कोलकाता में करोड़ों रुपये के कथित फर्जी दुर्गा पूजा पास घोटाले की जांच अब पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन के परिवार और उनसे जुड़ी संस्थाओं के वित्तीय लेन-देन तक पहुंच गई है। पुलिस उनकी पत्नी मधुचंदा सेन और बेटी अवेरी सेन से दोबारा पूछताछ कर सकती है। जांच एजेंसियों को पति-पत्नी के बयानों में ‘मास आर्ट’ के संचालन को लेकर विरोधाभास मिला है, वहीं बेटी से जुड़ी दो संस्थाओं के बैंक खातों में बार-बार हुए पैसों के हस्तांतरण पर भी सवाल उठे हैं।
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन की मुश्किलें कथित फर्जी दुर्गा पूजा पास घोटाले में लगातार बढ़ती दिखाई दे रही हैं। करोड़ों रुपये के इस मामले की जांच कर रही कोलकाता पुलिस अब उनकी पत्नी और बेटी से एक बार फिर पूछताछ करने पर विचार कर रही है। दोनों से पहले भी कोलकाता पुलिस मुख्यालय लालबाजार में पूछताछ की जा चुकी है, लेकिन जांचकर्ताओं को उनके जवाब कई अहम सवालों के लिए पर्याप्त नहीं लगे।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि मधुचंदा सेन और उनकी बेटी अवेरी सेन से दोबारा पूछताछ की वजहें अलग-अलग हैं। पत्नी से पूछताछ का मुख्य आधार पूर्व मंत्री और उनके बीच ‘मास आर्ट’ नामक संस्था के संचालन और निर्णय लेने की भूमिका को लेकर सामने आए विरोधाभासी बयान हैं। वहीं, बेटी से जुड़े मामले में दो अन्य संस्थाओं के बैंक खातों में हुए वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की जा रही है।
‘मास आर्ट’ के संचालन पर पति-पत्नी के बयान अलग-अलग
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू ‘मास आर्ट’ नामक संस्था है। पुलिस की जांच के अनुसार, कथित तौर पर इसी संस्था के माध्यम से फर्जी दुर्गा पूजा पास बेचे गए थे। अब जांचकर्ता यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि संस्था के वास्तविक संचालन और फैसले लेने की जिम्मेदारी किसके पास थी।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन ने पूछताछ के दौरान कहा था कि ‘मास आर्ट’ के रोजमर्रा के कामकाज में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। दूसरी ओर, उनकी पत्नी मधुचंदा सेन ने कथित तौर पर बताया कि संस्था आधिकारिक रूप से उनके नाम पर पंजीकृत थी, लेकिन निर्णय लेने का अधिकार उनके पास नहीं था। उनके मुताबिक, बड़े फैसले उनके पति ही लेते थे।
दोनों के बयानों में यह अंतर जांचकर्ताओं के लिए अहम हो गया है। एक ओर संस्था के रोजमर्रा के संचालन से दूरी की बात कही गई, तो दूसरी ओर उसके नाम पर पंजीकरण होने के बावजूद निर्णय लेने की जिम्मेदारी किसी दूसरे व्यक्ति के पास होने का दावा सामने आया। पुलिस अब यह स्पष्ट करना चाहती है कि संस्था का वास्तविक नियंत्रण किसके हाथ में था और कथित पास बिक्री की प्रक्रिया में किसकी क्या भूमिका थी।
ध्रुवज्योति बसु का नाम भी जांच के केंद्र में
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इंद्रनील सेन और उनकी पत्नी दोनों ने ‘मास आर्ट’ की परिचालन गतिविधियों की जिम्मेदारी ध्रुवज्योति बसु नामक व्यक्ति पर बताई है। जांचकर्ताओं का मानना है कि संस्था के वास्तविक कामकाज को समझने के लिए सेन दंपती और बसु की भूमिकाओं के बीच संबंध स्पष्ट करना जरूरी है।
इसी वजह से मधुचंदा सेन से दोबारा पूछताछ किए जाने की संभावना है। पुलिस उनके पहले दिए गए बयान और पूर्व मंत्री के बयान का मिलान कर यह जानना चाहती है कि संस्था के संचालन पर वास्तविक नियंत्रण किसका था। फिलहाल यह जांच का विषय है और किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

बेटी अवेरी सेन से पूछे जाएंगे पैसों के लेन-देन पर सवाल
पूर्व मंत्री की बेटी अवेरी सेन से दोबारा पूछताछ की तैयारी के पीछे वित्तीय लेन-देन का मामला है। पुलिस की जांच में ‘आईस्केप’ (iScape) और ‘मायरा’ (Mayra) नामक दो संस्थाओं के बैंक खातों में बार-बार रकम ट्रांसफर किए जाने की जानकारी सामने आने की बात कही गई है। ये दोनों संस्थाएं कथित तौर पर अवेरी सेन के नियंत्रण में थीं।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अवेरी सेन से 2 नवंबर को लालबाजार में पूछताछ की गई थी। हालांकि, उस दौरान वह कथित तौर पर इन वित्तीय लेन-देन का संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सकीं। जांचकर्ता यह जानना चाहते हैं कि इन खातों में रकम क्यों और किस उद्देश्य से भेजी गई, इन संस्थाओं की वास्तविक गतिविधियां क्या थीं और कथित फर्जी पास घोटाले से उनका कोई संबंध था या नहीं।
इस मामले में पुलिस की जांच अब केवल पासों की कथित बिक्री तक सीमित नहीं दिख रही है। संबंधित संस्थाओं के संचालन, उनके बीच वित्तीय लेन-देन और उन लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है, जिनका नाम पूछताछ के दौरान सामने आया है।
पुलिस हिरासत में हैं पूर्व मंत्री, 10 नवंबर को फिर अदालत में पेशी
गायक से राजनेता बने इंद्रनील सेन पश्चिम बंगाल सरकार में पर्यटन मंत्री और सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के राज्य मंत्री रह चुके हैं। फिलहाल वह पुलिस हिरासत में हैं। उन्हें 10 नवंबर को फिर से शहर की अदालत में पेश किया जाना है।

कथित फर्जी दुर्गा पूजा पास घोटाले की जांच कोलकाता पुलिस के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी कर रहा है। दोनों एजेंसियां मामले से जुड़े वित्तीय लेन-देन और ‘मास आर्ट’ से जुड़े लोगों की कथित भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।
दुर्गा पूजा के नाम पर कथित फर्जी पास बिक्री की जांच
दुर्गा पूजा पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा सांस्कृतिक और धार्मिक उत्सव है। इस उत्सव को यूनेस्को ने वर्ष 2021 में मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया था। ऐसे आयोजन से जुड़े कथित फर्जी पास घोटाले ने उत्सव के नाम पर होने वाली गतिविधियों की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े किए हैं।
फिलहाल जांच का महत्वपूर्ण सवाल यही है कि ‘मास आर्ट’ का वास्तविक संचालन कौन कर रहा था, कथित पास बिक्री से प्राप्त रकम कहां गई और अवेरी सेन से जुड़ी बताई जा रही संस्थाओं के खातों में हुए हस्तांतरण का इस पूरे मामले से क्या संबंध है।
पत्नी और बेटी से संभावित दूसरी पूछताछ इन सवालों के जवाब तलाशने की दिशा में अहम हो सकती है। हालांकि, अभी तक पुलिस की जांच और सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारियों को ही आधार बनाया गया है। मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

