पुल से आवागमन बंद, ग्रामीणों को 5 से 10 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करने की मजबूरी
जमुई। खैरा-गरही मुख्य मार्ग पर स्थित ललदैया काजवे पुल के क्षतिग्रस्त होने से दक्षिणी क्षेत्र के कई गांवों के लोगों की परेशानी बढ़ गई है। पुल पर आवागमन प्रभावित होने के कारण ग्रामीणों को अब दूसरे रास्ते का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे उन्हें करीब 5 से 10 किलोमीटर तक अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।
पुल के क्षतिग्रस्त होने का असर सबसे ज्यादा स्कूली बच्चों, किसानों, नौकरी-पेशा लोगों और बाजार जाने वाले ग्रामीणों पर पड़ रहा है। यह पुल दक्षिणी इलाके के लोगों के लिए प्रखंड और जिला मुख्यालय तक पहुंचने का प्रमुख रास्ता माना जाता है। अब लोगों को जरूरी काम के लिए भी लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है।
पुराने पुल की हालत पहले से थी जर्जर
ग्रामीणों के अनुसार ललदैया काजवे पुल की हालत पिछले काफी समय से खराब थी। भारी वाहनों की आवाजाही के कारण इसकी स्थिति लगातार कमजोर होती गई। अब पुल के एक हिस्से के क्षतिग्रस्त होने के बाद लोगों के सामने आवागमन का संकट खड़ा हो गया है।
बताया जाता है कि जल संसाधन विभाग की ओर से इस पुल का निर्माण करीब 344 लाख रुपये की लागत से कराया गया था। इसका उद्घाटन 11 दिसंबर 2004 को तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव की मौजूदगी में हुआ था।
नया पुल बन रहा, लेकिन अभी अधूरा
पुराने पुल के ठीक बगल में नए पुल का निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन यह अभी पूरा नहीं हुआ है। इसी वजह से ग्रामीण पुराने पुल से ही आवागमन करते थे।
अब पुराने पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जब तक नया पुल तैयार नहीं होता, तब तक वैकल्पिक रास्ते की व्यवस्था की जाए। साथ ही नए पुल का निर्माण जल्द पूरा कराने की मांग भी की गई है।
पुल का पाया धंसा, नदी में गिरी बाइक
पुल क्षतिग्रस्त होने के साथ उसका एक पाया भी धंस गया है। इसी दौरान पुल से गुजर रही एक बाइक नदी में फंस गई। हालांकि बाइक सवार को सुरक्षित बचा लिया गया।
घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि पुल की मौजूदा स्थिति बेहद खतरनाक है और यदि जल्द सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए तो बड़ा हादसा हो सकता है।
2012 में भी हुआ था विस्फोट
ग्रामीणों के मुताबिक, वर्ष 2012 में माओवादियों ने डायनामाइट लगाकर पुल को उड़ाने का प्रयास किया था। इस घटना में पुल के दो पायों में हल्की दरार आने की बात कही गई थी। इसके बाद से पुल की मजबूती को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
अब एक बार फिर पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि पुल की हालत की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन को जल्द स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाना चाहिए।