Dinman Times
  • वीडियो
  • वेब स्टोरीज
Sign In
  • होम
  • देश
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्‍ली
    • झारखण्‍ड
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Reading: ‘अब तटस्थ नहीं रह सकतीं’… क्रिस्टीन लागार्ड का बड़ा फैसला, कार्यकाल से 9 महीने पहले छोड़ेंगी ECB की कमान
साझा करें
Notification
Font ResizerAa
Dinman Times
  • वेब स्टोरीज
  • होम
  • देश
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Search
  • होम
  • देश
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्‍ली
    • झारखण्‍ड
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Follow US
© 2026. All Rights Reserved.

Home - विदेश - ‘अब तटस्थ नहीं रह सकतीं’… क्रिस्टीन लागार्ड का बड़ा फैसला, कार्यकाल से 9 महीने पहले छोड़ेंगी ECB की कमान

‘अब तटस्थ नहीं रह सकतीं’… क्रिस्टीन लागार्ड का बड़ा फैसला, कार्यकाल से 9 महीने पहले छोड़ेंगी ECB की कमान

आभा शुक्ला
Last updated: अक्टूबर 30, 2026 10:25 अपराह्न
By : आभा शुक्ला
Published on : 40 मिनट पहले
क्रिस्टीन लागार्ड
क्रिस्टीन लागार्ड
साझा करें

सच बोलने की आजादी के लिए पद छोड़ने का ऐलान, यूरोप में महंगाई ने बढ़ाई केंद्रीय बैंक की चिंता; ब्याज दरें बढ़ाने पर भी हुई गंभीर चर्चा, दिसंबर में हो सकता है बड़ा फैसला

यूरोप की अर्थव्यवस्था इस समय महंगाई, महंगे कर्ज और राजनीतिक अनिश्चितता के दबाव से गुजर रही है। इसी बीच यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) की अध्यक्ष क्रिस्टीन लागार्ड ने एक ऐसा ऐलान किया है, जिसने आर्थिक और राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। उन्होंने अपने निर्धारित कार्यकाल से करीब नौ महीने पहले पद छोड़ने का फैसला किया है। वजह बताते हुए लागार्ड ने कहा कि अब वह तटस्थ नहीं रह सकतीं और दुनिया के अहम मुद्दों पर अपनी बात रखने की आजादी चाहती हैं।

गुरुवार को फ्रैंकफर्ट में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक के प्रमुख से जिस राजनीतिक तटस्थता की अपेक्षा की जाती है, वह अब उन्हें सहज नहीं लगती। उनके मुताबिक, वह सच में रुचि रखती हैं और उन्हें लगता है कि कई बार सच को गलत तरीके से पेश किया जाता है या उसका स्वरूप बिगाड़ दिया जाता है।

लागार्ड 7 फरवरी 2027 को ECB अध्यक्ष का पद छोड़ेंगी, जबकि उनका आठ साल का कार्यकाल अक्टूबर 2027 में पूरा होना था। उनके इस फैसले के साथ ही यूरोप के सबसे प्रभावशाली आर्थिक संस्थानों में से एक के नए नेतृत्व को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

Dinman Times ads 728-90

तटस्थता की सीमा से बाहर बोलना चाहती हैं लागार्ड

लागार्ड ने स्पष्ट किया कि ECB अध्यक्ष की भूमिका में रहते हुए उन्हें मौद्रिक नीति से जुड़े विषयों पर ही सार्वजनिक रूप से बोलना होता है। केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए उसके अधिकारियों से राजनीतिक रूप से तटस्थ रहने की अपेक्षा की जाती है। यही तटस्थता संस्था की स्वतंत्रता की कीमत भी है।

ये भी पढ़े

जमुई में नवी मुंबई पुलिस की कार्रवाई, साइबर ठगी का आरोपित गिरफ्तार
नौकरी की चिंता में घटाई मिर्गी की दवा, ChatGPT देता रहा भरोसा… 31 साल की युवती की मौत के बाद OpenAI पर मुकदमा
अनंत सिंह की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, 1 दिसंबर तक करना होगा सरेंडर; दुलारचंद हत्याकांड में बड़ा झटका
चार कारों का काफिला, गुप्त उड़ान और मियामी में ठिकाना: चुनाव हारते ही ब्राजील छोड़ गए फ्लावियो बोल्सोनारो

