है। इसी को देखते हुए मुआवजे की मांग को लेकर ग्रामीणों ने शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया था।
ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर डीएसपी और एसडीओ भी पहुंचे थे। अधिकारियों की मौजूदगी में मृतक के परिजनों को 20 हजार रुपये का चेक दिया गया था। ग्रामीणों के अनुसार, उस दौरान अधिकारियों की ओर से आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया था।
अगले दिन प्राथमिकी दर्ज होने से बढ़ा आक्रोश
ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों के आश्वासन के बावजूद अगले ही दिन सड़क जाम और आगजनी के मामले में 41 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर दी गई। प्राथमिकी में नाम आने के बाद लोगों के बीच गिरफ्तारी को लेकर डर का माहौल है।
ग्रामीणों ने एसपी से दोबारा निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं रहने वाले लोगों को भी प्राथमिकी में नामजद किया गया है। उनका कहना है कि युवक की मौत के बाद परिवार को मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर वे सड़क पर बैठे थे और उनका उद्देश्य किसी प्रकार की अशांति फैलाना नहीं था।
पुलिस का दावा- करीब आठ घंटे बाधित रहा आवागमन
इधर, तेलमर थानाध्यक्ष चंद्रशेखर कुमार ने ग्रामीणों के आरोपों से अलग पुलिस का पक्ष रखते हुए बताया कि सालेपुर-करौटा मार्ग पर शव को सड़क पर रखकर आगजनी की गई थी। इस दौरान करीब आठ घंटे तक सड़क अवरुद्ध रही, जिससे आम लोगों को आवागमन में काफी परेशानी हुई।
थानाध्यक्ष के अनुसार, वरीय अधिकारियों की ओर से ग्रामीणों को समझाने और आवश्यक आश्वासन देने के बावजूद मुआवजे की मांग को लेकर सड़क जाम जारी रखा गया। उन्होंने बताया कि सरकारी कार्य में बाधा डालने, सड़क अवरुद्ध करने और आगजनी करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
फिलहाल ग्रामीणों ने एसपी हृदयकांत से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और निर्दोष लोगों को प्राथमिकी से बाहर करने की मांग की है। अब पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि प्राथमिकी में नामजद सभी लोगों की घटना में वास्तविक भूमिका थी या नहीं।