Delhi SIR: ‘No Mapping’ और ‘Logical Discrepancies’ के आधार पर नोटिस; रेखा गुप्ता का रिकॉर्ड सत्यापन के बाद साफ, केजरीवाल और परिवार के पुराने SIR रिकॉर्ड से विवरण नहीं हुए लिंक
नई दिल्ली। दिल्ली में मतदाता सूची के चल रहे Special Intensive Revision (SIR) के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल, राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल और पूर्व दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा समेत करीब 33.13 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियां चिह्नित की गई हैं।
इन मतदाताओं को रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी स्पष्ट करने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। हालांकि, नोटिस मिलना अपने आप में किसी मतदाता को अयोग्य घोषित करना या उसका नाम स्थायी रूप से मतदाता सूची से हटाना नहीं है। संबंधित मतदाताओं को दस्तावेज और स्पष्टीकरण देने का अवसर दिया जा रहा है।
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने 19 सितंबर को उन मतदाताओं की सूची सार्वजनिक की, जिनके रिकॉर्ड SIR के दौरान जांच के लिए चिह्नित किए गए हैं।
यह सूची 31 अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के करीब तीन सप्ताह बाद सामने आई। सूची में मतदाताओं को मुख्य रूप से ‘No Mapping’ और ‘Logical Discrepancies’ जैसी दो श्रेणियों में रखा गया है।
पहले समझिए SIR क्या है
SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची की विस्तृत जांच और पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसमें चुनाव अधिकारी मौजूदा मतदाता रिकॉर्ड की जानकारी को पुराने चुनावी रिकॉर्ड से मिलाते हैं और यह देखते हैं कि मतदाता का नाम, उम्र, परिवार से जुड़ी जानकारी और अन्य विवरण सही हैं या नहीं।
सरल भाषा में समझें तो SIR में यह जांच की जा रही है कि जिस व्यक्ति का नाम अभी मतदाता सूची में है, उसका रिकॉर्ड पुराने मतदाता रिकॉर्ड से ठीक तरह जुड़ रहा है या नहीं और उसके विवरण में आपस में कोई असामान्यता तो नहीं है।
जहां रिकॉर्ड में कोई सवाल या अंतर मिलता है, वहां मतदाता से जानकारी और दस्तावेज मांगकर उसे स्पष्ट करने का मौका दिया जाता है।
‘No Mapping’ का मतलब क्या है?
No Mapping का अर्थ है कि मौजूदा मतदाता का रिकॉर्ड पिछली SIR प्रक्रिया की मतदाता सूची के संबंधित रिकॉर्ड से लिंक या मैच नहीं हो पाया।
इसे आसान उदाहरण से समझें। अगर किसी मतदाता का नाम और अन्य विवरण मौजूदा सूची में दर्ज है, लेकिन पुराने SIR रिकॉर्ड में उसके नाम या संबंधित विवरण का ऐसा रिकॉर्ड नहीं मिल रहा जिससे दोनों को जोड़ा जा सके, तो उसे ‘No Mapping’ श्रेणी में रखा जा सकता है।
इसका मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति फर्जी मतदाता है या उसका नाम तुरंत काट दिया गया है। ऐसे मामले में मतदाता को अपने रिकॉर्ड और पात्रता से जुड़े दस्तावेज देकर स्थिति स्पष्ट करने का मौका मिलता है।
‘Logical Discrepancy’ क्या होती है?
Logical Discrepancy का मतलब है कि मतदाता के रिकॉर्ड में दर्ज दो या अधिक जानकारियां आपस में तार्किक रूप से मेल नहीं खा रही हैं।
उदाहरण के लिए, अगर किसी मतदाता की उम्र और उसके माता-पिता की उम्र के बीच दर्ज अंतर सामान्य गणना के हिसाब से संभव नहीं दिखता, तो इसे एक तार्किक विसंगति माना जा सकता है।
इसी तरह नाम, माता-पिता के नाम या उम्र से जुड़ी अलग-अलग प्रविष्टियों में अंतर होने पर भी रिकॉर्ड को जांच के लिए चिह्नित किया जा सकता है।
इसका उद्देश्य रिकॉर्ड की जानकारी को जांचना है। केवल ऐसी विसंगति सामने आने से यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि मतदाता का नाम गलत है या वह वोट देने के योग्य नहीं है। अंतिम स्थिति दस्तावेजों और सत्यापन के बाद तय होती है।
रेखा गुप्ता को क्यों मिला नोटिस?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का नाम ‘Logical Discrepancy’ वाली श्रेणी में आया था। उनके रिकॉर्ड में उनकी उम्र और उनके माता-पिता की उम्र के बीच का अंतर 15 साल से कम दर्ज था। इसी विसंगति के आधार पर उनका रिकॉर्ड जांच के लिए चिह्नित किया गया और नोटिस जारी हुआ।
लेकिन यह मामला अब स्पष्ट हो चुका है। निर्वाचन अधिकारियों के मुताबिक, रेखा गुप्ता के दस्तावेजों और रिकॉर्ड का सत्यापन किया गया, जिसके बाद उनकी चुनावी प्रविष्टि को वैध मानते हुए सत्यापित कर दिया गया।
यानी उनके मामले में नोटिस जारी होने के बाद की जांच पूरी हो चुकी है। उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जाना है।
केजरीवाल और परिवार ‘No Mapping’ में
पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के मामले में रिकॉर्ड से जुड़ी समस्या अलग है। उनके मौजूदा मतदाता विवरण को पिछली SIR सूची के रिकॉर्ड से लिंक नहीं किया जा सका। इसलिए उन्हें ‘Unmapped with Last SIR’ यानी पिछली SIR सूची से मैप नहीं होने के आधार पर नोटिस जारी किया गया।
केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल, उनके माता-पिता और बेटे पुलकित को भी इसी तरह के आधार पर नोटिस मिला है। यानी इन मामलों में मुख्य सवाल पुराने SIR रिकॉर्ड के साथ मौजूदा मतदाता विवरण के लिंक नहीं होने का है।
कपिल सिब्बल और वीरेंद्र सचदेवा भी सूची में
इस सूची में राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल का नाम भी शामिल है। उनके मौजूदा विवरण को पिछली SIR मतदाता सूची से मैच नहीं किया जा सका, जिसके कारण उन्हें नोटिस जारी किया गया।
पूर्व दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा को भी नोटिस मिला है। उनके परिवार के कुछ सदस्यों के रिकॉर्ड में नाम से संबंधित अंतर पाए जाने के कारण उन्हें भी नोटिस जारी किए गए हैं।
33.13 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियां
निर्वाचन अधिकारियों की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल करीब 33.13 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड को नोटिस के लिए चिह्नित किया गया है। इनमें 13,79,785 मतदाता No Mapping श्रेणी में हैं, जबकि 19,33,134 मतदाताओं के रिकॉर्ड में Logical Discrepancies पाई गई हैं। दोनों आंकड़ों को जोड़ने पर यह संख्या करीब 33.13 लाख होती है।
इन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में मौजूद हैं, लेकिन उन्हें अपने रिकॉर्ड से जुड़ी स्थिति स्पष्ट करने के लिए सुनवाई में शामिल होना होगा। उन्हें जरूरी दस्तावेज और जवाब देने का अवसर दिया जाएगा। इसलिए नोटिस की प्रक्रिया को अंतिम तौर पर नाम हटाने की कार्रवाई के रूप में नहीं देखा जा सकता।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 32.8% की कमी
SIR के बाद 31 अगस्त को जारी दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची में 97,53,577 मतदाता दर्ज हैं। यह 30 जून को दर्ज 1,45,10,299 मतदाताओं की तुलना में करीब 32.8% कम है।
मतदाताओं की संख्या में इतनी बड़ी कमी के पीछे अलग-अलग कारणों से रिकॉर्ड की जांच और नामों का ड्राफ्ट सूची में शामिल न होना है। लेकिन जिन लोगों के रिकॉर्ड को लेकर आपत्ति या विसंगति है, उनके लिए दावा, आपत्ति और सत्यापन की प्रक्रिया रखी गई है।
इसलिए ड्राफ्ट सूची के आंकड़े को अंतिम मतदाता सूची का आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
दिल्ली में मतदान केंद्र भी बढ़े
SIR के दौरान दिल्ली में मतदान केंद्रों की संख्या में भी बदलाव किया गया है। राजधानी में अब 14,947 मतदान केंद्र हैं, जबकि पहले इनकी संख्या 13,033 थी। यानी करीब 15% की बढ़ोतरी हुई है।
सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान केंद्रों का rationalisation यानी पुनर्गठन किया गया है। निर्वाचन अधिकारियों ने सभी मतदान केंद्रों की जानकारी भी सार्वजनिक की है।
सरोजिनी नगर में एक बूथ पर 84 रिकॉर्ड चिह्नित
SIR के दौरान सामने आए बूथवार दस्तावेज यह भी बताते हैं कि मतदाता रिकॉर्ड में किस तरह की अलग-अलग विसंगतियां सामने आई हैं।
नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के सरोजिनी नगर के एक मतदान केंद्र पर 84 मतदाताओं के रिकॉर्ड को या तो पुराने SIR रिकॉर्ड से मैप नहीं होने या अन्य विसंगतियों के कारण चिह्नित किया गया।
इनमें 37 मामले No Mapping के थे, जो सबसे बड़ी श्रेणी रही। इसके अलावा 24 रिकॉर्ड में माता-पिता के नाम से जुड़ी विसंगति और 13 मामलों में मतदाता के अपने नाम में अंतर दर्ज किया गया।
दस्तावेज में सात ऐसे मामले भी दर्ज हैं, जिनमें माता-पिता और बच्चे की उम्र का अंतर नौ महीने से कम दर्ज था। वहीं, एक मतदाता के रिकॉर्ड में खुद और माता-पिता में से एक की उम्र के बीच 50 साल से अधिक का अंतर दर्ज किया गया।
एक मामले में माता-पिता के नाम में अंतर के साथ संतान की उम्र से जुड़ी विसंगति भी दर्ज थी, जबकि एक मामले में गड़बड़ी का कारण स्पष्ट नहीं किया गया था। इन 84 मतदाताओं की उम्र 19 से 76 वर्ष के बीच थी और इनमें पुरुष तथा महिलाएं दोनों शामिल थे।
अब आगे क्या होगा?
नोटिस पाने वाले मतदाताओं को संबंधित निर्वाचन अधिकारी के सामने अपना जवाब और जरूरी दस्तावेज देने होंगे। इसके बाद रिकॉर्ड की जांच और सत्यापन के आधार पर यह तय किया जाएगा कि संबंधित प्रविष्टि को किस तरह सही या सत्यापित किया जाना है।
इस पूरी प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी रिकॉर्ड में विसंगति मिलना और किसी व्यक्ति का नाम अंतिम मतदाता सूची से हटना दो अलग-अलग बातें हैं।
पहले मतदाता को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर दिया जाता है। इसके बाद दस्तावेजों और सत्यापन के आधार पर अंतिम फैसला होता है। दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जानी है।