लेकिन लागार्ड अब इस सीमा से बाहर निकलकर उन मुद्दों पर बोलना चाहती हैं, जिन्हें वह वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण मानती हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और वित्तीय संस्थानों में दो दशक से अधिक समय तक काम करने के बाद उनके पास कहने के लिए बहुत कुछ है। हालांकि, लोग उनकी बात सुनेंगे या नहीं, यह अलग सवाल है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि पद छोड़ने के बाद वह कौन-सी जिम्मेदारी संभालेंगी। फ्रांस के अगले राष्ट्रपति चुनाव में किसी उम्मीदवार का समर्थन करने के सवाल पर भी उन्होंने कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई।

महंगाई 3.8 प्रतिशत पर, ब्याज दरें बढ़ाने पर हुई चर्चा

लागार्ड के इस्तीफे की घोषणा के साथ ही ECB की मौद्रिक नीति बैठक भी चर्चा में रही। बैंक ने फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन बैठक में दरें बढ़ाने के विकल्प पर गंभीरता से विचार हुआ।

Dinman Times ads 728-90

ECB ने जमा सुविधा की प्रमुख ब्याज दर 2.5 प्रतिशत पर बरकरार रखी। मुख्य पुनर्वित्त दर 2.65 प्रतिशत और सीमांत ऋण सुविधा दर 2.90 प्रतिशत पर कायम रखी गई। बैंक का यह फैसला सर्वसम्मति से हुआ।

यूरोजोन में महंगाई की दर सितंबर में बढ़कर 3.8 प्रतिशत पहुंच गई, जबकि ECB का लक्ष्य 2 प्रतिशत है। ऊर्जा की कीमतों में तेजी इसका एक बड़ा कारण है। सितंबर में ऊर्जा की कीमतें पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 18.9 प्रतिशत अधिक रहीं।

लागार्ड के मुताबिक, सितंबर में जारी आर्थिक अनुमानों के बाद दो अहम बदलाव सामने आए हैं। पहला, पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और दूसरा, लंबी अवधि के कर्ज की लागत में इजाफा। इन दोनों कारणों से केंद्रीय बैंक के सामने ब्याज दरें बढ़ाने का विकल्प गंभीरता से विचार करने लायक बन गया।

दिसंबर में बढ़ सकती हैं ब्याज दरें?

ECB ने फिलहाल दरों को स्थिर रखा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आगे भी यही स्थिति बनी रहेगी। लागार्ड ने कहा कि बैंक हर बैठक में उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर फैसला करेगा और अभी किसी निश्चित रास्ते का वादा नहीं किया जा सकता।

Dinman Times ads 728-90

दिसंबर की बैठक से पहले बैंक को महंगाई के दो और आंकड़े, तीसरी तिमाही की आर्थिक वृद्धि और वेतन से जुड़े आंकड़े मिलेंगे। इनकी समीक्षा के बाद अगला फैसला लिया जाएगा।

लागार्ड ने संकेत दिया कि अगर कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ तो ब्याज दरों की आगे की दिशा काफी हद तक स्पष्ट हो सकती है। उन्होंने खास तौर पर मूल महंगाई यानी ऊर्जा और खाद्य पदार्थों जैसी अस्थिर कीमतों को हटाकर देखी जाने वाली महंगाई पर ध्यान देने की बात कही।

बाजार के लिए यह संकेत महत्वपूर्ण है, क्योंकि ब्याज दरों में बढ़ोतरी का असर केवल बड़े कारोबारों तक सीमित नहीं रहता। इससे घर खरीदने के लिए लिया जाने वाला कर्ज, कारोबारियों के लोन और आम लोगों की उधारी भी महंगी हो सकती है।

