सारण जिले के पूर्व जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा) अजीत अमर से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई की। सुबह-सुबह ईओयू की टीम ने छपरा स्थित उनके सरकारी आवास पर पहुंचकर दस्तावेजों और विभागीय रिकॉर्ड की गहन जांच शुरू की। कार्रवाई के दौरान सरकारी आवास में मौजूद विभिन्न संचिकाओं, बैंकिंग से जुड़े दस्तावेजों और अन्य अभिलेखों को बारीकी से खंगाला गया।
सुबह से सरकारी आवासीय परिसर में अधिकारियों की आवाजाही बढ़ने के साथ ही इलाके में चर्चा का माहौल बन गया। कार्रवाई की सूचना मिलते ही शिक्षा विभाग और प्रशासनिक महकमे में भी हलचल तेज हो गई। स्थानीय लोगों के बीच भी यह मामला दिनभर चर्चा का विषय बना रहा।
2.51 करोड़ रुपये के कथित लेन-देन की जांच
सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन से जुड़े आरोपों की जांच का हिस्सा है। जांच एजेंसियों को मिली शिकायत में दावा किया गया है कि अजीत अमर की छपरा में प्रतिनियुक्ति के दौरान उनके और उनकी पत्नी के बैंक खातों में बड़ी राशि का लेन-देन हुआ।
प्राथमिक जांच में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, छपरा में उनकी 32 महीने की सेवा अवधि के दौरान वेतन मद में उन्हें लगभग 27.43 लाख रुपये मिलने का अनुमान है। वहीं आरोप है कि इसी अवधि में उनके और उनकी पत्नी के बैंक खातों से 2.51 करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन हुआ। आय और बैंकिंग लेन-देन के बीच इस बड़े अंतर को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद आर्थिक अपराध इकाई ने मामले की जांच शुरू की।
EOU ने सरकारी आवास से जुटाएअहम दस्तावेज
छापेमारी के दौरान ईओयू की टीम ने सरकारी आवास में मौजूद विभागीय फाइलों, बैंकिंग रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेजों और अन्य महत्वपूर्ण कागजात की जांच की। अधिकारियों ने कई दस्तावेजों का सत्यापन भी किया। माना जा रहा है कि जांच एजेंसी इन अभिलेखों के आधार पर वित्तीय लेन-देन की पूरी श्रृंखला को समझने का प्रयास कर रही है।
हालांकि, ईओयू की ओर से जब्त किए गए दस्तावेजों या जांच के दौरान मिले तथ्यों को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।
शिक्षा विभाग पहले ही कर चुका है कार्रवाई
मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने भी प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की थी। विभाग ने 30 जून 2026 को अजीत अमर की छपरा से प्रतिनियुक्ति समाप्त कर उन्हें उनके मूल पदस्थापन सहरसा भेज दिया था। वर्तमान में वह सहरसा में पदस्थापित हैं। विभागीय स्तर पर भी पूरे मामले की समीक्षा की जा रही है।
जांच के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
ईओयू की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब सरकारी विभागों में वित्तीय पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के मामलों पर लगातार निगरानी बढ़ाई जा रही है। जांच एजेंसी अब बैंक खातों में हुए लेन-देन, दस्तावेजों और उपलब्ध वित्तीय रिकॉर्ड का मिलान करेगी। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो संबंधित कानूनी और विभागीय कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सकती है।
आय से अधिक संपत्ति के मामलों में क्या होती है आगे की प्रक्रिया
आय से अधिक संपत्ति या संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के मामलों में जांच एजेंसियां सबसे पहले संबंधित अधिकारी की आय के सभी वैध स्रोतों, बैंक खातों, संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन का विस्तृत मिलान करती हैं। इसके लिए बैंक रिकॉर्ड, आयकर विवरण, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और अन्य वित्तीय अभिलेखों की जांच की जाती है।
यदि जांच में आय के ज्ञात स्रोतों की तुलना में संपत्ति या लेन-देन असामान्य पाए जाते हैं और उनका संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तो एजेंसी अपनी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर सकती है। हालांकि, किसी भी व्यक्ति को दोषी तभी माना जाता है जब सक्षम न्यायालय में आरोप सिद्ध हो जाएं।
फिलहाल जांच जारी है और एजेंसी ने मामले के सभी पहलुओं की पड़ताल शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। इसलिए अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित वित्तीय लेन-देन के पीछे वास्तविक स्थिति क्या थी।