गया/बोधगया। मगध विश्वविद्यालय में पूर्व कुलपति प्रो. शशि प्रताप शाही के कार्यकाल से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच तेज हो गई है। विश्वविद्यालय में विजिलेंस टीम की कार्रवाई लगातार तीसरे दिन भी जारी रही। गुरुवार को टीम ने कुलसचिव समेत विभिन्न विभागों के अधिकारियों से घंटों पूछताछ की और संबंधित दस्तावेजों एवं अभिलेखों की पड़ताल की।
विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार, पिछले तीन दिनों से चल रही जांच के दौरान परीक्षा नियंत्रक, नोडल पदाधिकारी, वित्त पदाधिकारी समेत कई अधिकारियों से अलग-अलग बिंदुओं पर जानकारी ली गई है। विजिलेंस टीम विश्वविद्यालय के प्रशासनिक और वित्तीय कामकाज से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन या विजिलेंस विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। जांच में सामने आए तथ्यों और आगे की कार्रवाई को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
पूर्व कुलपति के कार्यकाल से जुड़े फैसले जांच के दायरे में
मगध विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. शशि प्रताप शाही वर्ष 2023 से फरवरी 2026 तक इस पद पर रहे थे। बताया जा रहा है कि विजिलेंस की जांच उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए विभिन्न प्रशासनिक और वित्तीय फैसलों पर केंद्रित है।
इस अवधि में विश्वविद्यालय की योजनाओं, विभागों और व्यवस्थाओं में किए गए बदलावों से संबंधित दस्तावेज भी जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं। टीम अधिकारियों से इन फैसलों से जुड़े अलग-अलग पहलुओं पर जानकारी जुटा रही है।
बुद्धिस्ट स्टडी और विदेशी छात्रों से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच
सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार को विजिलेंस टीम ने विशेष रूप से बुद्धिस्ट स्टडी, विदेशी छात्रों से संबंधित कार्यों और विश्वविद्यालय की विभिन्न सुविधाओं एवं व्यवस्थाओं में किए गए बदलावों से जुड़े अभिलेखों की पड़ताल की।
इंजीनियरिंग, स्थापना और बुद्धिस्ट स्टडी विभाग से जुड़े पदाधिकारियों से भी दस्तावेजों के आधार पर जानकारी ली गई। जांच के दौरान संबंधित विभागों के रिकॉर्ड और प्रक्रियाओं की बारीकी से समीक्षा की जा रही है।
करीब दो हजार बिंदुओं से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की चर्चा
विश्वविद्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, जांच में करीब दो हजार बिंदुओं से संबंधित कागजात और प्रक्रियाओं की पड़ताल किए जाने की चर्चा है। विजिलेंस टीम के सदस्य विश्वविद्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों से अलग-अलग स्तर पर पूछताछ कर जानकारी जुटा रहे हैं।
लगातार तीन दिनों से चल रही इस कार्रवाई के कारण विश्वविद्यालय परिसर में अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच चर्चा का माहौल है। हालांकि, जांच में अब तक क्या तथ्य सामने आए हैं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल, मगध विश्वविद्यालय और विजिलेंस विभाग की ओर से जांच के निष्कर्षों या संभावित आगे की कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।