फ्रांस के बढ़ते कर्ज ने यूरोप की चिंता बढ़ाई

ECB की बैठक के दौरान फ्रांस की आर्थिक स्थिति भी एक बड़ा मुद्दा रही। देश में सरकारी कर्ज की लागत तेजी से बढ़ी है। फ्रांस की 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड पिछले सप्ताह 5 प्रतिशत के पार पहुंच गई थी। यह स्तर वर्ष 2002 के बाद पहली बार देखा गया।

Dinman Times ads 728-90

गुरुवार को इसमें कुछ गिरावट आई और यह करीब 4.88 प्रतिशत पर रही। फिर भी जर्मनी की तुलना में फ्रांस के लिए कर्ज लेना काफी महंगा बना हुआ है। फ्रांस और जर्मनी की बॉन्ड यील्ड के बीच अंतर बढ़ना यूरोजोन के वित्तीय बाजारों में चिंता का संकेत माना जा रहा है।

लागार्ड ने किसी देश का नाम लेकर टिप्पणी नहीं की, लेकिन कहा कि दुनिया भर में लंबी अवधि की बॉन्ड यील्ड बढ़ रही है। इसके पीछे महंगाई की आशंका, ब्याज दरों की संभावित दिशा और बड़ी टेक कंपनियों की ओर से डेटा सेंटर बनाने के लिए जारी किए जा रहे भारी कर्ज जैसे कारण हैं।

उन्होंने अधिक कर्ज वाले देशों को आगाह किया कि उन्हें कुछ समय तक ऊंची ब्याज दरों के लिए तैयार रहना होगा और यूरोपीय वित्तीय नियमों के दायरे में अपने बजट का प्रबंधन करना होगा।

बाजार में अस्थिरता बढ़ी तो ECB के पास कार्रवाई के विकल्प

लागार्ड ने यह भी साफ किया कि यदि सरकारी बॉन्ड बाजारों में असामान्य और अव्यवस्थित उतार-चढ़ाव से ECB की मौद्रिक नीति का असर आम लोगों और कारोबारों तक पहुंचने में बाधा आती है, तो बैंक के पास हस्तक्षेप करने के साधन मौजूद हैं।

Dinman Times ads 728-90

दरअसल, केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों का असर तभी प्रभावी होता है, जब उसका प्रभाव बैंकों, कंपनियों और आम लोगों की उधारी की लागत तक पहुंचे। अगर किसी देश के बॉन्ड बाजार में अत्यधिक उथल-पुथल होती है, तो यह प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

यूरोपीय कर्ज संकट और कोरोना महामारी के दौरान ECB पहले भी संकटग्रस्त देशों के बॉन्ड खरीदकर बाजार को स्थिर करने के कदम उठा चुका है। हालांकि, 2022 में शुरू किया गया ट्रांसमिशन प्रोटेक्शन इंस्ट्रूमेंट अब तक इस्तेमाल नहीं हुआ है।

अब किसे मिलेगी ECB की कमान?

लागार्ड के जाने के बाद ECB के नए अध्यक्ष की नियुक्ति यूरोपीय परिषद करेगी। बैंक ने कहा है कि नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया के बावजूद संस्था का कामकाज सामान्य रूप से जारी रहेगा। लागार्ड ने भी भरोसा दिलाया कि उनके जाने से संस्था के काम में रुकावट नहीं आएगी।

नए अध्यक्ष की दौड़ में नीदरलैंड के पूर्व केंद्रीय बैंक प्रमुख क्लास नॉट और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के प्रमुख पाब्लो हर्नांडेज डी कोस के नाम चर्चा में हैं। हालांकि, अभी किसी नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है।

Dinman Times ads 728-90

लागार्ड की विदाई ऐसे समय हो रही है, जब यूरोप को महंगाई पर नियंत्रण, बढ़ती ऊर्जा लागत, सरकारी कर्ज और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाना है। वह फरवरी 2027 तक ECB की अध्यक्ष रहेंगी और इस दौरान दिसंबर तथा फरवरी की दो मौद्रिक नीति बैठकों की अध्यक्षता करेंगी।

