Alfred Cooke: Vir Chakra से सम्मानित Flight Lieutenant Alfred Tyrone Cooke ने 7 सितंबर 1965 को Kalaikunda के आसमान में जिस अदम्य साहस का परिचय दिया, उसकी पूरी कहानी उन्होंने अपने जीवन के अंतिम इंटरव्यू में सुनाई।
NDTV के Shiv Aroor और Vishnu Som के साथ यह बातचीत रिकॉर्ड होने के सिर्फ तीन दिन बाद 18 सितंबर 2026 को 87 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया।
‘मैं डर रहा था, लेकिन वे हमारे बेस पर हमला कर रहे थे… हम भागेंगे नहीं’
1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध। पश्चिम बंगाल का Kalaikunda Airfield। आसमान में पाकिस्तानी F-86 Sabre लड़ाकू विमान और उनकी तरफ बढ़ते भारतीय Hawker Hunter।
इसी युद्धक स्थिति के बीच Flight Lieutenant Alfred Tyrone Cooke का नाम भारतीय वायुसेना के इतिहास में दर्ज हुआ।

7 सितंबर 1965 को Kalaikunda पर पाकिस्तानी विमानों के हमले के दौरान Cooke combat air patrol पर थे। हालात ऐसे बने कि वह कई पाकिस्तानी Sabre विमानों के सामने आ गए। NDTV के अंतिम इंटरव्यू में उन्होंने उस दिन की घटना को दशकों बाद भी उसी स्पष्टता के साथ याद किया, जैसे वह दृश्य अभी उनके सामने हो।
उनके मुताबिक, जब उनके wingman Flight Lieutenant Mamgain ने रेडियो पर डर महसूस होने की बात कही, तब Cooke ने उसे याद दिलाया कि हमला उनके अपने एयरबेस पर हो रहा है। उनका काम लड़ना था, पीछे हटना नहीं।
यही वह क्षण था जब एक सामान्य combat mission इतिहास के सबसे यादगार aerial engagements में बदल गया।
आसमान से कुछ फीट ऊपर चल रही थी जिंदगी और मौत की लड़ाई
Cooke की कहानी की सबसे असाधारण बात सिर्फ यह नहीं थी कि वह दुश्मन के विमानों से भिड़े। असली रोमांच उस ऊंचाई और परिस्थितियों में था, जिसमें यह लड़ाई हुई।
NDTV के मुताबिक यह dogfight कई मौकों पर जमीन से सिर्फ करीब 20-30 फीट की ऊंचाई पर पहुंच गई थी। इतनी कम ऊंचाई पर तेज गति से उड़ते लड़ाकू विमानों के बीच एक छोटी-सी गलती भी जानलेवा हो सकती थी।

Cooke ने एक पाकिस्तानी Sabre को निशाना बनाया। विमान उनके हमले में हवा में ही टूट गया। इसके बाद वह तुरंत दूसरे विमान की ओर बढ़े। लड़ाई खत्म नहीं हुई थी।
आधिकारिक वीर चक्र रिकॉर्ड भी दर्ज करता है कि Cooke ने दुश्मन के विमान को मार गिराने के बाद दूसरे विमान के पीछे अपनी स्थिति बनाई, लेकिन तब तक उनके विमान का ammunition खत्म हो चुका था। इसके बावजूद उन्होंने पीछा जारी रखा और दुश्मन के विमानों को पीछे हटने पर मजबूर किया।
इसी असाधारण साहस और कर्तव्यनिष्ठा के लिए उन्हें Vir Chakra से सम्मानित किया गया।
‘अगर सही ammunition होता तो कहानी कुछ और होती…’
लेकिन Alfred Cooke अपने उस मिशन को सिर्फ एक वीरता की कहानी के तौर पर याद नहीं करते थे।
उनके भीतर उस दिन के ammunition को लेकर एक शिकायत भी दशकों तक बनी रही।

अंतिम इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उनके Hawker Hunter में युद्ध के लिए जिस तरह ammunition configure किया गया था, उसे लेकर वह बेहद असंतुष्ट थे। उनके अनुसार aircraft में इस्तेमाल हुआ ammunition वह नहीं था, जिसकी युद्ध जैसी परिस्थिति में अपेक्षा की जाती थी।
उनका मानना था कि अगर उनके पास सही ammunition होता तो वह और अधिक दुश्मन विमानों को मार गिराने की स्थिति में हो सकते थे।
यह बात उनके लिए सिर्फ एक तकनीकी कमी नहीं थी। यह उस युद्ध की एक ऐसी स्मृति थी जिसे उन्होंने छह दशक से ज्यादा समय तक अपने भीतर संभालकर रखा।
NDTV के इंटरव्यू में Cooke ने इस घटना को लेकर अपनी नाराजगी और निराशा को बेहद साफ शब्दों में सामने रखा।
जब गोलियां लगभग खत्म थीं, तब भी साथी को अकेला नहीं छोड़ा
इस पूरी कहानी में शायद सबसे भावुक हिस्सा वह है जिसे Cooke ने खुद अपने जीवन के सबसे बहादुर कामों में से एक माना।
जब उनका ammunition लगभग समाप्त हो चुका था, तब भी वह लड़ाई से पूरी तरह अलग नहीं हुए। उनका ध्यान अपने साथी और उस खतरे पर था, जिसका सामना वह कर रहा था।

