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Home - स्वास्थ्य - Moderna की व्यक्तिगत mRNA कैंसर वैक्सीन से मेलेनोमा लौटने का जोखिम 42% कम

Moderna की व्यक्तिगत mRNA कैंसर वैक्सीन से मेलेनोमा लौटने का जोखिम 42% कम

Last updated: अक्टूबर 23, 2026 12:07 अपराह्न
By : Dinman News Network
Published on : 4 दिन पहले
Moderna mRNA कैंसर वैक्सीन: मेलेनोमा जोखिम में कमी
Moderna mRNA कैंसर वैक्सीन: मेलेनोमा जोखिम में कमी
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नई दिल्ली: कैंसर उपचार के क्षेत्र में व्यक्तिगत mRNA वैक्सीन को लेकर नई उम्मीद जगी है। Moderna और Merck की प्रयोगात्मक वैक्सीन intismeran autogene को इम्यूनोथेरेपी दवा Keytruda के साथ देने पर उच्च जोखिम वाले मेलेनोमा मरीजों में सर्जरी के बाद कैंसर लौटने या मृत्यु का संयुक्त जोखिम केवल Keytruda लेने वालों की तुलना में 42% कम पाया गया।

यह निष्कर्ष 1,100 से अधिक मरीजों को शामिल करने वाले चरण-3 क्लिनिकल ट्रायल से आया है। हालांकि, वैक्सीन अभी प्रयोगात्मक है और व्यापक उपयोग से पहले नियामकीय मंजूरी की आवश्यकता होगी।

अध्ययन में क्या सामने आया?

अध्ययन में उन मरीजों को शामिल किया गया था जिनका उच्च जोखिम वाला मेलेनोमा शल्य चिकित्सा से हटाया जा चुका था, लेकिन बीमारी के दोबारा लौटने का खतरा बना हुआ था। सभी प्रतिभागियों को मानक उपचार के तौर पर Keytruda दिया गया। इसके बाद कुछ मरीजों को व्यक्तिगत mRNA वैक्सीन दी गई, जबकि तुलना समूह को प्लेसीबो मिला। दो साल बाद वैक्सीन और Keytruda पाने वाले समूह में लगभग 82% मरीजों में कैंसर दोबारा नहीं लौटा, जबकि केवल Keytruda लेने वाले समूह में यह अनुपात करीब 70% था।

कंपनियों के जारी आंकड़ों के अनुसार, संयोजन उपचार ने कैंसर के फैलने या मृत्यु के जोखिम में भी कमी दिखाई। विशेषज्ञ इसे व्यक्तिगत कैंसर इम्यूनोथेरेपी के विकास में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं। फिर भी मरीजों की दीर्घकालिक निगरानी जारी है और समग्र जीवित रहने पर उपचार का प्रभाव समझने के लिए आगे के परिणाम जरूरी होंगे।

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व्यक्तिगत mRNA वैक्सीन कैसे काम करती है?

यह वैक्सीन सामान्य निवारक टीकों से अलग है। इसका उद्देश्य कैंसर होने से पहले उसे रोकना नहीं, बल्कि सर्जरी से ट्यूमर हटाए जाने के बाद बीमारी के दोबारा लौटने की संभावना कम करना है। डॉक्टर मरीज के ट्यूमर के नमूने का आनुवंशिक विश्लेषण करते हैं और उसमें मौजूद खास बदलावों की पहचान करते हैं। इन्हीं बदलावों से बनने वाले असामान्य प्रोटीन, जिन्हें नियोएंटीजन कहा जाता है, प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर कोशिकाओं की पहचान कराने में मदद कर सकते हैं।

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इसके बाद मरीज के ट्यूमर के अनुरूप वैक्सीन तैयार की जाती है। इसमें मौजूद mRNA कोशिकाओं को चुने हुए ट्यूमर-संबंधी संकेतों के बारे में निर्देश देता है, ताकि प्रतिरक्षा प्रणाली उन संकेतों को पहचानना सीख सके और कैंसर कोशिकाएं दोबारा उभरने पर उन पर हमला कर सके। क्योंकि हर व्यक्ति के ट्यूमर में बदलाव अलग हो सकते हैं, इसलिए वैक्सीन भी हर मरीज के लिए अनुकूलित होती है।

Keytruda के साथ संयोजन क्यों?

