मुंगेर: बाढ़ की वजह से घर छोड़कर राहत स्थल पर पहुंचे लोगों की मुश्किलें कम होने के बजाय बढ़ती नजर आ रही हैं। बबुआ घाट पहुंचे बाढ़ पीड़ितों के लिए जिला स्कूल में शुरू किए गए सामुदायिक किचन में भोजन की गुणवत्ता को लेकर रविवार को ग्रामीणों ने शिकायत की। जाफरनगर पंचायत के सीताचरण गांव के लोगों ने परोसा गया खाना खाने से इनकार कर दिया।
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें बदबूदार चावल और बासी सब्जी परोसी जा रही थी। भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायत सामने आने के बाद सामुदायिक किचन की व्यवस्था और निगरानी पर भी सवाल उठने लगे हैं।
राहत लेने पहुंचे लोगों ने थाली लौटाई
बताया गया कि बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरेंद्र बाबू के पार्क से जिला स्कूल स्थित सामुदायिक किचन तक लाया गया था। बाढ़ के कारण घर-बार छोड़ चुके ग्रामीणों को उम्मीद थी कि राहत स्थल पर कम से कम भोजन की व्यवस्था ठीक मिलेगी।
लेकिन खाना परोसे जाने के बाद ग्रामीणों ने चावल से बदबू आने की शिकायत की। उनका कहना था कि सब्जी भी ताजी नहीं लग रही थी। इसके बाद कई ग्रामीणों ने भोजन करने से साफ इनकार कर दिया।
ग्रामीण नागों सिंह, विनोद कुमार और राधेश्याम ने भोजन की गुणवत्ता को लेकर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि बाढ़ के कारण पहले ही परिवारों की जिंदगी मुश्किल हो गई है और राहत स्थल पर मिलने वाले भोजन को लेकर भी परेशानी सामने आ रही है।
बाढ़ ने छीना घर, भोजन ने बढ़ाई परेशानी
बाढ़ प्रभावित परिवार फिलहाल अपने घरों से दूर राहत स्थलों पर रहने को मजबूर हैं। ऐसे में सामुदायिक किचन से मिलने वाला भोजन उनके लिए महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों का कहना है कि जब सरकारी राहत व्यवस्था के तहत भोजन दिया जा रहा है तो उसकी गुणवत्ता का ध्यान रखा जाना चाहिए।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि भोजन खाने योग्य नहीं था तो लोगों को सामुदायिक किचन तक बुलाने का क्या फायदा है। उनका कहना था कि आपदा की स्थिति में प्रशासन से राहत के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं की बेहतर व्यवस्था की उम्मीद रहती है।
शुरू होने के अगले दिन ही उठी शिकायत
जिला स्कूल में सामुदायिक किचन शनिवार को देर से शुरू हुआ था। इसके अगले ही दिन भोजन की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों की शिकायत सामने आने से व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
अब यह सवाल भी उठ रहा है कि सामुदायिक किचन में तैयार होने वाले भोजन की गुणवत्ता की नियमित निगरानी कौन कर रहा है। बाढ़ जैसी आपदा के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के लिए खाना तैयार किया जा रहा है, ऐसे में भोजन की जांच और साफ-सफाई की व्यवस्था महत्वपूर्ण हो जाती है।
भोजन की गुणवत्ता पर प्रशासन क्या करेगा?
ग्रामीणों की शिकायत के बाद अब प्रशासन की कार्रवाई पर नजर है। शिकायत सही है या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। यदि भोजन की गुणवत्ता में लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करने का सवाल भी उठेगा।
इस मामले में आपदा प्रभारी कमल किशोर ने कहा कि मामले की जानकारी ली जा रही है। उन्होंने कहा कि पता करने के बाद ही इस संबंध में कुछ कहा जा सकेगा।
फिलहाल ग्रामीणों की शिकायत के बाद सामुदायिक किचन की व्यवस्था जांच के दायरे में है। बाढ़ से प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान और भोजन उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है।
ऐसे में अब देखना होगा कि शिकायत की जांच के बाद प्रशासन भोजन की गुणवत्ता को लेकर क्या कदम उठाता है।