19 सितंबर की घटना में अब तक आठ आरोपित गिरफ्तार; पांच पर छात्र-छात्रा से छेड़खानी का आरोप, तीन पर वीडियो प्रसारित करने की कार्रवाई—120 सोशल मीडिया अकाउंट पुलिस के रडार
जमुई। मड़वा पहाड़ के पास दसवीं की छात्रा और उसके साथी छात्र के साथ हुई कथित बदसलूकी और मारपीट के मामले में दिनमान टाइम्स की पड़ताल के दौरान एक बड़ा और चौंकाने वाली बात सामने आई है।
ग्रामीणों से बातचीत में पता चला है कि मुख्य वारदात से कुछ ही देर पहले से भी दोनों छात्र-छात्राओं को रास्ते में कुछ युवकों ने रोककर परेशान किया था। ग्रामीणों के अनुसार, दोनों वहां से किसी तरह निकल गए, लेकिन इसके बाद कथित तौर पर फोन कर मुख्य आरोपित नंदन यादव को मौके पर बुलाया गया।
हालांकि, इस शुरुआती छेड़खानी और नंदन को फोन कर बुलाए जाने के दावे की पुलिस स्तर से स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
पुलिस के अनुसार, 19 सितंबर की शाम मड़वा पहाड़ के पास छात्र-छात्रा को एक समूह ने रोका था। वायरल हुए वीडियो में दोनों के साथ कथित तौर पर बदसलूकी और मारपीट दिखाई दी। घटना के बाद वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुआ और मामला सामने आने पर पुलिस ने कार्रवाई तेज की।
पहले रास्ते में रोका, फिर नंदन को बुलाने का दावा
ग्रामीणों के मुताबिक, छात्र-छात्रा फोटोशूट के बाद लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में कुछ युवकों ने उन्हें रोककर परेशान किया। दोनों वहां से निकलने की कोशिश कर आगे बढ़े। इसी दौरान कथित तौर पर आरोपितों ने फोन कर नंदन यादव को उनकी लोकेशन की जानकारी दी। इसके बाद नंदन अपने साथी हरेराम यादव के साथ वहां पहुंचा।
ग्रामीणों का दावा है कि इसके बाद छात्र के साथ मारपीट की गई और छात्रा के साथ भी बदसलूकी की गई। घटना के वीडियो में एक समूह दोनों को घेरता और उनके साथ दुर्व्यवहार करता दिखाई देता है। पुलिस ने वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपितों की पहचान शुरू की थी।
नंदन के पैर में गोली, हरेराम भागते समय घायल
मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने मुख्य आरोपित नंदन यादव और उसके साथी हरेराम यादव को पकड़ने के लिए कार्रवाई की। पुलिस के मुताबिक, नंदन को पकड़ने के दौरान मुठभेड़ हुई, जिसमें उसके दाहिने पैर में गोली लगी। उसे इलाज के लिए जमुई सदर अस्पताल ले जाया गया।
वहीं, हरेराम यादव पुलिस से बचकर भागने की कोशिश में गिर गया और उसके घुटने/पैर में चोट आई। दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
मंगलवार की कार्रवाई के बाद इस मामले में छात्र-छात्रा से कथित छेड़खानी के आरोप में गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या पांच हो गई, जिनमें तीन नाबालिग हैं। पुलिस का कहना है कि अन्य संदिग्धों की भूमिका भी जांची जा रही है।
वीडियो बनाने और वायरल करने वालों पर भी कार्रवाई
पुलिस ने सिर्फ मूल घटना में शामिल लोगों पर ही कार्रवाई नहीं की है, बल्कि घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर उसे इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित करने वालों के खिलाफ भी अलग से कार्रवाई शुरू की है।
साइबर थाना पुलिस के अनुसार, करीब 120 सोशल मीडिया अकाउंट/प्रोफाइल चिन्हित किए गए हैं, जिन पर वीडियो प्रसारित करने और नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर होने का खतरा पैदा करने को लेकर कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक, वीडियो प्रसारित करने के मामले में अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें अलीगंज निवासी रामाशीष कुमार, औरैया निवासी कुंदन कुमार और अड़सार निवासी फैयाज शामिल हैं।
पुलिस की जांच में रामाशीष की घटना के दौरान मौके पर मौजूदगी और वीडियो बनाने की बात भी सामने आई है। इस तरह छात्र-छात्रा से जुड़े मामले में पांच और वीडियो प्रसारित करने के मामले में तीन लोगों समेत कुल आठ आरोपित पुलिस की गिरफ्त में बताए जा रहे हैं।
वीडियो से मिली पहचान, वाहन नंबर बना अहम सुराग
पुलिस ने बताया कि घटना के बाद शुरुआत में पीड़ित छात्र-छात्रा की ओर से शिकायत नहीं की गई थी। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने स्वत: संज्ञान लिया। वायरल फुटेज में दिखाई दे रहे वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर की मदद से पुलिस ने दोनों तक पहुंच बनाई और इसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ी।
जांच में वीडियो फुटेज को अहम साक्ष्य माना जा रहा है। पुलिस इसी के आधार पर घटना में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने और उनकी भूमिका तय करने में जुटी है। मामले की निगरानी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के स्तर से की जा रही है।
नाबालिग की पहचान उजागर करना भी अपराध
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि घटना का वीडियो आगे साझा या प्रसारित न करें। नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले किसी भी कंटेंट को शेयर करना कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है। इसी कारण साइबर पुलिस ने वीडियो प्रसारित करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी जांच शुरू की है।
असली चुनौती सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि ‘अपराध करके बच निकलने’ के इस बेखौफ वहम को तोड़ना है
जमुई की यह घटना उस छात्रा और उसके साथी के लिए सिर्फ कुछ मिनटों की हिंसा नहीं थी। रास्ते में रोकना, उनका पीछा करना, कथित तौर पर दूसरे व्यक्ति को बुलाना और फिर घटना का वीडियो बनाना—
इन सभी पहलुओं की जांच अब जरूरी है। उतना ही जरूरी यह देखना भी है कि घटना के बाद वीडियो किसने बनाया, किसने फैलाया और किस तरह एक नाबालिग की निजता और गरिमा को दोबारा नुकसान पहुंचाया गया।
पुलिस की कार्रवाई में अब तक आठ लोगों की गिरफ्तारी और करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइलों पर कार्रवाई सामने आई है। लेकिन जांच का असली निष्कर्ष तभी सामने आएगा, जब यह स्पष्ट होगा कि उस शाम मड़वा पहाड़ के पास वास्तव में क्या हुआ, किसकी क्या भूमिका थी और घटना को रिकॉर्ड कर प्रसारित करने वालों की जिम्मेदारी क्या थी। मामले में पुलिस की जांच जारी है।