बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सक्सेना को मिले 10,890 वोट; नवजात शिशु पुनर्जीवन कार्यक्रम के जरिए देशभर में हजारों प्रशिक्षकों और लाखों स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित करने में निभाई अहम भूमिका
मेरठ, 26 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश के मेरठ के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विनीत सक्सेना को इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (IAP) का राष्ट्रीय अध्यक्ष-निर्वाचित चुना गया है। चुनाव परिणामों की 25 अक्टूबर 2026 को हुई अनंतिम घोषणा के मुताबिक, डॉ. सक्सेना को 10,890 वोट मिले। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी डॉ. आलोक गुप्ता को 5,831 वोटों के अंतर से पीछे छोड़ा। डॉ. गुप्ता को 5,059 वोट मिले। इस चुनाव में पांच उम्मीदवारों को कुल 26,693 वोट मिले।
डॉ. सक्सेना का निर्वाचन मेरठ के चिकित्सा जगत के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के बाल रोग विशेषज्ञों के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। हालांकि, परिणाम की अनंतिम घोषणा और अंतिम आधिकारिक पुष्टि के बीच अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।
63 साल पुराने संगठन में अहम जिम्मेदारी
वर्ष 1963 में स्थापित इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स देश में बाल रोग विशेषज्ञों का एक प्रमुख पेशेवर संगठन है। जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह संगठन देशभर के लगभग 50,000 बाल रोग विशेषज्ञों का प्रतिनिधित्व करता है। संगठन का उद्देश्य बाल स्वास्थ्य, बाल रोग चिकित्सा और चिकित्सा पेशेवरों के प्रशिक्षण को आगे बढ़ाना है।

प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि IAP के इतिहास में डॉ. आर. एस. दयाल के बाद डॉ. विनीत सक्सेना उत्तर प्रदेश से इस राष्ट्रीय पद तक पहुंचने वाले दूसरे व्यक्ति हैं। डॉ. दयाल वर्ष 1978 में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे थे। यदि इस ऐतिहासिक विवरण की आधिकारिक पुष्टि होती है, तो डॉ. सक्सेना का निर्वाचन राज्य के चिकित्सा क्षेत्र के लिए विशेष महत्व रखता है।
आनंद अस्पताल में बाल एवं नवजात शिशु रोग विभाग के प्रमुख
डॉ. विनीत सक्सेना मेरठ के आनंद अस्पताल में बाल एवं नवजात शिशु रोग विभाग के प्रमुख हैं। उन्होंने वर्ष 1994 में बाल रोग में एमडी की पढ़ाई पूरी की। उनके पास बाल चिकित्सा और नवजात शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में विशेषज्ञता के साथ-साथ विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पेशेवर संगठनों से जुड़कर काम करने का अनुभव है।
वे इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के फेलो (FIAP), रॉयल कॉलेज ऑफ पीडियाट्रिक्स एंड चाइल्ड हेल्थ, ब्रिटेन के फेलो (FRCPCH) और नेशनल नियोनाटोलॉजी फोरम के फेलो (FNNF) हैं।
IAP में कई अहम पदों पर कर चुके हैं काम
डॉ. सक्सेना ने इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वे वर्ष 2022-23 में संगठन के मानद महासचिव रहे। इससे पहले वर्ष 2018 में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, वर्ष 2017 में IAP उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष और 2007 से 2011 तक प्रदेश इकाई के सचिव के रूप में काम किया।

वे चार बार IAP के राष्ट्रीय कार्यकारिणी बोर्ड में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वर्ष 2022 में संगठन के राष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजन अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाई। इसके अलावा, वर्ष 2023 में गांधीनगर में आयोजित 30वें इंटरनेशनल पीडियाट्रिक एसोसिएशन कांग्रेस के मुख्य आयोजन सचिव और 2024-25 के दौरान साउथ ईस्ट एशिया पीडियाट्रिक एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया।
नवजात शिशुओं की जान बचाने के प्रशिक्षण कार्यक्रम में योगदान
डॉ. सक्सेना के पेशेवर सफर का एक प्रमुख हिस्सा IAP के नवजात शिशु पुनर्जीवन कार्यक्रम (Neonatal Resuscitation Program—NRP) से जुड़ा रहा है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस कार्यक्रम के राष्ट्रीय समन्वयक के रूप में उन्होंने देशभर में लगभग 7,300 प्रशिक्षकों को तैयार करने और करीब 2 लाख स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के कौशल को मजबूत करने में योगदान दिया।
नवजात शिशु पुनर्जीवन का प्रशिक्षण जन्म के समय सांस लेने में कठिनाई जैसी आपात स्थितियों में समय पर और सही सहायता देने के लिए महत्वपूर्ण होता है। इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को नवजात शिशुओं की देखभाल और आपात प्रबंधन के लिए बेहतर तरीके से तैयार करना है।
बोले- जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी से निभाऊंगा
डॉ. सक्सेना ने अपने निर्वाचन पर कहा कि उन पर जताया गया विश्वास एक बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने IAP को मजबूत करने, बाल रोग विशेषज्ञों के बीच एकता बढ़ाने, देशभर के सदस्यों को सहयोग देने और बाल स्वास्थ्य के उद्देश्य को पूरी ईमानदारी, विनम्रता और समर्पण के साथ आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।

मेरठ में चिकित्सकीय सेवाओं से लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाने तक का उनका सफर बाल चिकित्सा के क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव को दर्शाता है। राष्ट्रीय अध्यक्ष-निर्वाचित के रूप में उनकी नई भूमिका में संगठन के सदस्यों के साथ समन्वय, पेशेवर प्रशिक्षण और देश में बाल स्वास्थ्य से जुड़े प्रयासों को आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण रहेगा।
