भारतीय स्क्वैश खिलाड़ी अनाहत सिंह ने अपने करियर में एक अहम उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार PSA Gold-स्तर के टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में जगह बना ली है। कैलिफोर्निया के रेडवुड सिटी में खेले जा रहे सिलिकॉन वैली ओपन 2026 के क्वार्टरफाइनल में 18 वर्षीय अनाहत ने मिस्र की सलमा हानी को पांच गेम तक चले मुकाबले में 3-2 से हराया। मुकाबले में एक समय अनाहत 1-2 से पीछे थीं, लेकिन उन्होंने शानदार वापसी करते हुए अगले दोनों गेम जीत लिए।
यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि इससे पहले अनाहत ने टूर्नामेंट में आठ बार की विश्व चैंपियन और विश्व रैंकिंग में तीसरे स्थान पर रही नूर एल शेरबिनी को हराकर सबका ध्यान खींचा था। लगातार दो मजबूत प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ जीत ने अंतरराष्ट्रीय स्क्वैश सर्किट पर उनकी बढ़ती क्षमता और दबाव में मुकाबला पलटने की योग्यता को रेखांकित किया है।
42 मिनट के मुकाबले में अनाहत की दमदार वापसी
सलमा हानी के खिलाफ क्वार्टरफाइनल लगभग 42 मिनट तक चला। मिस्र की खिलाड़ी ने शुरुआत में बेहतर लय हासिल की और पहला गेम 11-4 से अपने नाम किया। अनाहत ने दूसरे गेम में वापसी करते हुए 11-8 से जीत दर्ज की और मुकाबले को बराबरी पर ला दिया। हालांकि, हानी ने तीसरे गेम में फिर दबदबा बनाया और 11-4 से जीतकर 2-1 की बढ़त हासिल कर ली।
इस स्थिति में अनाहत के सामने मुकाबले से बाहर होने का खतरा था, लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने चौथे गेम में अपना खेल पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने तेज शुरुआत की, रैलियों पर नियंत्रण रखा और हानी को केवल दो अंक लेने दिए। 11-2 से चौथा गेम जीतकर अनाहत ने स्कोर 2-2 कर दिया। निर्णायक पांचवें गेम में भी उन्होंने यही लय बनाए रखी और 11-5 से जीत हासिल कर सेमीफाइनल का टिकट पक्का कर लिया।

पांच गेम के इस मुकाबले में वापसी की अहमियत केवल स्कोर तक सीमित नहीं थी। शुरुआती और तीसरे गेम में पिछड़ने के बाद अनाहत ने धैर्य बनाए रखा, गलतियों को कम किया और निर्णायक चरण में आक्रामकता बढ़ाई। उच्च स्तर के स्क्वैश में लंबे रैली, तेज बदलाव और लगातार निर्णय लेने की जरूरत होती है। ऐसे मुकाबले में वापसी करना खिलाड़ी की तकनीक के साथ-साथ मानसिक मजबूती की भी परीक्षा है।
PSA Gold सेमीफाइनल तक पहुंचने वाली पहली बार की उपलब्धि
इस जीत के साथ अनाहत पहली बार किसी PSA Gold-स्तर के टूर्नामेंट के अंतिम चार में पहुंची हैं। PSA यानी Professional Squash Association पेशेवर स्क्वैश टूर का संचालन करती है। Gold-स्तर के आयोजन में दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों के बीच मुकाबले होते हैं, इसलिए इस स्तर पर सेमीफाइनल में पहुंचना किसी भी खिलाड़ी के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जाती है।
अनाहत पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण नतीजे दे चुकी हैं। सितंबर में लंदन स्क्वैश क्लासिक में उन्होंने क्वार्टरफाइनल तक पहुंचकर अपनी क्षमता दिखाई थी। अब सिलिकॉन वैली ओपन में उन्होंने उस प्रदर्शन से आगे बढ़ते हुए पहली बार Gold-स्तर के टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में जगह बनाई है। यह उनके सीनियर पेशेवर करियर में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है।
टूर्नामेंट में उनका सफर पहले दौर से ही मजबूत रहा। उन्होंने मिस्र की नूर अबुलमाकरिम को सीधे गेमों में हराकर शुरुआत की। इसके बाद उनका सामना नूर एल शेरबिनी से हुआ, जो आठ बार की विश्व चैंपियन हैं। अनाहत ने उस मुकाबले में 11-8, 11-8, 11-7 से जीत दर्ज की। इसके बाद सलमा हानी के खिलाफ पांच गेम की चुनौती पार करना उनके अभियान को और खास बनाता है।