Keytruda एक स्वीकृत इम्यूनोथेरेपी दवा है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली की कैंसर से लड़ने की क्षमता को बढ़ाने में मदद करती है। व्यक्तिगत वैक्सीन प्रतिरक्षा प्रणाली को मरीज के ट्यूमर से जुड़े खास लक्ष्यों की पहचान कराने की कोशिश करती है, जबकि Keytruda प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पर लगी कुछ जैविक रोक को हटाने में मदद करता है। शोधकर्ताओं की उम्मीद है कि दोनों का संयोजन कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और उन पर हमला करने की क्षमता को मजबूत कर सकता है।

हालांकि, यह उपचार हर प्रकार के कैंसर के लिए समान रूप से प्रभावी होगा, ऐसा अभी नहीं कहा जा सकता। इस अध्ययन के परिणाम मुख्य रूप से उच्च जोखिम वाले मेलेनोमा मरीजों से संबंधित हैं और अन्य कैंसरों में उपयोग के लिए अलग परीक्षणों की जरूरत होगी।

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दुष्प्रभाव और मरीजों के लिए सावधानी

रिपोर्ट किए गए दुष्प्रभावों में इंजेक्शन वाली जगह दर्द, थकान, ठंड लगना और mRNA टीकों के बाद देखी जाने वाली कुछ सामान्य प्रतिक्रियाएं शामिल थीं। प्रत्येक मरीज की स्थिति, अन्य उपचारों और संभावित जोखिमों का मूल्यांकन विशेषज्ञ चिकित्सक को करना चाहिए। परीक्षण में दिखाई दिए परिणामों के आधार पर मरीजों को अपना मौजूदा उपचार रोकना या बदलना नहीं चाहिए।

यह वैक्सीन अभी नियमित रूप से उपलब्ध स्वीकृत उपचार नहीं है। Moderna और Merck नियामकीय एजेंसियों के साथ आगे की प्रक्रिया पर चर्चा कर रहे हैं। मंजूरी मिलने का समय, संभावित लागत और अलग-अलग स्वास्थ्य प्रणालियों में उपलब्धता अभी स्पष्ट नहीं है। व्यक्तिगत रूप से तैयार होने के कारण इसके निर्माण में ट्यूमर का विश्लेषण और वैक्सीन तैयार करने की प्रक्रिया शामिल होती है, जिसमें कई सप्ताह लग सकते हैं।

क्या यह अन्य कैंसरों में भी उपयोगी हो सकती है?

व्यक्तिगत mRNA उपचारों पर अन्य कैंसरों के लिए भी शोध चल रहा है। वैज्ञानिक यह जांच रहे हैं कि क्या मरीज के ट्यूमर की विशिष्ट आनुवंशिक विशेषताओं के आधार पर वैक्सीन तैयार करने का तरीका फेफड़े, गुर्दे, मूत्राशय और कुछ अन्य कैंसरों में मदद कर सकता है। लेकिन हर कैंसर की जीवविज्ञान, प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया और उपचार की जरूरतें अलग होती हैं, इसलिए मेलेनोमा में मिले परिणामों को सीधे अन्य रोगों पर लागू नहीं किया जा सकता।

कैंसर उपचार में संभावित नया अध्याय

इस चरण-3 अध्ययन के परिणाम व्यक्तिगत कैंसर उपचार के लिए उत्साहजनक हैं, क्योंकि इनमें मानक इम्यूनोथेरेपी के साथ ट्यूमर के अनुरूप तैयार की गई वैक्सीन से बेहतर परिणाम दिखाई दिए। फिर भी वैज्ञानिक मूल्यांकन के लिए दीर्घकालिक निगरानी, विस्तृत परिणामों की समीक्षा, सुरक्षा संबंधी जानकारी और नियामकीय आकलन आवश्यक हैं।

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मरीजों और परिवारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस शोध को संभावित प्रगति के रूप में देखा जाए, न कि कैंसर के निश्चित इलाज के रूप में। मेलेनोमा के उपचार, फॉलो-अप और किसी क्लिनिकल ट्रायल में भाग लेने के बारे में निर्णय ऑन्कोलॉजिस्ट की सलाह और मरीज की व्यक्तिगत चिकित्सकीय स्थिति के आधार पर ही लेने चाहिए।

रिपोर्ट: Dinman News Network

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