जमुई: गिद्धौर थाना क्षेत्र के मौरा गांव में करीब दो महीने पहले हुई गोलीबारी की घटना ने अब नया मोड़ ले लिया है। गोली लगने के बाद लंबे समय से जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही रूपा देवी की इलाज के दौरान पटना में मौत हो गई। उनकी मौत की खबर सामने आने के बाद इलाके में एक बार फिर घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि वारदात के इतने समय बाद भी गोली चलाने वाले अपराधी पुलिस की गिरफ्त से बाहर क्यों हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, 21 अगस्त को मौरा में हुई गोलीबारी के दौरान रूपा देवी के पेट में गोली लगी थी। घटना के बाद उनकी हालत गंभीर बताई गई थी और बेहतर इलाज के लिए उन्हें पटना ले जाया गया था। परिजनों और स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि उपचार के बाद उनकी हालत में सुधार होगा, लेकिन करीब दो महीने तक चले इलाज के बाद उनकी मौत हो गई। इस घटना ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।
तीन की संख्या में पहुंचे थे हमलावर
बताया जा रहा है कि घटना के समय तीन अपराधी मौके पर पहुंचे थे। आरोप है कि इन्हीं में से एक ने गोली चलाई, जो रूपा देवी के पेट में जा लगी। गोली लगने के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई थी। घायल महिला को तत्काल इलाज के लिए ले जाया गया और बाद में उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए पटना में उपचार कराया गया। हालांकि, लंबी चिकित्सा के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
घटना के बाद से ही स्थानीय स्तर पर अपराधियों की गिरफ्तारी की मांग उठती रही है। अब रूपा देवी की मौत के बाद इस मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। परिवार के लिए यह सिर्फ एक पुराने गोलीकांड में हुई मौत नहीं, बल्कि उस हमले के पीछे मौजूद आरोपितों तक पुलिस के पहुंचने का इंतजार भी है।

डीएम के आदेश पर देर रात पोस्टमार्टम
रूपा देवी की मौत के बाद प्रशासनिक स्तर पर शव के पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कराई गई। डीएम के आदेश के बाद पुलिस ने देर रात सदर अस्पताल में शव का पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी होने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए पुलिस की जांच महत्वपूर्ण होगी।
इस मामले में अब पुलिस के सामने चुनौती केवल गोली चलाने वाले व्यक्ति की पहचान और गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि घटना में शामिल सभी आरोपितों की भूमिका स्पष्ट करना भी अहम होगा। करीब दो महीने पहले हुई वारदात में तीन लोगों के आने की बात सामने आई थी। ऐसे में जांच एजेंसियों को यह पता लगाना होगा कि हमले की वजह क्या थी और वारदात से पहले या बाद में आरोपितों की गतिविधियां किस तरह की थीं।
अब तक किसी अपराधी की गिरफ्तारी नहीं
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि रूपा देवी की मौत के बावजूद अब तक इस मामले में किसी अपराधी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। घटना के बाद से ही पुलिस पर आरोपितों तक पहुंचने का दबाव रहा है। महिला की मौत के बाद मामले की प्रकृति और गंभीर हो गई है, इसलिए पुलिस की कार्रवाई पर स्थानीय लोगों की नजर बनी हुई है।
रूपा देवी की मौत ने अगस्त में हुई उस घटना की याद फिर ताजा कर दी है, जिसमें एक महिला को गोली लगने के बाद लंबे समय तक इलाज कराना पड़ा। अब परिवार को न्याय और आरोपितों की गिरफ्तारी का इंतजार है। पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि हमले के पीछे वास्तविक कारण क्या था और तीनों संदिग्धों की इसमें क्या भूमिका थी।

फिलहाल, पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और मामले में आरोपितों की गिरफ्तारी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। पुलिस की आगे की जांच और कार्रवाई से ही यह साफ हो सकेगा कि इस गोलीकांड के जिम्मेदार लोगों तक कानून कब पहुंचता है।
