विशेष लेख | 7 नवंबर | इतिहास के पन्नों से | विश्व राजनीति एवं महिला नेतृत्व
7 नवंबर 2000 को अमेरिका में हुए चुनाव में हिलेरी रोडम क्लिंटन ने न्यूयॉर्क राज्य से अमेरिकी सीनेट का चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया। तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की पत्नी और उस समय अमेरिका की फर्स्ट लेडी हिलेरी ने रिपब्लिकन उम्मीदवार रिक लाजियो को पराजित किया। इस जीत के साथ वे अमेरिकी इतिहास की पहली ऐसी फर्स्ट लेडी बनीं जिन्होंने चुनाव लड़कर सार्वजनिक राजनीतिक पद हासिल किया। वे न्यूयॉर्क से अमेरिकी सीनेट के लिए चुनी जाने वाली पहली महिला भी बनीं।
हिलेरी की जीत ऐसे दिन आई जब अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव का मुकाबला भी बेहद करीबी था। जॉर्ज डब्ल्यू. बुश और अल गोर के बीच राष्ट्रपति पद की दौड़ फ्लोरिडा में मतगणना विवाद के कारण कई सप्ताह तक अनिर्णीत रही। राष्ट्रीय सुर्खियों में राष्ट्रपति चुनाव छाया रहा, लेकिन न्यूयॉर्क का सीनेट चुनाव भी अमेरिकी राजनीति में महिलाओं की भागीदारी और फर्स्ट लेडी की सार्वजनिक भूमिका के लिहाज से ऐतिहासिक साबित हुआ।
न्यूयॉर्क सीनेट चुनाव: मुकाबला और परिणाम
न्यूयॉर्क की सीनेट सीट लंबे समय तक सांसद रहे डेनियल पैट्रिक मोयनिहान के सेवानिवृत्त होने के बाद खाली हो रही थी। हिलेरी क्लिंटन ने 1999 में इस सीट के लिए संभावित उम्मीदवारी पर विचार करने हेतु एक एक्सप्लोरेटरी कमेटी बनाई। फरवरी 2000 में उन्होंने न्यूयॉर्क के स्टेट यूनिवर्सिटी परिसर में अपने अभियान की औपचारिक घोषणा की। उनका मुकाबला शुरुआत में न्यूयॉर्क सिटी के तत्कालीन मेयर रूडी जूलियानी से होने की संभावना थी।

जूलियानी ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों और निजी जीवन से जुड़े विवादों के बीच सितंबर 2000 में चुनावी दौड़ से नाम वापस ले लिया। इसके बाद रिपब्लिकन पार्टी ने न्यूयॉर्क के कांग्रेसी रिक लाजियो को उम्मीदवार बनाया। लाजियो ने हिलेरी के अनुभव और न्यूयॉर्क से उनके संबंधों पर सवाल उठाए, जबकि हिलेरी ने राज्य के मुद्दों, आर्थिक अवसरों, स्वास्थ्य सेवाओं और परिवारों की जरूरतों को अपने अभियान का केंद्र बनाया।
हिलेरी ने न्यूयॉर्क के सभी 62 काउंटियों का दौरा किया। उनके विरोधियों ने यह सवाल उठाया कि वे लंबे समय से न्यूयॉर्क की निवासी नहीं रही थीं और केवल चुनाव लड़ने के लिए राज्य में आई थीं। अमेरिकी राजनीतिक विमर्श में ऐसे उम्मीदवार के लिए “carpetbagger” शब्द का इस्तेमाल किया गया। हिलेरी ने स्थानीय समुदायों से संवाद, राज्यव्यापी यात्राओं और मुद्दा-आधारित अभियान के जरिए इस आलोचना का जवाब देने की कोशिश की।
7 नवंबर 2000 को मतदान के बाद हिलेरी ने लगभग 55 प्रतिशत वोट हासिल किए, जबकि रिक लाजियो को लगभग 43 प्रतिशत मत मिले। इस तरह उन्होंने निर्णायक अंतर से जीत दर्ज की। बिल क्लिंटन के राष्ट्रपति पद का कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही उनकी पत्नी ने अपनी स्वतंत्र चुनावी पहचान स्थापित कर ली थी।
फर्स्ट लेडी से निर्वाचित जनप्रतिनिधि बनने तक
अमेरिका में फर्स्ट लेडी राष्ट्रपति की पत्नी के लिए प्रयुक्त एक परंपरागत पदनाम है। यह अपने आप में कोई निर्वाचित संवैधानिक पद नहीं है। हिलेरी क्लिंटन ने फर्स्ट लेडी के रूप में सार्वजनिक नीति, स्वास्थ्य, बच्चों और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई थी, लेकिन 2000 का चुनाव उनके राजनीतिक जीवन में एक नया चरण था। इस बार वे किसी राष्ट्रपति की पत्नी के रूप में नहीं, बल्कि मतदाताओं के सामने उम्मीदवार के रूप में थीं।