दिसंबर की बैठक अब खास महत्व रखती है। यदि ऊर्जा की कीमतों और महंगाई का दबाव बना रहता है, तो ECB ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला कर सकता है। ऐसे में लागार्ड का कार्यकाल समाप्त होने से पहले लिया गया यह फैसला यूरोप की अर्थव्यवस्था और आने वाले नेतृत्व—दोनों के लिए अहम साबित हो सकता है।

TAGGED:ECBअंतरराष्ट्रीय खबरक्रिस्टीन लागार्डफ्रांसब्याज दरमहंगाईयूरोपयूरोपीय अर्थव्यवस्था
ख़बर साझा करें
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
abha
Byआभा शुक्ला
आभा शुक्ला पत्रकारिता, जनसंपर्क और कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन के क्षेत्र में 5+ वर्षों के अनुभव वाली पत्रकार एवं कम्युनिकेशन प्रोफेशनल हैं। पटना से जुड़ीं आभा को समाचार शोध, रिपोर्टिंग, कंटेंट डेवलपमेंट, मीडिया आउटरीच और जनसंपर्क अभियानों का अनुभव है। उन्होंने Zee News में ट्रेनी जर्नलिस्ट के रूप में समाचार शोध, रिपोर्टिंग और कंटेंट डेवलपमेंट का अनुभव हासिल किया। इसके बाद UNE Consultant में PR Executive के तौर पर मीडिया आउटरीच, PR कैंपेन और कॉर्पोरेट इवेंट्स पर काम किया। TCS में Associate के रूप में उन्होंने डेटा मैनेजमेंट, रिसर्च और सूचना प्रबंधन से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं। आभा शुक्ला तथ्यपरक, शोध-आधारित और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से सामाजिक एवं समसामयिक मुद्दों को पाठकों तक पहुंचाने में रुचि रखती हैं।
पिछली ख़बर Anant Singh अनंत सिंह की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, 1 दिसंबर तक करना होगा सरेंडर; दुलारचंद हत्याकांड में बड़ा झटका
अगली ख़बर ChatGPT की सलाह पर मिर्गी की दवा घटाई? नौकरी की चिंता में घटाई मिर्गी की दवा, ChatGPT देता रहा भरोसा… 31 साल की युवती की मौत के बाद OpenAI पर मुकदमा
Google prefered

गूगल पर फेवरेट बनाएँ

ये भी पढ़ें

जमुई में साइबर ठगी का आरोपित गिरफ्तार, मुंबई पुलिस की कार्रवाई

जमुई में नवी मुंबई पुलिस की कार्रवाई, साइबर ठगी का आरोपित गिरफ्तार

ChatGPT की सलाह पर मिर्गी की दवा घटाई?

नौकरी की चिंता में घटाई मिर्गी की दवा, ChatGPT देता रहा भरोसा… 31 साल की युवती की मौत के बाद OpenAI पर मुकदमा

क्रिस्टीन लागार्ड

‘अब तटस्थ नहीं रह सकतीं’… क्रिस्टीन लागार्ड का बड़ा फैसला, कार्यकाल से 9 महीने पहले छोड़ेंगी ECB की कमान

Anant Singh

अनंत सिंह की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, 1 दिसंबर तक करना होगा सरेंडर; दुलारचंद हत्याकांड में बड़ा झटका

चुनाव हारते ही ब्राजील से भागे फ्लावियो बोल्सोनारो, ट्रंप की मदद से पहुंचे अमेरिका

चार कारों का काफिला, गुप्त उड़ान और मियामी में ठिकाना: चुनाव हारते ही ब्राजील छोड़ गए फ्लावियो बोल्सोनारो

Dinman Ads

Get Connected with us on social networks

Facebook-f X-twitter Instagram Youtube Linkedin-in

Poppular Categories

  • बिहार
  • देश
  • अपराध
  • राजनीति
  • मनोरंजन
  • विदेश
  • धर्म
  • खेल
  • टेक्नोलॉजी
  • बिज़नेस

Download APP

Google-play Apple
  • About us
  • Privacy Policy
  • Terms and Condition
  • Cookies Policy
  • Contact us
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?