मिथिलांचल की वर्षों से बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से शुरू करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। दरभंगा के रैयाम और मधुबनी के सकरी स्थित बंद चीनी मिल परिसरों में नई सहकारी चीनी मिलों और गन्ना उपोत्पाद (बाय-प्रोडक्ट) आधारित उद्योगों की स्थापना के लिए परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इस निर्णय का स्वागत करते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने इसे मिथिलांचल के औद्योगिक विकास की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताया है।
किसानों और युवाओं को होगा सीधा लाभ
संजय सरावगी ने कहा कि नई सहकारी चीनी मिलों की स्थापना से गन्ना किसानों को अपनी फसल के लिए बेहतर बाजार मिलेगा। साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। उनका कहना है कि लंबे समय से बंद पड़े चीनी मिल परिसरों के दोबारा सक्रिय होने से पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
उपोत्पाद आधारित उद्योगों से बढ़ेगा निवेश
उन्होंने कहा कि परियोजना के तहत केवल चीनी उत्पादन ही नहीं, बल्कि गन्ने के उपोत्पादों पर आधारित उद्योगों को भी विकसित किया जाएगा। इससे क्षेत्र में नए निवेश को बढ़ावा मिलेगा और उद्योगों के विस्तार के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन की संभावनाएं मजबूत होंगी
‘मिथिलांचल के विकास में मील का पत्थर’
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय मिथिलांचल के औद्योगिक पुनर्जीवन की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि बंद पड़ी चीनी मिलों के दोबारा शुरू होने से किसानों, व्यापारियों और स्थानीय बाजार को भी प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री का जताया आभार
संजय सरावगी ने इस निर्णय के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प और बिहार सरकार के ‘विकसित एवं आत्मनिर्भर बिहार’ के विजन को मजबूती देने वाला है।