एनएमसीएच में भर्ती बच्चों से मिले केंद्रीय मंत्री, परिजनों से की बात; इलाज में कमी नहीं होने का दिया भरोसा, पूछा—रात के अंधेरे में इतनी बड़ी संख्या में बच्चे बिना प्रशासनिक सुरक्षा के नाव से कैसे जा रहे थे?
पटना सिटी। वैशाली जिले के राघोपुर में हुए नाव हादसे के बाद बच्चों के इलाज और दुर्घटना की जिम्मेदारी तय करने का मुद्दा सामने आया है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान बुधवार को पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एनएमसीएच) पहुंचे। यहां शिशु रोग विभाग में भर्ती हादसे के पीड़ित बच्चों और उनके परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने चिकित्सकों से बच्चों की सेहत और इलाज की स्थिति की जानकारी ली और भरोसा दिया कि उपचार में किसी तरह की कमी नहीं होने दी जाएगी।
चिराग पासवान ने कहा कि यह बेहद दुखद और हृदयविदारक घटना है। हादसे की जांच की जा रही है और इसमें जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घटना की जानकारी दे दी गई है।
बच्चों के इलाज पर डॉक्टरों से ली जानकारी
एनएमसीएच पहुंचने पर केंद्रीय मंत्री ने शिशु रोग विभाग में भर्ती बच्चों के परिवारों से बातचीत की। उन्होंने अस्पताल अधीक्षक प्रो. डॉ. राजीव रंजन सिन्हा, प्राचार्य प्रो. डॉ. उषा कुमारी और विभागाध्यक्ष डॉ. अखिलेश कुमार से बच्चों के उपचार के बारे में जानकारी ली।
मंत्री ने कहा कि सरकार की कोशिश रहेगी कि सभी बच्चे स्वस्थ होकर सुरक्षित अपने घर लौटें। उन्होंने इलाज में किसी भी तरह की कमी नहीं होने देने का भरोसा दिया। हादसे के बाद अस्पताल में भर्ती बच्चों के परिजनों के लिए यह आश्वासन महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके सामने एक ओर अपनों की जान जाने का दुख है, तो दूसरी ओर घायल बच्चों के जल्द स्वस्थ होने की चिंता है।

रात के अंधेरे में नाव से बच्चे कैसे जा रहे थे?
हादसे की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए चिराग पासवान ने पूछा कि रात के अंधेरे में इतनी बड़ी संख्या में बच्चे बिना प्रशासनिक सुरक्षा के नाव से कैसे जा रहे थे। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की जांच जरूरी है, ताकि यह पता चल सके कि हादसे की परिस्थितियां क्या थीं और सुरक्षा व्यवस्था में कहीं चूक हुई थी या नहीं।
मंत्री के अनुसार, उन्हें जानकारी मिली है कि ग्रामीणों की ओर से नाव उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ऐसी मांग की गई थी, तो उसे किस स्तर पर नजरअंदाज किया गया। हालांकि, इस संबंध में किस अधिकारी या विभाग को मांग दी गई थी और उस पर क्या कार्रवाई हुई, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
ग्रामीणों और पीड़ित परिवारों से बात कर होगी जांच
चिराग पासवान ने कहा कि घटना की पूरी जानकारी जुटाने के लिए पीड़ित परिवारों और ग्रामीणों से बातचीत की जाएगी। उनका कहना था कि जांच के दौरान यह समझना जरूरी है कि बच्चे नाव से क्यों जा रहे थे, रात में यात्रा की परिस्थितियां क्या थीं और प्रशासनिक स्तर पर क्या व्यवस्था की गई थी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। मंत्री के बयान से संकेत मिलता है कि हादसे की जांच केवल दुर्घटना के कारणों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित जिम्मेदारियों की भी पड़ताल होनी चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी को दी गई घटना की जानकारी
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस दुखद घटना से अवगत करा दिया गया है। हादसे में बच्चों की मौत और अन्य लोगों के घायल होने के बाद राहत, उपचार और जिम्मेदारी तय करने का विषय अहम हो गया है।
राघोपुर नाव हादसे में प्रशासन की ओर से पहले जारी जानकारी के मुताबिक, 13 बच्चों की डूबने से मौत हुई थी। छह लोगों—चार बच्चियों और दो वयस्कों—को बचाकर इलाज के लिए एनएमसीएच, पटना भेजा गया था। चिराग पासवान ने अस्पताल पहुंचकर भर्ती बच्चों के उपचार की जानकारी ली और उनके परिवारों को भरोसा दिया कि इलाज में कोई कमी नहीं होगी।
अब हादसे की परिस्थितियों, ग्रामीणों की ओर से नाव की मांग किए जाने संबंधी जानकारी और प्रशासनिक सुरक्षा की भूमिका की जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि दुर्घटना से पहले क्या-क्या हुआ था और किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं।
