एक साल में खुदरा कीमत लगभग दोगुनी, थोक भाव में 123% से ज्यादा उछाल; महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और दक्षिणी राज्यों से आपूर्ति बढ़ने पर त्योहारों के दौरान मिल सकती है राहत
नई दिल्ली। दशहरा, Diwali और छठ जैसे त्योहारों से पहले प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम परिवारों का रसोई बजट बिगाड़ दिया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 10 अक्टूबर 2026 को प्याज की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत 52.99 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। एक साल पहले इसी अवधि में यह 26.65 रुपये प्रति किलो थी। यानी सालाना आधार पर औसत खुदरा भाव लगभग दोगुना हो गया है।
हालांकि, आने वाले हफ्तों में कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। कारोबारियों के अनुसार, खरीफ की नई फसल बाजार में पहुंचने और पुरानी फसल का स्टॉक उपलब्ध रहने से आपूर्ति बढ़ सकती है। इससे अक्टूबर के अंत से नवंबर के दौरान प्याज के दाम पर दबाव कम होने की संभावना है। लेकिन कीमतें कितनी और कब घटेंगी, यह नई फसल की आवक, मांग और अलग-अलग मंडियों की स्थिति पर निर्भर करेगा।
अभी कितना है प्याज का भाव?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 10 अक्टूबर को प्याज की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत 52.99 रुपये प्रति किलो रही। एक महीने पहले यानी करीब 10 सितंबर को यह 53.10 रुपये प्रति किलो थी। इस तरह महीने भर में औसत भाव में मामूली गिरावट आई है, लेकिन पिछले साल के मुकाबले कीमत अब भी काफी ऊंची है।

थोक बाजार में भी प्याज महंगा बना हुआ है। 10 अक्टूबर को इसकी अखिल भारतीय औसत थोक कीमत 4,591 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज की गई। यह एक महीने पहले के मुकाबले 2.4 प्रतिशत और एक साल पहले की तुलना में 123.3 प्रतिशत अधिक है।
खुदरा और थोक कीमतों में यह अंतर बताता है कि बाजार में प्याज की लागत पर दबाव बना हुआ है। हालांकि, अलग-अलग शहरों, मंडियों और दुकानों में प्याज का वास्तविक भाव औसत आंकड़ों से अलग हो सकता है।
नई खरीफ फसल से कब मिलेगी राहत?
प्याज की खरीफ फसल की आवक आम तौर पर सितंबर के अंत से नवंबर के बीच मंडियों में बढ़ने लगती है। इसके बाजार तक पहुंचने से उपलब्धता बेहतर हो सकती है और कीमतों में नरमी आ सकती है।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, हॉर्टिकल्चर प्रोड्यूस एक्सपोर्टर एसोसिएशन के विकास सिंह ने बताया कि कई बाजारों में खरीफ प्याज की आवक शुरू हो गई है। कारोबारियों को उम्मीद है कि महाराष्ट्र और प्याज उत्पादन करने वाले अन्य राज्यों से आपूर्ति बढ़ने पर नवंबर तक बाजार में उपलब्धता बेहतर होगी।

रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में पुरानी फसल का पर्याप्त भंडार होने की उम्मीद है, जिससे नवंबर के तीसरे सप्ताह तक मांग पूरी करने में मदद मिल सकती है। कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से नवंबर के अंत तक आपूर्ति जारी रहने की संभावना जताई गई है। वहीं, महाराष्ट्र की शुरुआती खरीफ फसल की सीमित मात्रा अक्टूबर के अंत तक बाजार में आने की उम्मीद है।
इससे त्योहारों के दौरान प्याज की उपलब्धता बढ़ सकती है। हालांकि, यह कारोबारियों का अनुमान है, कीमतों में गिरावट की गारंटी नहीं।
थोक कीमतों में एक साल में 123% से ज्यादा उछाल क्यों अहम?
थोक बाजार में प्याज की औसत कीमत एक साल में 123.3 प्रतिशत बढ़कर 4,591 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। इसका असर खुदरा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। जब मंडियों में प्याज महंगा मिलता है, तो उसका असर दुकानों पर बिकने वाले भाव पर पड़ सकता है।
त्योहारों के मौसम में घरों में खाना बनाने और बाजारों में मांग बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे समय में नई फसल की आवक और पुरानी फसल का भंडार कीमतों को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

अगर महाराष्ट्र और दक्षिणी राज्यों से अनुमान के मुताबिक आपूर्ति बढ़ती है, तो बाजार में उपलब्धता सुधर सकती है। लेकिन मौसम, फसल की गुणवत्ता, परिवहन और मांग में बदलाव भी कीमतों को प्रभावित करेंगे।
आम परिवारों को अभी क्या उम्मीद रखनी चाहिए?
फिलहाल प्याज की औसत खुदरा कीमत करीब 53 रुपये प्रति किलो है, जो पिछले साल की तुलना में काफी अधिक है। आने वाले हफ्तों में नई खरीफ फसल की आवक बढ़ने पर राहत मिलने की संभावना है। कारोबारियों को नवंबर तक बाजार में बेहतर उपलब्धता की उम्मीद है।
हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि दिवाली या छठ तक प्याज कितने रुपये किलो बिकेगा। कीमतों में वास्तविक गिरावट तभी स्पष्ट होगी, जब मंडियों में नई फसल की आवक लगातार बढ़ेगी और उसका असर खुदरा बाजार तक पहुंचेगा। फिलहाल आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की उम्मीद तो है, लेकिन उसके लिए नई फसल की आपूर्ति पर नजर रखना जरूरी होगा।
