मुंगेर: स्वास्थ्य विभाग में पदभार आवंटन को लेकर मुंगेर में एक नई प्रशासनिक व्यवस्था सामने आई है। सदर अस्पताल में पदस्थापित हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. निरंजन कुमार को जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। विभाग की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी कर उन्हें जिम्मेदारी संभालने का निर्देश दिया गया है। इस फैसले के बाद स्वास्थ्य विभाग के भीतर विशेषज्ञता और दायित्व के तालमेल को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
डेंगू, मलेरिया और कालाजार नियंत्रण की जिम्मेदारी
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी का काम मच्छरों और अन्य वाहकों से फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम, निगरानी और नियंत्रण से जुड़ा होता है। डेंगू, मलेरिया और कालाजार जैसी बीमारियों के मामलों पर नजर रखना, संबंधित गतिविधियों का समन्वय करना और रोकथाम संबंधी कार्यक्रमों को आगे बढ़ाना इस व्यवस्था का हिस्सा है। अब इस जिम्मेदारी का अतिरिक्त प्रभार हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. निरंजन कुमार को दिया गया है।
इस पद की जिम्मेदारी आम तौर पर बीमारी की निगरानी, विभागीय रिपोर्टिंग और रोकथाम से जुड़े कार्यक्रमों के संचालन के साथ जुड़ी रहती है। ऐसे में पदभार संभालने वाले अधिकारी को संबंधित स्वास्थ्य इकाइयों और फील्ड स्तर के कर्मियों के साथ समन्वय करना होता है। विभागीय अधिसूचना में डॉ. निरंजन कुमार को अतिरिक्त प्रभार ग्रहण करने का निर्देश दिया गया है।
2023 से अलग-अलग अधिकारियों के पास रहा प्रभार
उपलब्ध जानकारी के अनुसार पूर्व जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. अरविंद कुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद वर्ष 2023 से यह पद यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. ध्रुव कुमार के प्रभार में था। अगस्त 2026 में डॉ. ध्रुव कुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद सिविल सर्जन डॉ. राजू ने अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. रमन कुमार को यह जिम्मेदारी सौंपी थी। अब विभागीय स्तर से डॉ. निरंजन कुमार को नया अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

इस तरह पिछले कुछ वर्षों में नियमित पदाधिकारी के अभाव में यह जिम्मेदारी अलग-अलग अधिकारियों को अतिरिक्त रूप से दी जाती रही है। वर्तमान आदेश भी स्थायी नियुक्ति के बजाय अस्थायी व्यवस्था के तौर पर बताया गया है। नियमित पदाधिकारी की नियुक्ति होने तक डॉ. निरंजन कुमार अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे।
अस्थायी व्यवस्था, नियमित नियुक्ति तक संभालेंगे काम
सिविल सर्जन डॉ. राजू ने विभागीय अधिसूचना की पुष्टि करते हुए बताया कि आदेश के आलोक में डॉ. निरंजन कुमार को जिम्मेदारी ग्रहण करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था नियमित पदाधिकारी की नियुक्ति होने तक प्रभावी रहेगी। यानी अतिरिक्त प्रभार स्थायी पदस्थापन नहीं है।
विशेषज्ञता और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर चर्चा
हड्डी रोग विशेषज्ञ को वेक्टर जनित रोग नियंत्रण का प्रभार दिए जाने के बाद विभागीय व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। दोनों क्षेत्रों की चिकित्सकीय विशेषज्ञता अलग-अलग है। हालांकि, अतिरिक्त प्रभार में अधिकारी का काम कई बार प्रशासनिक समन्वय और विभागीय गतिविधियों की निगरानी से जुड़ा होता है। यह देखना होगा कि नई जिम्मेदारी के साथ डॉ. निरंजन कुमार जिले में वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम और नियंत्रण से जुड़े कार्यक्रमों को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।
मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए समय पर निगरानी, जागरूकता, प्रभावित इलाकों की पहचान और संबंधित स्वास्थ्य इकाइयों के बीच समन्वय जरूरी माना जाता है। जिले में यह काम नियमित रूप से चलता रहे, इसके लिए पदाधिकारी की उपलब्धता और स्पष्ट जवाबदेही महत्वपूर्ण है।

नियमित पदाधिकारी की नियुक्ति पर रहेगी नजर
फिलहाल डॉ. निरंजन कुमार को अतिरिक्त प्रभार सौंपे जाने के साथ विभाग ने अंतरिम व्यवस्था की है। नियमित पदाधिकारी की नियुक्ति कब होगी, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। स्वास्थ्य विभाग के सामने चुनौती यह होगी कि पद रिक्त रहने या अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था के बावजूद डेंगू, मलेरिया और कालाजार जैसी बीमारियों की निगरानी तथा रोकथाम गतिविधियों में कोई ढिलाई न आए।
