प्रतिदिन 1180 रूपए टोल टैक्स देना बस मालिकों के लिए बड़ी चुनौती
Nalanda News: स्थानीय रूटों पर चलने वाली बसों से अधिक टोल वसूली के विरोध में मंगलवार को बस मालिकों का गुस्सा फूट पड़ा। पैठना टोल प्लाजा पर बस संचालकों ने चार घंटों तक चक्का जाम कर विरोध प्रदर्शन किया।
आंदोलन के कारण कुछ समय तक टोल प्लाजा के आसपास बसों की आवाजाही प्रभावित रही। इससे यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में परेशानी उठानी पड़ी।
बस मालिकों का आरोप है कि स्थानीय रूट पर कम दूरी तक संचालित होने वाली बसों से भी एक तरफ का 180 रुपये टोल शुल्क वसूला जा रहा है यानि एक दिन में तीन ट्रीप लगाने पर 1080 रूपए टोल चार्ज लगता है वहीं बीस किलोमीटर के दायरे में तीन व चार पहिया वाहनों का मासिक पास में कुल 360 रुपया लगता है।

संचालकों का कहना है कि स्थानीय बसों का परिचालन सीमित दूरी यानि करीब तीस किलोमीटर में होता है, बावजूद इसके लंबी दूरी की बसों की तरह अधिक शुल्क वसूले जाने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है।
बस परिचालन संघ के अध्यक्ष विनय कुमार ने बताया कि इस समस्या को लेकर दो महीने के अंदर डीएम साहिबा को दो बार आवेदन दिया गया लेकिन अभी तक इस समस्या का कोई समाधान नहीं हो पाया।
बता दें यह टोल प्लाजा आंध्रप्रदेश की छाबड़ा एसोसिएट्स के तहत काम कर रही है। जिसका एक वर्ष का कार्यकाल 6 दिसंबर 2026 को पूरा हो जाएगा।
वर्तमान में इस टोल प्लाजा का प्रतिदिन 14 लाख रुपए प्राप्त करने का लक्ष्य है लेकिन मात्र 8 लाख रुपए ही प्राप्त हो रहा है यानी 6 लाख रुपए प्रतिदिन घाटे के तौर पर चल रहा है।

कई बस संचालक ने बताया कि टोल शुल्क में राहत और स्थानीय बसों के लिए अलग व्यवस्था की मांग को लेकर कई बार टोल प्लाजा संबंधित कर्मियों से भी शिकायत की गई। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने पर बस मालिकों ने आंदोलन का रास्ता अपनाया।
उन्होंने यह भी बताया कि बख्तियारपुर से ट्रेनों की संख्या ज्यादा हो जाने के कारण पैसेंजर बसों को काफी परेशानियां हो गई है। इस हालत में प्रतिदिन 1180 रूपए टोल टैक्स देना बस मालिकों के लिए एक बड़ी चुनौती है।
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सर मेरा टोल प्लाजा पर जिस तरह प्रति ट्रिप पर 80 रूपए लिया जा रहा है। उसी तरह स्थानीय रूट पर चलने वाली बसों से टोल शुल्क लिया जाए ताकि हर दिन टोल वसूली को लेकर विवाद की स्थिति नहीं बने।
टोल प्लाजा पर लॉ एंड ऑर्डर कायम करने के लिए सदर डीएसपी 2 राकेश कुमार रंजन, रहुई, भागनबिगहा, वेना, चेरो ओपी थानाध्यक्ष, रहुई अंचलाधिकारी अपने दल बल के साथ मौजूद रहे।

चक्का जाम के दौरान टोल प्लाजा के आसपास बसों की कतार लग गई। यात्रियों को वाहन नहीं मिलने से परेशानी हुई। बस संचालकों ने चेतावनी दी कि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर आरके त्रिपाठी ने बताया पूर्व से ही स्थानीय बस मालिकों के वाहनों से 360 की जगह 180 रुपए ही लिया जा रहा है, जो कि पहले से ही पचास प्रतिशत है।
उन्होंने बताया कि तीन व चार पहिया वाहनों को बीस किलोमीटर के परिधि में ही 360 रुपया का पास मासिक निर्गत किया जाता है, जो अभी उनकी मांग है। फिलहाल इस मामले को लेकर कुछ भी कहना संभव नहीं है।
एडीटीओ शारदा नंद राजू ने बताया कि बस मालिकों की समस्या काफी गंभीर है जो की आर्थिक रूप से संभव भी नहीं है। प्रतिदिन ग्यारह रुपए शुल्क देना आर्थिक रूप से बोझ साबित होता है। फिलहाल इस मामले समाधान को लेकर एक हफ्ते का समय लिया गया है।