Cooke ने अंतिम इंटरव्यू में अपने wingman को बचाने की घटना को याद किया। उनके लिए वीरता का अर्थ सिर्फ दुश्मन का विमान गिराना नहीं था। अपने साथी को खतरे में देखकर उसके लिए वापस लड़ना भी उतना ही महत्वपूर्ण था।
यही शायद उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी पहचान थी—युद्ध के बीच भी मिशन से ज्यादा अपने साथ उड़ रहे साथी की जिंदगी की चिंता।
Vir Chakra मिला, लेकिन सवाल भी साथ रहे
Kalaikunda की उस लड़ाई ने Alfred Cooke को भारतीय वायुसेना के वीर योद्धाओं की सूची में अमर कर दिया। लेकिन युद्ध के बाद उनके मन में कई सवाल भी रहे।
उन्होंने बाद के वर्षों में भारतीय वायुसेना की कुछ व्यवस्थाओं, युद्ध के दौरान लिए गए फैसलों और जवाबदेही से जुड़े मुद्दों पर अपनी असहमति जाहिर की। यही असंतोष आगे चलकर उनके IAF छोड़ने के फैसले से भी जुड़ा।
Cooke ने 1968 में भारतीय वायुसेना छोड़ दी और बाद में Australia में बस गए। लेकिन भारत और अपनी पुरानी squadron से उनका रिश्ता पूरी तरह कभी खत्म नहीं हुआ।
आखिरी इंटरव्यू बना उनकी आवाज का दस्तावेज
सितंबर 2026 में वह भारत लौटे थे। इसी दौरान NDTV के defence journalists Shiv Aroor और Vishnu Som ने उनसे बातचीत की।
किसी को शायद अंदाजा नहीं था कि यह बातचीत उनके जीवन की आखिरी सार्वजनिक बातचीत बन जाएगी।
इंटरव्यू रिकॉर्ड होने के सिर्फ तीन दिन बाद, 18 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 87 वर्ष की उम्र में Alfred Tyrone Cooke का निधन हो गया।
उनके जाने के बाद यह बातचीत महज एक interview नहीं रह गई है।
यह उस व्यक्ति की अपनी आवाज में दर्ज आखिरी गवाही है, जिसने 1965 में आसमान में दुश्मन का सामना किया, अपने साथी के लिए लड़ाई जारी रखी, अपने अनुभवों पर सवाल उठाए और छह दशक बाद भी उस एक दिन को अपनी स्मृतियों में जीवित रखा।
भारतीय वायुसेना ने भी उनके निधन पर श्रद्धांजलि देते हुए Kalaikunda की उनकी लड़ाई को साहस और दृढ़ संकल्प की मिसाल के तौर पर याद किया।
Alfred Tyrone Cooke चले गए, लेकिन Kalaikunda के उस आसमान में उनकी उड़ान, उनका साहस और उनकी कहानी अब भी भारतीय सैन्य इतिहास का हिस्सा रहेगी। उनका साहस, कर्तव्य के प्रति निष्ठा और साथी के लिए जान की बाजी लगाने का जज़्बा आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा एक बेहतरीन सीख और प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
Source – NDTV
Alfred Tyrone Cooke: उपलब्धियां और सम्मान

🏅 वीर चक्र (Vir Chakra)
- सम्मान: 1965 भारत-पाकिस्तान युद्ध
- पुरस्कार की प्रभावी तारीख: 7 सितंबर 1965
- यूनिट: 14 Squadron, Indian Air Force
- विमान: Hawker Hunter
✈️ Kalaikunda की ऐतिहासिक हवाई लड़ाई
7 सितंबर 1965 को Kalaikunda Airfield पर पाकिस्तानी Sabre विमानों के हमले के दौरान Cooke ने combat air patrol का नेतृत्व करते हुए दुश्मन के विमानों को intercept किया। आधिकारिक वीर चक्र citation के अनुसार उन्होंने असाधारण साहस और कौशल दिखाते हुए एक पाकिस्तानी Sabre को हवा में ही मार गिराया। इसके बाद उन्होंने दूसरे विमान के पीछे अपनी स्थिति बनाई, लेकिन तब तक उनके विमान का ammunition खत्म हो चुका था। इसके बावजूद उन्होंने उसका पीछा जारी रखा और दुश्मन के विमानों को पीछे हटने पर मजबूर किया।
⚔️ साहस और नेतृत्व की आधिकारिक प्रशंसा
वीर चक्र citation में Cooke के साहस, नेतृत्व, असाधारण कौशल और कर्तव्य के प्रति समर्पण को भारतीय वायुसेना की सर्वोत्तम परंपराओं के अनुरूप बताया गया है।

🛩️ 1965 के युद्ध के प्रमुख Fighter Pilots में पहचान
Kalaikunda की लड़ाई ने Cooke को 1965 के युद्ध के उल्लेखनीय भारतीय fighter pilots में स्थापित किया। NDTV के अंतिम इंटरव्यू के अनुसार उन्होंने उस दिन पाकिस्तानी Sabres से बेहद कम ऊंचाई पर मुकाबला किया था और कम से कम एक Sabre को मार गिराया; उनके अनुसार उन्होंने तीसरे विमान से भी engagement की, इससे पहले कि उनका ammunition खत्म हो गया।
🏆 सम्मान को Squadron को समर्पित किया
2015 में Australia से भारत लौटकर Cooke ने अपना Vir Chakra 14 Squadron को सौंप दिया, ताकि यह पदक उनकी पुरानी squadron की विरासत और आने वाले वायुयोद्धाओं के लिए प्रेरणा का हिस्सा बना रहे।
📜 सेवा काल
Cooke ने भारतीय वायुसेना में 1961 में कमीशन प्राप्त किया और 1968 में सेवा से अलग हुए। उनके service record में Vir Chakra को उनके एकमात्र दर्ज award के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
🌟 विरासत
Kalaikunda की लड़ाई में उनका साहस और अपने कर्तव्य के प्रति समर्पण आज भी उनकी सैन्य विरासत का सबसे अहम हिस्सा है। उनके अंतिम इंटरव्यू में दर्ज उनकी अपनी स्मृतियां इस विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बन गई हैं।