उनकी जीत ने यह स्थापित किया कि फर्स्ट लेडी का सार्वजनिक जीवन राष्ट्रपति के कार्यकाल तक सीमित नहीं होना चाहिए। वे अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा, नीतिगत प्राथमिकताओं और मतदाताओं से सीधे मिले जनादेश के आधार पर अलग राजनीतिक पहचान बना सकती हैं। अमेरिकी सीनेट में उनका प्रवेश इस बदलाव का प्रतीक बना।
हिलेरी क्लिंटन का शुरुआती जीवन और शिक्षा
हिलेरी डायने रोडम का जन्म 26 अक्टूबर 1947 को शिकागो, इलिनॉय में हुआ। उन्होंने वेल्स्ली कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई की और बाद में येल लॉ स्कूल से कानून की डिग्री प्राप्त की। छात्र जीवन में ही वे सार्वजनिक मामलों और सामाजिक न्याय के मुद्दों से जुड़ गई थीं। कॉलेज में वे छात्र नेतृत्व और नागरिक अधिकारों से जुड़े विमर्श में सक्रिय रहीं।
कानून की पढ़ाई के बाद उन्होंने बच्चों और परिवारों के अधिकारों के क्षेत्र में काम किया। वे Children’s Defense Fund से जुड़ीं और बाल कल्याण, शिक्षा तथा सामाजिक सुरक्षा के मुद्दों पर सक्रिय रहीं। 1974 में उन्होंने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की न्यायपालिका समिति के महाभियोग जांच स्टाफ में भी काम किया, जहां राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के खिलाफ वाटरगेट प्रकरण की जांच से संबंधित कार्य हुआ।
1975 में उन्होंने बिल क्लिंटन से विवाह किया। अर्कांसस में रहते हुए वे वकील के रूप में कार्यरत रहीं और सार्वजनिक संस्थाओं तथा सामाजिक संगठनों से जुड़ीं। बिल क्लिंटन के अर्कांसस के गवर्नर रहने के दौरान वे राज्य की फर्स्ट लेडी बनीं। उन्होंने शिक्षा मानकों, बच्चों के अधिकारों और परिवार कल्याण से जुड़े कार्यों में भूमिका निभाई।

अमेरिका की फर्स्ट लेडी के रूप में भूमिका
1992 में बिल क्लिंटन के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद हिलेरी 1993 में अमेरिका की फर्स्ट लेडी बनीं। उन्होंने इस भूमिका को केवल औपचारिक सामाजिक दायित्वों तक सीमित नहीं रखा। राष्ट्रपति प्रशासन ने उन्हें स्वास्थ्य देखभाल सुधार से संबंधित कार्यदल का नेतृत्व सौंपा। हालांकि व्यापक स्वास्थ्य सुधार योजना को कांग्रेस में सफलता नहीं मिली, लेकिन इस बहस ने स्वास्थ्य बीमा की पहुंच और अमेरिकी स्वास्थ्य व्यवस्था की चुनौतियों को राष्ट्रीय चर्चा में बनाए रखा।
हिलेरी ने बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा, गोद लेने और पालक देखभाल व्यवस्था, महिलाओं के अधिकार तथा परिवारों के कल्याण जैसे विषयों पर भी काम किया। 1995 में बीजिंग में संयुक्त राष्ट्र के चौथे विश्व महिला सम्मेलन में उनके भाषण ने वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों को मानवाधिकारों का अभिन्न हिस्सा बताया। यह विचार आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय महिला अधिकार विमर्श का प्रभावशाली सूत्र बना।
फर्स्ट लेडी के रूप में उनकी सक्रिय नीति भूमिका की प्रशंसा भी हुई और आलोचना भी। कुछ लोगों ने इसे राष्ट्रपति की पत्नी की परंपरागत भूमिका से आगे बढ़ना माना, जबकि समर्थकों ने इसे सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की क्षमता और नेतृत्व का उदाहरण बताया। इन बहसों के बावजूद हिलेरी ने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान मजबूत की।
सीनेट में प्रवेश और ऐतिहासिक शपथ
हिलेरी क्लिंटन ने 3 जनवरी 2001 को अमेरिकी सीनेट की सदस्य के रूप में शपथ ली। इस तरह वे न्यूयॉर्क राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली महिला सीनेटर बनीं और पहली फर्स्ट लेडी भी, जिन्होंने चुनाव जीतकर अमेरिकी सीनेट में प्रवेश किया। उनके सीनेट कार्यकाल की शुरुआत बिल क्लिंटन के राष्ट्रपति पद छोड़ने के कुछ ही सप्ताह पहले हुई।

