गया के शादीपुर घाट पर जितिया स्नान के दौरान हादसा, एसडीआरएफ और गोताखोरों ने रविवार सुबह बरामद किया शव
Gaya। जितिया पर्व के मौके पर फल्गु नदी के शादीपुर घाट पर शनिवार को खुशियों का माहौल अचानक मातम में बदल गया। 19 वर्षीय संजीत कुमार अपने स्वजन के साथ नदी में स्नान करने पहुंचा था।
इसी दौरान उसने एक दोस्त को पानी में डूबते देखा। उसे बचाने के लिए संजीत बिना देर किए गहरे पानी में उतर गया।
संजीत ने दोस्त को तो सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन खुद नदी की गहराई में फंस गया और देखते ही देखते पानी में डूब गया।
शाम तक चला तलाश अभियान, रात में रोकनी पड़ी खोज
घटना के बाद घाट पर मौजूद लोगों में अफरातफरी मच गई। ग्रामीणों के साथ स्थानीय तैराक और गोताखोर नदी में उतरकर संजीत को तलाशने लगे। काफी प्रयास के बावजूद शनिवार देर शाम तक उसका कोई सुराग नहीं मिला।

अंधेरा बढ़ने के बाद नदी में तलाशी अभियान चलाना मुश्किल हो गया। इसके चलते रात में खोज रोकनी पड़ी। परिवार और ग्रामीण पूरी रात उसके मिलने की उम्मीद लगाए रहे।
सुबह फिर शुरू हुई तलाश, नदी से निकला शव
रविवार सुबह एसडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों की टीम ने दोबारा फल्गु नदी में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। करीब 16 घंटे बाद सुबह सात बजे टीम को सफलता मिली और काफी मशक्कत के बाद संजीत का शव नदी से बरामद कर लिया गया।
शव बाहर आते ही घाट पर मौजूद ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। घटना की सूचना गांव तक पहुंचते ही परिवार में मातम पसर गया।
माता-पिता का इकलौता बेटा था संजीत
संजीत गया पासवान का इकलौता पुत्र था। वह अपने परिवार का इकलौता चिराग था। उसके पिता रेलवे में ग्रुप-डी के पद पर कार्यरत हैं। बेटे की मौत की खबर से परिवार पूरी तरह टूट गया है।

परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम नहीं कराने को लेकर बुनियादगंज थाना में लिखित आवेदन दिया है। पुलिस ने मामले की छानबीन की है।
घाट पर स्थायी बचाव व्यवस्था की मांग
घटना के बाद शादीपुर के मुखिया हैप्पी सिंह ने बुनियादगंज थाना क्षेत्र में एसडीआरएफ की टीम की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि नदी में डूबने जैसी घटनाओं में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में क्षेत्र के लिए बचाव दल उपलब्ध रहने से राहत और खोज अभियान जल्द शुरू किया जा सकता है।
बालू खनन के गड्ढों पर भी उठे सवाल
हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने फल्गु नदी में बालू खनन से बने गहरे गड्ढों को लेकर चिंता जताई है। ग्रामीणों के मुताबिक, शादीपुर घाट के आसपास कई स्थानों पर खनन के कारण गड्ढे बन गए हैं।
पानी कम होने की स्थिति में ये गड्ढे ऊपर से दिखाई नहीं देते और उनकी वास्तविक गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। ग्रामीणों का कहना है कि यही स्थिति नदी में स्नान करने वालों के लिए खतरा बढ़ा रही है।

जितिया के दिन हुई इस घटना ने एक बार फिर नदी घाटों पर सुरक्षा और बचाव व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
