नई दिल्ली: Google ने भारत में छोटे कारोबारों, किसानों और शिक्षकों तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के व्यावहारिक इस्तेमाल को पहुंचाने के लिए नई पहलों की घोषणा की है। इनमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के विकास के लिए 15 मिलियन डॉलर की सहायता, जलवायु-अनुकूल फसलों पर AI आधारित शोध और शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार शामिल है। कंपनी के अनुसार, इन पहलों का उद्देश्य तकनीक को रोजमर्रा की आर्थिक और सामाजिक जरूरतों से जोड़ना है।
MSME के लिए 15 मिलियन डॉलर की सहायता
Google.org ने The/Nudge के साथ साझेदारी में भारतीय MSME क्षेत्र के लिए 15 मिलियन डॉलर की फंडिंग देने की प्रतिबद्धता जताई है। इस पहल के तहत ऐसे AI-आधारित समाधान विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा, जो छोटे कारोबारों को औपचारिक ऋण तक पहुंच, नियामकीय अनुपालन और नए बाजारों की पहचान में मदद कर सकें।
कार्यक्रम में नए समाधानों के लिए प्रस्ताव आमंत्रित करने की योजना भी शामिल है। इसके अतिरिक्त, छोटे शहरों—विशेषकर टियर-3 और टियर-4 क्षेत्रों—में स्थानीय लोगों को रोजगार-उपयोगी कौशल सिखाने और उन्हें छोटे कारोबारों से जोड़ने के लिए बहुभाषी, आवाज-आधारित मंच विकसित करने की बात कही गई है।
भारत में MSME रोजगार और आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन अनेक छोटे उद्यमों को वित्त, बाजार, गुणवत्ता मानकों और अनुपालन से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। AI आधारित उपकरण इन प्रक्रियाओं को सरल बनाने में मदद कर सकते हैं; हालांकि, वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि समाधान कितने सुलभ, भरोसेमंद और कारोबारों की जरूरतों के अनुरूप बनते हैं।

किसानों और फसल अनुसंधान के लिए AI
कृषि क्षेत्र में Google DeepMind और Google.org ने ICRISAT, HudsonAlpha Institute for Biotechnology तथा University of Washington के साथ मिलकर ज्वार (sorghum) के लिए AI-संचालित आनुवंशिक एटलस विकसित करने की साझेदारी की है। इस शोध का लक्ष्य ऐसे आनुवंशिक गुणों की पहचान में मदद करना है, जो फसल की उत्पादकता और बदलती जलवायु के प्रति उसकी सहनशीलता बढ़ाने में उपयोगी हो सकते हैं। परियोजना में ICRISAT के 90 से अधिक देशों से जुटाए गए 44,000 से ज्यादा बीज नमूनों के संग्रह का उपयोग किया जाएगा। तैयार एटलस को ओपन-एक्सेस रखने की योजना है।
Google DeepMind ने ICRISAT में चना, मूंगफली और अरहर जैसी फसलों पर समान संभावनाओं के अध्ययन के लिए तीन साल की पोस्टडॉक्टोरल फेलोशिप को भी समर्थन देने की बात कही है। इसके साथ ही कंपनी अपने Agricultural Understanding मॉडल को डेवलपरों और शोधकर्ताओं के लिए सार्वजनिक प्रीव्यू में उपलब्ध करा रही है।
किसानों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने के लिए Google के कृषि API को गुजरात के Krushi Pragati प्लेटफॉर्म में Amnex ने एकीकृत किया है। KNN की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मंच ने पिछले एक वर्ष में छह लाख से अधिक किसानों को फसल स्वास्थ्य, कीट प्रबंधन, मिट्टी की स्थिति और मौसम संबंधी 90 करोड़ से अधिक SMS सलाहें भेजीं। ऐसी प्रणालियों की उपयोगिता स्थानीय डेटा की गुणवत्ता, भाषा, नेटवर्क और सलाह की समयबद्धता पर निर्भर करती है।
शिक्षकों के लिए AI प्रशिक्षण का विस्तार
Google के अनुसार, मई से शुरू हुई Google AI Educator Series के माध्यम से 80,000 से अधिक भारतीय शिक्षकों को AI उपकरणों के उपयोग का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इस कार्यक्रम में Gemini और NotebookLM जैसे उपकरणों की मदद से पाठ योजना तैयार करने, शिक्षण सामग्री बनाने और रोजमर्रा की तैयारी का समय घटाने जैसे उपयोग शामिल हैं।

अब यह कार्यक्रम बिहार, मध्य प्रदेश और सिक्किम सहित नए साझेदारों के साथ विस्तारित किया जा रहा है। कंपनी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप मुफ्त, स्वयं-गति से पूरा किए जा सकने वाले ऑनलाइन प्रशिक्षण की भी जानकारी दी है। प्रशिक्षण फिलहाल अंग्रेजी में उपलब्ध है; Google के अनुसार, हिंदी, मराठी, तेलुगु, असमिया, ओड़िया और पंजाबी संस्करण भी जोड़े जाने की योजना है।
इसके अलावा, 100 अटल टिंकरिंग लैब्स में STEM शिक्षा को सहयोग देने के लिए Gemini-संचालित ATL Saathi एप्लिकेशन पर काम किया जा रहा है। शिक्षकों के लिए AI उपयोगी सहायक हो सकता है, लेकिन विद्यार्थियों की जरूरतों, तथ्य-जांच, गोपनीयता और शिक्षक के पेशेवर निर्णय को प्राथमिकता देना भी जरूरी होगा।
AI के प्रभाव को मापना भी जरूरी
इन पहलों से कृषि, शिक्षा और छोटे कारोबारों में AI के उपयोग का दायरा बढ़ सकता है। फिर भी किसी पहल की सफलता का आकलन केवल फंडिंग, प्रशिक्षण प्राप्त लोगों या उपलब्ध डिजिटल उपकरणों की संख्या से नहीं किया जा सकता। यह देखना होगा कि किसानों की फसल संबंधी निर्णय-क्षमता में कितना सुधार हुआ, शिक्षकों का काम कितना आसान हुआ और छोटे उद्यमों को वित्त तथा बाजार तक पहुंच में कितना ठोस लाभ मिला।
भारत में AI का अगला चरण केवल तकनीक उपलब्ध कराने का नहीं, बल्कि उसे स्थानीय जरूरतों के अनुरूप अपनाने और उसके परिणामों को पारदर्शी ढंग से मापने का है। Google की नई पहलें इसी दिशा में एक प्रयास हैं; इनका व्यापक प्रभाव आगे इनके क्रियान्वयन और वास्तविक नतीजों से स्पष्ट होगा।

