अमेरिका के टेनेसी में 30 सितंबर को मृत्युदंड देने की कोशिश नाकाम हुई; Christa Pike अब होश में हैं और बात कर रही हैं, लेकिन निमोनिया, खून के थक्के और हाथों में गंभीर चोट से जूझ रहीं—अदालत ने घटना से जुड़े सभी सबूत सुरक्षित रखने का आदेश दिया
अमेरिका के टेनेसी में मृत्युदंड की प्रक्रिया के दौरान घातक इंजेक्शन दिए जाने के बावजूद जिंदा बची Christa Pike अब होश में आ गई हैं और बातचीत कर रही हैं। 30 सितंबर को उन्हें पेंटोबार्बिटल की दो घातक खुराक देकर मृत्युदंड देने की कोशिश की गई थी, लेकिन प्रक्रिया सफल नहीं हुई। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां करीब एक हफ्ते तक वह बेहोश और वेंटिलेटर पर रहीं। अब उनकी हालत में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है।
मृत्युदंड की प्रक्रिया में क्या हुआ था?
Christa Pike को टेनेसी की Riverbend Maximum Security Institution में घातक इंजेक्शन के जरिए मृत्युदंड दिया जाना था। 30 सितंबर की शाम प्रक्रिया शुरू हुई और उन्हें पेंटोबार्बिटल की दो खुराक दी गईं। लेकिन अपेक्षित तरीके से उनकी मौत नहीं हुई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक प्रक्रिया सामान्य से काफी ज्यादा समय तक चली। इस दौरान Pike के हिलने-डुलने और सांस लेने की जानकारी सामने आई। बाद में उनकी हालत गंभीर हो गई और उन्हें अस्पताल ले जाया गया।

उनके वकीलों के मुताबिक, दोनों हाथों में आईवी लाइन से जुड़ी समस्या के कारण दवा नस में जाने के बजाय आसपास के ऊतकों में पहुंच गई हो सकती है। इससे उनके हाथों और बाहों में गंभीर सूजन, जलन और छाले हो गए। हालांकि इस पूरी प्रक्रिया में वास्तव में क्या गड़बड़ी हुई, इसकी आधिकारिक जांच अभी जारी है।
पहले बताया गया था ब्रेन-डेड, फिर अचानक होश में आईं
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला मोड़ यह रहा कि Christa Pike की कानूनी टीम को बताया गया था कि वह ब्रेन-डेड हैं और उन्हें लाइफ सपोर्ट से हटाने की तैयारी की जा रही है। लेकिन इसके बाद उनकी हालत में अप्रत्याशित बदलाव आया और वह होश में आ गईं।
उनके वकील Randy Spivey के मुताबिक, होश में आने के बाद Pike ने बात करना शुरू किया। उन्हें इस समय काफी मानसिक उलझन है और उन्हें पता है कि राज्य ने उन्हें मृत्युदंड देने की कोशिश की थी।
हालांकि उनकी मेडिकल स्थिति अभी भी गंभीर है। वकीलों के अनुसार उन्हें निमोनिया है, एक हाथ में खून का थक्का है, वह अभी निगल नहीं पा रही हैं और दोनों हाथों को हिलाने में सक्षम नहीं हैं। उनके हाथों और हथेलियों में काफी सूजन है और डॉक्टर अभी यह नहीं बता सकते कि उनकी बाहों का कितना काम वापस आ पाएगा।

Christa Pike को मृत्युदंड क्यों मिला था?
Christa Pike को 1995 में अपनी 19 वर्षीय सहपाठी Colleen Slemmer की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। घटना के समय Pike किशोरावस्था में थीं। अभियोजन के मुताबिक Pike और दो अन्य किशोरों ने Slemmer को एक सुनसान इलाके में ले जाकर उसके साथ मारपीट और यातना की और उसकी हत्या कर दी।
इस मामले में Pike को 1996 में मृत्युदंड सुनाया गया था और वह लंबे समय से टेनेसी की डेथ रो में थीं। वह टेनेसी की डेथ रो में अकेली महिला कैदी थीं।
अब अदालत में क्या हुआ?
मृत्युदंड की असफल प्रक्रिया के बाद Christa Pike के वकीलों ने अदालत से घटना से जुड़े सभी सबूत सुरक्षित रखने की मांग की थी। 7 अक्टूबर को Davidson County Chancery Court की जज I’Ashea Myles ने राज्य को इस मामले से जुड़े सबूत सुरक्षित रखने का आदेश दिया।
इसमें घातक इंजेक्शन में इस्तेमाल की गई दवाएं, सीरिंज, आईवी लाइन, मेडिकल उपकरण, रिकॉर्ड, तस्वीरें, वीडियो, ऑडियो, कर्मचारियों के नोट्स, ईमेल और घटना के दौरान हुई किसी भी परेशानी या देरी से जुड़ी जानकारी शामिल है। अगर कोई संबंधित सामग्री पहले ही नष्ट या मिटाई जा चुकी हो, तो उसे वापस हासिल करने की कोशिश करने का भी निर्देश दिया गया है।

वकील अब क्या चाहते हैं?
Christa Pike की कानूनी टीम अब उनकी मृत्युदंड की सजा को बिना पैरोल वाली उम्रकैद में बदलने की मांग कर रही है। उनका कहना है कि मृत्युदंड की असफल प्रक्रिया में Pike को गंभीर शारीरिक नुकसान हुआ है और उनकी रिकवरी लंबी होगी।
वकीलों ने पहले भी टेनेसी के गवर्नर Bill Lee से उनकी सजा कम करने की अपील की थी। अब इस घटना के बाद उन्होंने अपनी मांग दोबारा उठाई है।
टेनेसी की पूरी मृत्युदंड व्यवस्था पर उठे सवाल
Christa Pike का मामला सिर्फ एक कैदी की असफल मृत्युदंड प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है। इससे टेनेसी में घातक इंजेक्शन की प्रक्रिया और उसकी निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
घटना के बाद गवर्नर Bill Lee ने राज्य में बाकी बचे 2026 के मृत्युदंडों को रोक दिया और घटना की स्वतंत्र समीक्षा के आदेश दिए। टेनेसी के जेल प्रमुख Frank Strada ने भी इस घटना के बाद पद से इस्तीफा दे दिया। इससे पहले इसी साल एक अन्य कैदी को मृत्युदंड देने की प्रक्रिया भी आईवी लाइन की समस्या के कारण रोकनी पड़ी थी।

फिलहाल Christa Pike अस्पताल में गंभीर हालत में इलाज करा रही हैं। एक ऐसी महिला जिसे 30 सितंबर को घातक इंजेक्शन के जरिए मृत्युदंड दिया जाना था, वह अब होश में आकर बात कर रही हैं। लेकिन उनकी सेहत, हाथों की स्थिति और आगे की कानूनी लड़ाई—तीनों का रास्ता अभी लंबा है।