सीनेटर के रूप में उन्होंने सशस्त्र सेवा, स्वास्थ्य, शिक्षा, श्रम, पेंशन, पर्यावरण और सार्वजनिक निर्माण जैसे विषयों से संबंधित समितियों में काम किया। 11 सितंबर 2001 के आतंकवादी हमलों के बाद न्यूयॉर्क के पुनर्निर्माण, आपातकालीन सेवाओं के कर्मियों के स्वास्थ्य और प्रभावित समुदायों के लिए संघीय सहायता की मांग में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने सैनिकों, पूर्व सैनिकों और नेशनल गार्ड के सदस्यों के स्वास्थ्य तथा लाभों से जुड़े मुद्दों पर भी काम किया।
2006 में हिलेरी दोबारा न्यूयॉर्क से सीनेट के लिए निर्वाचित हुईं। उन्होंने 2001 से 2009 तक सीनेटर के रूप में सेवा की। जनवरी 2009 में उन्होंने राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन में विदेश मंत्री का पद स्वीकार करने के लिए सीनेट से इस्तीफा दे दिया।
राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी और विदेश मंत्री का कार्यकाल
2007 में हिलेरी क्लिंटन ने 2008 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवारी की दौड़ शुरू की। प्राथमिक चुनावों में उनका मुकाबला बराक ओबामा से हुआ। वे पार्टी की उम्मीदवार नहीं बन सकीं, लेकिन उनका अभियान अमेरिकी राजनीति में महिलाओं की नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रपति पद तक पहुंच के सवाल पर एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा।
बराक ओबामा के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद उन्होंने हिलेरी को विदेश मंत्री नियुक्त किया। 2009 से 2013 तक उन्होंने अमेरिकी विदेश नीति का नेतृत्व किया। इस दौरान कूटनीति, अंतरराष्ट्रीय संबंध, महिला सशक्तिकरण, लोकतंत्र और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उनके कार्यकाल का हिस्सा रहे।

2016 में हिलेरी क्लिंटन डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार बनीं। वे किसी प्रमुख अमेरिकी राजनीतिक दल की ओर से राष्ट्रपति पद के लिए नामित होने वाली पहली महिला थीं। उन्होंने लोकप्रिय मतों में अधिक वोट हासिल किए, लेकिन इलेक्टोरल कॉलेज में डोनाल्ड ट्रंप की जीत के कारण राष्ट्रपति नहीं बन सकीं।
2000 की जीत का व्यापक राजनीतिक महत्व
हिलेरी क्लिंटन की 2000 की जीत को अमेरिकी राजनीति में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पहली बार था जब अमेरिका की कोई मौजूदा फर्स्ट लेडी चुनाव लड़कर सीनेट तक पहुंची। इसने उस धारणा को चुनौती दी कि राष्ट्रपति की पत्नी की राजनीतिक भूमिका मुख्यतः सामाजिक और प्रतीकात्मक होती है।
यह जीत न्यूयॉर्क के लिए भी ऐतिहासिक थी, क्योंकि राज्य ने पहली बार किसी महिला को अमेरिकी सीनेट में अपना प्रतिनिधि चुना। हालांकि इससे पहले देश के अन्य राज्यों से महिलाएं सीनेट में पहुंच चुकी थीं, न्यूयॉर्क जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली राज्य में यह उपलब्धि विशेष महत्व रखती थी। हिलेरी ने अपने बाद आने वाली महिलाओं के लिए सार्वजनिक पदों तक पहुंच की संभावनाओं को व्यापक बनाने में योगदान दिया।
फिर भी इस उपलब्धि का मूल्यांकन संतुलित दृष्टि से करना चाहिए। हिलेरी को राष्ट्रीय पहचान और राजनीतिक संसाधनों का लाभ मिला, लेकिन उन्हें चुनावी आलोचना, निवास संबंधी सवालों और अपने स्वतंत्र राजनीतिक व्यक्तित्व को स्थापित करने की चुनौती का भी सामना करना पड़ा। उनकी जीत इन सभी परिस्थितियों के बीच मतदाताओं से मिले समर्थन का परिणाम थी।

निष्कर्ष
7 नवंबर 2000 को हिलेरी रोडम क्लिंटन की न्यूयॉर्क से अमेरिकी सीनेट चुनाव में जीत केवल एक चुनावी परिणाम नहीं थी। यह अमेरिकी राजनीति में फर्स्ट लेडी की भूमिका के विस्तार, महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और व्यक्तिगत जनादेश के महत्व का प्रतीक बनी। 3 जनवरी 2001 को सीनेटर के रूप में शपथ लेकर उन्होंने अमेरिकी इतिहास में अपनी अलग जगह बनाई। आगे चलकर सीनेटर, विदेश मंत्री और राष्ट्रपति पद की प्रमुख उम्मीदवार के रूप में उनका सार्वजनिक जीवन इस ऐतिहासिक जीत से शुरू हुए नए राजनीतिक अध्याय का विस्तार बना।
