19 लोगों की मौत के मामले में घटनास्थल की 3D स्कैनिंग और फॉरेंसिक जांच पूरी; तीन महीने में रिपोर्ट देगी छह सदस्यीय टीम, ‘पंडाल टूटने’ की घोषणा के पीछे की वजह तलाश रही SIT
कोलकाता में चोरबागान सार्वजनिक दुर्गापूजा पंडाल में भगदड़ से 19 लोगों की मौत के मामले की जांच तेज हो गई है। सोमवार को कोलकाता स्थित महाकरण (राइटर्स बिल्डिंग) में विशेष जांच दल (SIT) की अहम बैठक हुई। इसमें अब तक जुटाए गए साक्ष्यों की समीक्षा की गई और जांच के अगले चरण पर चर्चा हुई। हादसे की वजह, भीड़ नियंत्रण में संभावित चूक और घटना से ठीक पहले की गई उस घोषणा की पड़ताल जांच के प्रमुख केंद्र में है, जिसमें कथित तौर पर कहा गया था कि पंडाल टूट रहा है।
पश्चिम बंगाल सरकार ने कलकत्ता हाईकोर्ट से परामर्श के बाद छह सदस्यीय SIT गठित की है। सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अनिंदिता राय सरस्वती की अध्यक्षता वाली इस समिति को तीन महीने के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट और सिफारिशें राज्य सरकार को सौंपनी हैं।
घटनास्थल की 3D स्कैनिंग और फॉरेंसिक जांच पूरी
जांच के सिलसिले में SIT प्रमुख अनिंदिता राय सरस्वती ने 22 अक्टूबर को घटनास्थल का निरीक्षण किया था। इसके बाद पंडाल की फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, फॉरेंसिक जांच और अत्याधुनिक त्रिआयामी (3D) स्कैनिंग के जरिए साक्ष्य जुटाने का काम किया गया।

जांचकर्ताओं का उद्देश्य घटनास्थल की बनावट, लोगों की आवाजाही और भगदड़ के दौरान पैदा हुई परिस्थितियों को समझना है। इसके लिए हादसे के घटनाक्रम का पुनर्निर्माण भी किया गया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि भीड़ किस तरह बेकाबू हुई और स्थिति को समय रहते संभालने में कहां मुश्किल आई।
घटना के समय माइक पर घोषणा करने वाले गिरफ्तार व्यक्ति सेंटू को भी पंडाल में ले जाकर पूछताछ किए जाने की जानकारी दी गई है। जांच दल उससे उस समय की परिस्थितियों, घोषणा के कारण और उससे जुड़े संभावित निर्देशों के बारे में जानकारी जुटा रहा है।
‘पंडाल टूट रहा है’ की घोषणा क्यों हुई, जांच का सबसे अहम सवाल
SIT यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि भगदड़ से ठीक पहले पंडाल टूटने की चेतावनी किस परिस्थिति में दी गई थी। जांचकर्ताओं के सामने सवाल है कि घोषणा किसी वास्तविक खतरे की सूचना के आधार पर की गई थी, किसी गलतफहमी के कारण हुई थी या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी।
इस पहलू की जांच के लिए CCTV फुटेज, उपलब्ध रिकॉर्ड और घटनाक्रम से जुड़े दूसरे साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। घोषणा किसने की, उस समय पंडाल के भीतर क्या स्थिति थी और क्या किसी ने ऐसा करने का निर्देश दिया था—इन सवालों के जवाब जांच की दिशा तय कर सकते हैं।

फिलहाल, घोषणा के पीछे की मंशा या हादसे में उसकी भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। SIT साक्ष्यों के आधार पर घटना से पहले, उसके दौरान और बाद की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
रोशनी, रास्तों और भीड़ नियंत्रण की भी होगी पड़ताल
महाकरण में हुई बैठक में जुटाए गए शुरुआती साक्ष्यों की समीक्षा के साथ उन पहलुओं पर भी चर्चा की गई, जिनकी जांच अभी बाकी है। बैठक में राज्य STF के प्रमुख जावेद शमीम सहित SIT के अन्य सदस्यों के मौजूद रहने की जानकारी दी गई है।
जांच के दायरे में पंडाल के भीतर रोशनी की व्यवस्था, प्रवेश और निकास के रास्तों की उपलब्धता, आपातकालीन निकास की स्थिति, भीड़ को नियंत्रित करने की योजना और पंडाल के निर्माण से जुड़ी संभावित खामियां शामिल हैं।
इसके साथ ही जांचकर्ता यह भी देख रहे हैं कि पूजा आयोजकों, स्थानीय पुलिस और संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों ने सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम किए थे या नहीं। भीड़ का अनुमान लगाने, लोगों की आवाजाही नियंत्रित करने और आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी की व्यवस्था की भी पड़ताल की जा रही है।

SIT प्रमुख ने घटनास्थल के निरीक्षण के बाद कम रोशनी और संकरे प्रवेश-निकास मार्गों जैसे पहलुओं पर ध्यान दिलाया था। हालांकि, किसी विशेष चूक को हादसे का अंतिम कारण मानने से पहले समिति सभी संबंधित साक्ष्यों और पक्षों की जांच करेगी।
छह सदस्यीय SIT को तीन महीने में देनी है रिपोर्ट
पश्चिम बंगाल सरकार ने कलकत्ता हाईकोर्ट से परामर्श के बाद छह सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया है। इसकी अध्यक्षता कलकत्ता हाईकोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अनिंदिता राय सरस्वती कर रही हैं।
समिति में आपदा प्रबंधन एवं नागरिक सुरक्षा विभाग के प्रधान सचिव, राज्य STF के महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक, पश्चिम बंगाल पुलिस महानिदेशक की ओर से वरिष्ठ अधिकारी, गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग का प्रतिनिधि और कोलकाता स्थित राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) का प्रतिनिधि शामिल हैं।
समिति को तीन महीने के भीतर जांच के निष्कर्ष और सिफारिशें राज्य सरकार को सौंपनी हैं। इसके लिए संबंधित विभागों, अधिकारियों और एजेंसियों से आवश्यक जानकारी और दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं।

19 मौतों के पीछे की पूरी कड़ी तलाश रही जांच टीम
चोरबागान हादसे ने भीड़ प्रबंधन, आपातकालीन निकासी और सार्वजनिक आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जांच का मकसद केवल भगदड़ की तत्काल वजह जानना नहीं, बल्कि यह भी पता लगाना है कि हादसे को रोकने के लिए कौन-से इंतजाम जरूरी थे और क्या उनका पालन किया गया था।
SIT को यह स्पष्ट करना है कि घटना में भीड़ का दबाव, पंडाल की संरचना, रास्तों की स्थिति, सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक स्तर पर संभावित चूक या अन्य परिस्थितियों की क्या भूमिका रही। साथ ही, यह भी जांचना होगा कि आपात स्थिति पैदा होने पर लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए पर्याप्त व्यवस्था थी या नहीं।
अब तक जुटाए गए साक्ष्यों की समीक्षा और आगे की जांच के आधार पर समिति अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। तीन महीने की समयसीमा के भीतर आने वाली रिपोर्ट से हादसे की परिस्थितियों और संभावित जिम्मेदारी तय करने में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।
