परबत्ता (खगड़िया): गंगा के बढ़ते जलस्तर ने खगड़िया के तेमथा करारी पंचायत के शर्मा टोला की जिंदगी मुश्किल कर दी है। करीब 100 घरों वाले इस टोले में पिछले 15 दिनों से बाढ़ का पानी पसरा हुआ है। इसके बावजूद यहां के करीब 25 बच्चे पढ़ाई जारी रखने के लिए रोज नाव से बाढ़ का पानी पार कर स्कूल पहुंच रहे हैं।
शर्मा टोला के प्राथमिक विद्यालय में पांचवीं कक्षा तक ही पढ़ाई होती है। इसके बाद बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए करीब एक से तीन किलोमीटर दूर स्थित मध्य और उच्च विद्यालयों में जाना पड़ता है। बाढ़ के कारण सामान्य रास्ते बंद होने के बावजूद बच्चों ने पढ़ाई का सिलसिला नहीं छोड़ा है।
आधा किलोमीटर पानी, फिर पैदल या ई-रिक्शा से स्कूल
बच्चे प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई गई नाव के जरिए करीब आधा किलोमीटर बाढ़ का पानी पार करते हैं। इसके बाद जीएन बांध पहुंचकर वहां से पैदल या ई-रिक्शा के जरिए अपने विद्यालय जाते हैं।
यानी स्कूल तक पहुंचने के लिए इन बच्चों को हर दिन पहले नाव और फिर सड़क का सफर तय करना पड़ता है। वापस घर लौटने के दौरान भी यही प्रक्रिया दोहरानी पड़ती है।
‘बाढ़ है तो क्या हुआ, पढ़ाई जरूरी है’
मध्य विद्यालय तेमथा की सातवीं कक्षा की छात्रा निधि कुमारी का कहना है कि बाढ़ की वजह से पढ़ाई नहीं छोड़ी जा सकती। उसके मुताबिक, बाढ़ के डर से घर पर बैठने के बजाय स्कूल जाना जरूरी है।
बच्चों के इस हौसले के पीछे उनके माता-पिता की चिंता भी जुड़ी हुई है। निधि के पिता विवेक शर्मा बताते हैं कि जब तक बेटी स्कूल से वापस घर नहीं लौटती, तब तक चिंता बनी रहती है।
अभिभावकों को डर, फिर भी पढ़ाई को दे रहे प्राथमिकता
रमावती उच्च विद्यालय तेमथा के नौवीं कक्षा के छात्र सत्यम के पिता खाखो शर्मा बताते हैं कि बच्चे नाव के जरिए ही स्कूल जाते और वापस लौटते हैं। उन्हें बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता रहती है, लेकिन पढ़ाई भी जरूरी है।
वहीं, मध्य विद्यालय जानकीचक के सातवीं कक्षा के छात्र रमनीष कुमार का कहना है कि वे ‘गंगा मैया की जय’ बोलकर नाव पर बैठते हैं और उन्हें भरोसा रहता है कि मां गंगा उन्हें सुरक्षित पार करा देंगी।
प्रशासन ने दो नावें लगाईं
गांव में तैनात आपदा मित्र ऋषि कुमार के अनुसार, परबत्ता अंचल प्रशासन की ओर से शर्मा टोला में फिलहाल दो नावें चलाई जा रही हैं।
बाढ़ के दौरान सुरक्षा और बचाव को लेकर ग्रामीणों को घर-घर जाकर जानकारी दी गई है। इसके अलावा गांव में संध्या चौपाल लगाकर भी लोगों को जागरूक किया गया है।
ऋषि कुमार के मुताबिक, नाविक प्रशिक्षित हैं और नाव में उसकी क्षमता के अनुसार ही यात्रियों को बैठाया जाता है।
शिक्षा विभाग ने कहा- बाढ़ में बच्चों को स्कूल नहीं बुलाया जाएगा
बच्चों के रोज नाव से स्कूल जाने के मामले पर परबत्ता के प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी रजनीश कुमार ने कहा कि संबंधित विद्यालय प्रधानों को निर्देश दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जिन गांवों में बाढ़ का पानी है और विद्यार्थियों को नाव के जरिए विद्यालय आना-जाना पड़ता है, वहां बाढ़ की अवधि में छात्र-छात्राओं को स्कूल नहीं आने की सलाह दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि बाढ़ की वजह से विद्यार्थियों की जो पढ़ाई छूटेगी, उसे बाद में पूरा कराया जाएगा।
बाढ़ के बीच शर्मा टोला के बच्चों की यह तस्वीर एक तरफ उनकी पढ़ाई के प्रति लगन और हौसले को दिखाती है, तो दूसरी तरफ यह भी बताती है कि प्राकृतिक आपदा के दौरान ग्रामीण बच्चों की शिक्षा किस तरह प्रभावित होती है।