जमुई: एक मोबाइल बेचने के बाद जमुई के एक कारोबारी के लिए ₹83,500 का भुगतान परेशानी का कारण बन गया। ग्राहक ने मोबाइल खरीदने के बाद दुकान पर लगे बारकोड स्कैनर के जरिए कारोबारी के HDFC बैंक खाते में ₹83,500 ट्रांसफर किए थे। बाद में बैंक ने खाते को फ्रीज कर रकम होल्ड कर दी। जांच में यह रकम कथित तौर पर साइबर फ्रॉड से जुड़े बैंक खाते से आने की बात सामने आई है।
मामला सामने आने के बाद अब जमुई से लेकर दिल्ली तक साइबर पुलिस की जांच पहुंच गई है। दिल्ली के साइबर थाना शाहदरा ने भी संबंधित कारोबारी को नोटिस जारी कर दस्तावेजों और साक्ष्यों के साथ जांच में शामिल होने को कहा है।
iPhone 17 बेचने के बाद खाते में आया था भुगतान
महाराजगंज स्थित मोबाइल म्यूजियम एंड लैपटाप गैलरी के संचालक दीपक कुमार भगत के मुताबिक, उन्होंने 3 जुलाई 2026 को एक ग्राहक को Apple iPhone 17 और चार्जर बेचा था। मोबाइल और चार्जर की कुल कीमत ₹83,500 थी।
ग्राहक ने दुकान पर लगे बारकोड स्कैनर को स्कैन कर दीपक भगत के HDFC बैंक के करंट अकाउंट में भुगतान किया। रकम प्राप्त होने के बाद कारोबारी ने ग्राहक को मोबाइल और चार्जर सौंप दिया।
उस समय कारोबारी को इस भुगतान में किसी तरह की गड़बड़ी की जानकारी नहीं थी।
बैंक ने खाते को किया फ्रीज, रकम होल्ड
कुछ समय बाद दीपक भगत के बैंक खाते पर रोक लगा दी गई और ₹83,500 की राशि होल्ड कर दी गई। बैंक से जानकारी लेने के बाद उन्हें पता चला कि जिस खाते से यह रकम भेजी गई थी, उसका संबंध साइबर फ्रॉड की शिकायत से बताया जा रहा है।
इसके बाद मोबाइल कारोबारी ने साइबर क्राइम थाना जमुई में आवेदन देकर मामले की जांच कराने की मांग की।
दीपक भगत का कहना है कि वह केवल मोबाइल की बिक्री का कारोबार करते हैं और किसी भी तरह की साइबर धोखाधड़ी में उनकी कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच, वास्तविक आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई और अपने खाते से रोक हटाने के साथ होल्ड रकम जारी करने की मांग की है।
दिल्ली साइबर पुलिस ने भी भेजा नोटिस
अब इस मामले की जांच दिल्ली तक पहुंच चुकी है। साइबर थाना शाहदरा की ओर से जारी नोटिस में बताया गया है कि शिकायत संख्या 30807260054238 की प्रारंभिक जांच के दौरान शिकायतकर्ता सुचिता दीक्षित के बैंक खाते से 3 जुलाई 2026 को ₹83,500 का ट्रांजेक्शन हुआ।
जांच में यह रकम दीपक भगत के नाम से जुड़े HDFC बैंक खाते में पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
दिल्ली साइबर पुलिस ने कारोबारी को 4 सितंबर को सुबह 11 बजे संबंधित दस्तावेज और साक्ष्य के साथ साइबर थाना शाहदरा में जांच में शामिल होने का निर्देश दिया है।
अभी दर्ज नहीं हुई है प्राथमिकी
नोटिस में यह भी कहा गया है कि फिलहाल मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है। जांच के दौरान संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।
यानी फिलहाल कारोबारी की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकला है और जांच प्रक्रिया जारी है।
ग्राहक के भुगतान की पूरी कड़ी खंगाल रही पुलिस
अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि मोबाइल खरीदने वाले ग्राहक ने जिस खाते या भुगतान माध्यम से ₹83,500 भेजे, उसमें साइबर फ्रॉड की रकम कैसे पहुंची।
इसके अलावा यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि संदिग्ध रकम ग्राहक के माध्यम से कारोबारी के खाते तक किन परिस्थितियों में पहुंची।
जमुई और दिल्ली साइबर पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस पूरे ट्रांजेक्शन में वास्तविक साइबर फ्रॉड की कड़ी कहां से जुड़ी थी और इसमें किन लोगों की भूमिका थी।