सेमीफाइनल में सिवासंगरी सुब्रमण्यम से मुकाबला
सेमीफाइनल में अनाहत का सामना मलेशिया की सिवासंगरी सुब्रमण्यम से होना है, जो विश्व रैंकिंग में चौथे स्थान पर हैं। सिवासंगरी ने क्वार्टरफाइनल में अपनी हमवतन रेचल अर्नोल्ड को सीधे गेमों में हराकर अंतिम चार में जगह बनाई। इस तरह अनाहत के सामने एक बार फिर शीर्ष स्तर की प्रतिद्वंद्वी होगी और फाइनल में पहुंचने के लिए उन्हें एक और कठिन मुकाबला खेलना होगा।
इस मुकाबले में एशियाई खेल 2026 की महिला एकल स्क्वैश फाइनल की याद भी लौटेगी। उस फाइनल में सिवासंगरी ने अनाहत को हराकर स्वर्ण पदक जीता था, जबकि भारतीय खिलाड़ी को रजत पदक मिला। अनाहत एशियाई खेलों में स्क्वैश महिला एकल फाइनल तक पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं। आगामी सेमीफाइनल उन्हें उसी प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ एक और अवसर देगा, हालांकि पिछले परिणाम से भविष्य के मैच का नतीजा तय नहीं माना जा सकता।
भारतीय स्क्वैश के लिए क्यों अहम है यह प्रदर्शन?
अनाहत की प्रगति ऐसे समय में सामने आई है जब भारतीय स्क्वैश खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। जूनियर स्तर पर सफलता से सीनियर पेशेवर टूर में निरंतर प्रदर्शन तक पहुंचना आसान नहीं होता। यहां खिलाड़ियों को अनुभवी प्रतिद्वंद्वियों, अलग-अलग खेल शैलियों और मैच के दौरान तेजी से रणनीति बदलने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
अनाहत का मौजूदा अभियान दिखाता है कि वह केवल एक अच्छे नतीजे पर निर्भर नहीं हैं। नूर एल शेरबिनी के खिलाफ सीधे गेमों की जीत और सलमा हानी के खिलाफ पिछड़ने के बाद वापसी, दोनों अलग तरह की चुनौतियां थीं। पहले मुकाबले में उन्हें शुरुआत से ही लगातार अच्छा प्रदर्शन करना पड़ा, जबकि दूसरे में दबाव के बीच धैर्य और रणनीतिक बदलाव की जरूरत थी। दोनों स्थितियों में जीत हासिल करना उनके अभियान की सबसे सकारात्मक बात है।

हालांकि, एक टूर्नामेंट का प्रदर्शन किसी खिलाड़ी के पूरे करियर या भविष्य की रैंकिंग का अंतिम पैमाना नहीं होता। आगे की निरंतरता, फिटनेस, प्रतिस्पर्धी अनुभव और शीर्ष खिलाड़ियों के खिलाफ नियमित नतीजे महत्वपूर्ण रहेंगे। फिर भी, PSA Gold सेमीफाइनल तक पहुंचना अनाहत के लिए ठोस उपलब्धि है और भारतीय स्क्वैश के प्रशंसकों को उनके अगले मुकाबले का इंतजार रहेगा।
अब फाइनल की ओर एक और चुनौती
सलमा हानी पर जीत के बाद अनाहत के सामने अब सिवासंगरी सुब्रमण्यम की चुनौती है। सेमीफाइनल में पहुंचना अपने आप में करियर का नया अध्याय है, लेकिन फाइनल तक पहुंचने के लिए उन्हें फिर से उच्च स्तर का प्रदर्शन करना होगा। एशियाई खेलों के फाइनल की प्रतिद्वंद्विता इस मुकाबले में अतिरिक्त दिलचस्पी जोड़ती है, पर कोर्ट पर नतीजा दोनों खिलाड़ियों के उस दिन के प्रदर्शन से तय होगा।
सिलिकॉन वैली ओपन में अनाहत की अब तक की यात्रा ने एक बात स्पष्ट की है: कठिन स्थिति में भी मुकाबले में बने रहने की उनकी क्षमता लगातार विकसित हो रही है। पांच गेम के क्वार्टरफाइनल में वापसी कर पहली बार PSA Gold सेमीफाइनल में पहुंचना उनके लिए महत्वपूर्ण व्यक्तिगत उपलब्धि है। अब उनकी नजरें अगले मुकाबले पर होंगी, जहां जीत उन्हें टूर्नामेंट के फाइनल के करीब ले जाएगी।
