औरंगाबाद जिले के देव प्रखंड कार्यालय में सरकारी राशि के कथित गबन के मामले में पुलिस ने आदेशपाल रंजन कुमार उर्फ रंजन गिरी को गिरफ्तार किया है। मामले में 23 लाख 49 हजार 638 रुपये की अवैध निकासी का आरोप है। जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। प्रशासन के अनुसार, जांच और ऑडिट रिपोर्ट में भी सरकारी राशि के गबन की पुष्टि हुई है। मामले में प्रधान लिपिक, निम्नवर्गीय लिपिक और कोषागार कार्यालय के मेकर-चेकर को भी नामजद आरोपित बनाया गया है।
23.49 लाख रुपये की अवैध निकासी का मामला
जागरण संवाददाता, औरंगाबाद के अनुसार, देव प्रखंड कार्यालय में सरकारी राशि के गबन के मामले में पुलिस ने मंगलवार को आदेशपाल रंजन कुमार उर्फ रंजन गिरी को गिरफ्तार किया। 23 लाख 49 हजार 638 रुपये की अवैध निकासी जून 2023 से सितंबर 2025 के बीच किए जाने का आरोप है।
बताया जाता है कि 30 हजार रुपये के बिल पर 60 हजार या 80 हजार रुपये तक की निकासी की गई। जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने बताया कि अधिकारियों की जांच और ऑडिट रिपोर्ट में भी गबन का मामला सत्य पाया गया है।
रंजन कुमार के अलावा देव प्रखंड कार्यालय के प्रधान लिपिक रिपुसुदन तिवारी, निम्नवर्गीय लिपिक शशि कुमार और कोषागार कार्यालय के मेकर-चेकर के खिलाफ नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।

तीन बीडीओ और ट्रेजरी अधिकारी से स्पष्टीकरण
मामले में तीन प्रखंड विकास पदाधिकारियों (बीडीओ) और ट्रेजरी अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जिन अधिकारियों से जवाब मांगा गया है, उनमें बीडीओ अंकेशा यादव, कुंदन कुमार और मीरा कुमारी शामिल हैं।
अधिकारियों के जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि सरकारी राशि के गबन और भ्रष्टाचार के मामलों में किसी को बख्शा नहीं जाएगा। जांच में जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।
इस मामले में स्थापना शाखा के अधिकारी को प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है। जांच में दोषी पाए गए अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी प्राथमिकी की कार्रवाई की जा रही है।
प्रखंड कार्यालय के खर्च की राशि में गड़बड़ी
जानकार सूत्रों के अनुसार, यह मामला करीब तीन से चार वर्ष पुराना है। प्रखंड कार्यालय और अन्य मदों में खर्च के लिए आवंटित सरकारी राशि में गड़बड़ी की बात सामने आई थी।

बताया जाता है कि मामला पहले भी उजागर हुआ था, लेकिन बाद में इसकी चर्चा थम गई थी। अब अधिकारियों की जांच और ऑडिट रिपोर्ट में गबन की पुष्टि होने के बाद कार्रवाई तेज हुई है। हालांकि, राशि की निकासी और कथित गबन के पूरे तरीके को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है।
बीडीओ के अलावा अन्य अधिकारियों की भूमिका की जांच
गबन के मामले में तत्कालीन बीडीओ समेत अन्य अधिकारियों की संलिप्तता की आशंका जताई गई है। प्रशासनिक जांच में उनकी भूमिका स्पष्ट होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
रंजन कुमार की नियुक्ति अनुकंपा के आधार पर हुई थी। वह वर्तमान में रफीगंज में रहता है और देव प्रखंड कार्यालय में कार्यरत था। स्थानीय स्तर पर प्रखंड कार्यालय में उसके प्रभाव को लेकर भी चर्चा होती रही है। हालांकि, गबन के मामले में अन्य अधिकारियों की भूमिका और उनकी जवाबदेही जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
