नई दिल्ली। दिल्ली में मौसमी फ्लू के बीच H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। साल 2026 में अब तक दिल्ली में H1N1 के करीब 1,777 मामले सामने आ चुके हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 229 थी। यानी मामलों में करीब आठ गुना उछाल आया है। बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और डॉक्टर लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रहे हैं। हालांकि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने साफ किया है कि देश में H1N1 का कोई नया स्ट्रेन नहीं मिला है। मौजूदा संक्रमण मौसमी इन्फ्लूएंजा का हिस्सा है और फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है।
H1N1 क्या है और कैसे फैलता है?
H1N1 इन्फ्लूएंजा-A वायरस का एक प्रकार है, जो मुख्य रूप से सांस की बीमारी पैदा करता है। 2009 में इस वायरस की वजह से महामारी फैली थी, लेकिन इसके बाद यह खत्म नहीं हुआ। अब यह मौसमी फ्लू के वायरस में शामिल है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या करीब संपर्क में आने से वायरस फैल सकता है। भीड़भाड़ वाली और कम हवा वाली जगहों जैसे स्कूल, ऑफिस, सार्वजनिक परिवहन और बंद कमरों में संक्रमण तेजी से फैलने का खतरा रहता है।
इन 7 लक्षणों को हल्के में न लें
H1N1 के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल या फ्लू जैसे ही हो सकते हैं। इसलिए सिर्फ लक्षण देखकर H1N1 की पुष्टि नहीं की जा सकती। फिर भी इन संकेतों पर खास ध्यान देना जरूरी है।
1. अचानक तेज बुखार: शरीर का तापमान बढ़ना और लगातार बुखार रहना फ्लू का प्रमुख संकेत हो सकता है।
2. लगातार खांसी: सूखी या लगातार बनी रहने वाली खांसी को नजरअंदाज न करें।
3. गले में खराश: गले में दर्द, जलन या निगलने में परेशानी भी फ्लू के लक्षण हो सकते हैं।
4. शरीर और मांसपेशियों में दर्द: H1N1 में तेज बॉडी पेन और कमजोरी महसूस होना आम है।
5. सिरदर्द और ठंड लगना: अचानक सिरदर्द, कंपकंपी या ठंड लगने के साथ बुखार हो सकता है।
6. बहुत ज्यादा थकान: सामान्य काम करने पर भी असामान्य कमजोरी और थकान महसूस होना ध्यान देने वाला लक्षण है।
7. सांस लेने में परेशानी: सांस फूलना, सीने में दर्द या ऑक्सीजन स्तर गिरना गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षणों में तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत?
छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से फेफड़े, हृदय, किडनी, लिवर या दूसरी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों में फ्लू की जटिलताओं का खतरा ज्यादा हो सकता है। कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को भी लक्षण दिखने पर डॉक्टर से जल्द संपर्क करना चाहिए।
बचाव के लिए डॉक्टरों की जरूरी सलाह
H1N1 से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि खांसी या छींक आने पर मुंह और नाक ढकें, हाथों को साबुन से बार-बार धोएं और बीमार होने पर दूसरों से दूरी बनाए रखें। भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क का इस्तेमाल भी संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। बुखार और फ्लू जैसे लक्षण होने पर स्कूल या ऑफिस जाने के बजाय घर पर आराम करना बेहतर है।
डॉक्टरों की सलाह के बिना एंटीबायोटिक या दूसरी दवाएं शुरू नहीं करनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर जांच और उपचार तय करते हैं। मौसमी इन्फ्लूएंजा की वैक्सीन भी खासकर जोखिम वाले लोगों के लिए सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण तरीका हो सकती है।
सबसे अहम बात यह है कि H1N1 के बढ़ते मामलों को लेकर डरने की नहीं, सावधान रहने की जरूरत है। ICMR के मुताबिक फिलहाल कोई नया H1N1 स्ट्रेन सामने नहीं आया है। लेकिन तेज बुखार के साथ सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी या हालत बिगड़ने जैसे संकेत मिलें तो देरी करना भारी पड़ सकता है।