नालंदा। जिले में पिछले 48 घंटे से रुक-रुककर हो रही बारिश और तेज हवाओं ने मौसम का मिजाज बदल दिया है। रहुई प्रखंड क्षेत्र में भी बारिश का असर देखने को मिल रहा है। लगातार बारिश के कारण तापमान में गिरावट आई है, जिससे लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिली है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार नालंदा में 24 सितंबर को 21.5 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि 25 सितंबर को भी मध्यम बारिश का पूर्वानुमान है।
IMD ने बिहार के लिए 25 सितंबर को गरज-चमक और तेज हवा के साथ भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। 26 सितंबर को भी राज्य में भारी बारिश, गरज और बिजली चमकने की संभावना जताई गई है।
कच्ची सड़कों पर कीचड़, जनजीवन प्रभावित
बारिश के कारण गांव-मोहल्लों की कच्ची सड़कों पर कीचड़ जमा हो गया है। खराब मौसम के चलते सड़कों पर वाहनों की आवाजाही भी सामान्य दिनों की तुलना में कम रही। लगातार बारिश का असर दैनिक मजदूरों, छोटे दुकानदारों, सब्जी-फल विक्रेताओं और ठेले पर चाय-नाश्ता बेचने वाले लोगों के कामकाज पर भी पड़ा है।
नालंदा में पिछले दिनों हुई बारिश के दौरान बाजारों में भी सन्नाटा देखने को मिला था और तेज हवाओं से जनजीवन प्रभावित हुआ था।
तेज हवा से धान की फसल गिरने की चिंता
बारिश के साथ चल रही तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। रहुई प्रखंड के कई इलाकों में धान की फसल तैयार होने की अवस्था में है। किसानों को आशंका है कि तेज हवा के कारण पौधे गिर सकते हैं। फसल के गिरने के बाद खेत में पानी जमा रहने से दाने भरने और उत्पादन पर असर पड़ने की चिंता भी किसानों को सता रही है।
नालंदा में हाल की बारिश के दौरान हरनौत क्षेत्र में भी तेज हवाओं से तैयार हो रही धान की फसल के जमीन पर गिरने की बात सामने आई थी। कृषि विशेषज्ञों ने सब्जी के खेतों में जलजमाव नहीं होने देने की सलाह दी थी।
जलनिकासी पर नजर रखने की सलाह
मृदा वैज्ञानिक डॉ. उमेश नारायण के अनुसार, इस समय धान की फसल में बालियां निकलने और दाना भरने की अवस्था है। ऐसे समय में तेज हवा से पौधों के गिरने पर उत्पादन प्रभावित हो सकता है। उन्होंने किसानों को खेतों में जलनिकासी की स्थिति पर नजर रखने की सलाह दी है।
इससे पहले भी नालंदा के कई इलाकों में जलजमाव से धान की फसल प्रभावित होने की स्थिति सामने आ चुकी है। सितंबर की शुरुआत में सरमेरा के टाल क्षेत्र में गंगा के बैकवाटर के कारण 200 बीघे से अधिक धान की फसल जलमग्न होने की रिपोर्ट सामने आई थी।
वज्रपात को लेकर भी सावधानी जरूरी
मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए बारिश और आंधी के दौरान किसानों एवं ग्रामीणों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। गरज-चमक और वज्रपात की स्थिति में खेतों, पेड़ों के नीचे और खुले स्थानों पर जाने से बचने की सलाह दी जाती है।
फिलहाल जिले में बारिश का दौर जारी रहने का पूर्वानुमान है। ऐसे में किसानों की नजर मौसम के साथ-साथ खेतों में पानी की स्थिति और धान की फसल पर बनी हुई है।